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छोटी उम्र की बड़ी सोच के साथ बीटीआई ग्राउंड में आइडियाज और इनोवेशन का लगा कुंभ

Tabir Hussain

Publish: Oct 16, 2019 01:13 AM | Updated: Oct 16, 2019 01:13 AM

Raipur

Anusuiya Uikeycg rajyapal46वीं जवाहरलाल नेहरू साइंस एग्जीबिशन

ताबीर हुसैन @ रायपुर। लाइफस्टाल सरल हो इसके लिए रिसर्च, साइंस और टेक्नोलॉजी का मेजर रोल रहा है। ये सभी चीजें महज एक सोच या आइिडए से आती हैं। इसके लिए उम्र नहीं बल्कि क्रिएटिविटी मायने रखती है। शंकर नगर बीटीआई ग्राउंड आपको बुला रहा है। यहां छात्रों ने एक से बढ़कर एक ऐसे प्रोटोटाइप मॉडल बनाए हैं जिसे देखकर आप भी अचरज में पड़ जाएंगे। मंगलवार को यहां 46वीं जवाहरलाल नेहरू साइंस एग्जीबिशन का उद्घाटन राज्यपाल अनसुईया उइके ने किया। यहां 18 राज्यों से 127 मॉडल एग्जीबिट किए गए हैं जो आम लोगों के अलावा खेती-किसानी और स्टूडेंट्स से संबंधित हैं। राज्यपाल ने प्रदर्शन का अवलोकन करते हुए देशभर से आए विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने कहा, विज्ञान का विकास इस तरह से किया जाना चाहिए कि पर्यावरण संरक्षित रहे और प्रकृति द्वारा प्रदत्त सारे लाभों को प्राप्त किया सकें। उन्होंने कहा कि विज्ञान का उपयोग विकास के लिए हो, विनाश के लिए नहीं। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा, आज के युग में जीवन के विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान जरूरी है।

रोबोट करेगा खेती में हेल्प

भूवनेश्वर डीएवी स्कूल से आए आठवीं के छात्र साईं सुमन बेबारता और तन्वी मलिक ने फॉर्म ओ बोट नाम से रोबोट का मॉडल बनाया है। हैंडीकेप्ड किसानों के लिए यह कारगर साबित होगा क्योंकि वे इसे रिमोर्ट से कंट्रोल कर सकेंगे। इसकी मदद से खेतों की जोताई, खरपतवार की छंटाई, रोपाई और सिंचाई का काम किया जा सकता है। इसे बनाने में 2 हजार रुपए खर्च आए हैं लेकिन जब कमर्शियल तौर पर बनाया जाएगा तो ट्रैक्टर से कम खर्च होगा जबकि उससे ज्यादा मल्टीपल यूज होगा।

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स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक दूर करेगी डिप्रेशन

आंखों की रौशनी का महत्व वही बता सकते हैं जिनकी आंखें नहीं हैं। बढ़ती उम्र के साथ आंखों में रौशनी न होना डिप्रेशन का सबब बनता है। क्योंकि वे किसी दूसरे पर डिपेंड रहते हैं। त्रिवेणीगंज बिहार कक्षा दसवीं की शिल्पी ज्योति ने महज 1 हजार रुपए में स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक बनाई है जो बिन आंखों के लोगों के लिए सहारा ही नहीं बल्कि सच्चा दोस्त बनेगी। शिल्पी ने बताया कि आसपास के कुछ ऐसे लोगों को देखा जिनकी आंखें नहीं हैं। बातचीत पर पला चला कि वे अवसाद से भी ग्रस्त हैं। तब उसने इस बारे में सोचा और इलेक्ट्रानिक चीजों से स्मार्ट छड़ी तैयार की। लाठी लेकर चलने वाले व्यक्ति को दूरी के हिसाब अलार्म से सूचना मिलेगी कि कोई चीज कितनी पास है। छड़ी अगर घर में कहीं रह गई है तो रिमोर्ट से उसे तलाश सकते हैं। छड़ी के साथ ही इसका यूज ग्लोब में भी किया जा सकता है।

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100 रुपए में तैयार किया वाटर प्यूरीफायर

मंडी हिमाचल प्रदेश की पूजा 12वीं की छात्रा हैं। उन्होंने महज 100 रुपए की लागत से ऐसा मॉडल बनाया है जो आज की तारीख में हर किसी के काम का है। एक बाल्टी, रेत, प्लास्टिक पाइप और कटोरानुमा पात्र से होम मेड बॉयोसेंड वाटर फिल्टर तैयार किया है। पूजा ने बताया कि रेत और बाजरी को बाल्टी में डालकर 15 से 20 दिन तक रोज धाएंगे। इसके ऊपर प्लास्टिक पात्र रख देंगे। बाल्टी के ऊपरी हिस्से में पाइप फिट कर देंगे। यह बॉयो फिल्म कॉन्सेप्ट पर आधारित है। बॉयो फिल्म का काम पानी की अशुद्धियों को दूर करना होता है। ऊपर से पानी डालने पर यह साफ और शुद्ध होकर बाहर आएगा।

इको फ्रेंडली एसी, मिलेगी कुदरती हवा
एसी से आर्टिफिशयली हवा मिलती है जो बॉडी के लिए नुकसानदायक होती है। गंजबासोदा से आए कक्षा 12वीं के छात्र करन सिंह तोमर ने इको फ्रेंडली एसी तैयार किया है। इसके लिए घर के आंगन में 1 मीटर गड्ढा कर सिस्टम को फिट कर सकते हैं। मॉडल में करन ने 3 एग्जास्ट फैन, 16 एम्पीयर की फोटो और 3 पाइप का यूज किया है। पानी एग्जास्ट के प्रेशर से वाष्पित होकर पाइप के माध्यम से रूम तक पहुंचता है। यह नेचुरल हवा हैल्थ के मदद्नजर बेहद फायदेमंद होती है। अगर आप बिजली का यूज नहीं करना चाहते तो इसमें सोलर पैनल का भी ऑप्शन है।

कोने में पड़े नहीं रहेंगे उज्जवला के खाली सिलेंडर

आमतौर पर देखने में यह आता है कि केंद्र सरकार ने उज्जवला योजना के तहत सिलेंंडर तो बांट दिए लेकिन हितग्राहियों के पास इसकी रिफिलिंग के लिए पैसे नहीं है। ऐसे में सिलेंडर घर के किसी कोने में या मचान पर रख दिए जाते हैं। गोरखपुर के मृत्युंजय कुमार मिश्रा और संतोष यादव ने ग्रामीण इलाकों में जाकर मुआयना किया और पाया कि सिलेंडर एक बार यूज करने के बाद बेकार पड़े हैं। उन्होंने इसके लिए सोचना शुरू किया और पेट्रोल को आधार बनाया। हजार रुपए खर्च कर मोटर, पेट्रोल और पानी की मदद से खाली सिलेंडर में चाय बना दी। इनका दावा है कि 1 लीटर पेट्रेाल में चूल्हा 60 घंटे चलेगा। इसी बीच एक महिला ने उनसे पूछ लिया कि जब बिजली की मोटर लगी है तो हम इलेक्ट्रानिक चूल्हा क्यों न खरीद लें। इस पर उन्होंने इस पर कम से कम बिजली खर्च का तर्क दिया।

फोकट म बिजली, फोकट म पानी, चला जांगर अऊ चला जिंदगानी

कबाड़ से जुगाड़ के मामले में छत्तीसगढ़ हमेशा आगे रहा है। शासकीय कन्या उच्चतर माध्य शाला मुंगेली 11वीं की छात्राएं दीपांजलि नामदेव और जूली सोनकर ने कबाड़ के जुगाड़ से एनर्जी तैयार की है। उन्होंने कबाड़ की दुकान से साइकिल का कुछ हिस्सा और खराब मोटर पाट्र्स खरीदे। इसके जरिए साइकिल से स्थितिज उर्जा, गतिज और विद्युत उर्जा उत्पन्न कर पंप से पानी खींचने का तरीका ईजाद किया। खासतौर पर बुजुर्ग व्यक्ति तालाब से पानी लाने के लिए साइकिल का यूज कर सकता है। इससे उसकी एक्सरसाइज भी होगी और साइकिल में लगी खराब मोटर से पानी की सप्लाई भी की जा सकेगी। इससे बेटरी भी चार्ज की जा सकती है।