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आदिवासी होकर भी आदिवासी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान...

Vasudev Yadav

Publish: Aug 09, 2019 13:41 PM | Updated: Aug 09, 2019 13:41 PM

Raigarh

Tribal Day : लेकिन शहर में एक कोरवा आदिवासी ऐसा परिवार है, जिसे किसी भी आदिवासी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। लाभ नहीं मिलने का कारण उक्त परिवार के पास जाति प्रमाण पत्र नहीं है।

रायगढ़. आदिवासियों के लिए वैसे तो शासन कई योजनाएं संचालित कर रही है, वहीं यह परिवार जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचता है तो उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय दौड़ाया जा रहा है।
यह परिवार पिछले कई दशकों से शहर के बैकुंठपुर मोहल्ले में निवास कर रहा है, लेकिन अब तक इनका जाति प्रमाण पत्र नहीं बन सका। इस परिवार के सूरज कोरवा ने बताया कि वह आर्थिक तंगी की वजह से ज्यादा नहीं पढ़ सका। वहीं जब वह पढ़ रहा था, तब भी उसे जाति प्रमाण पत्र के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। वहीं अब वह अपने बच्चों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए वह दो साल पहले एसडीएम कार्यालय में आवेदन किया था। बताया जा रहा है कि इस समय उसे एसडीएम कार्यालय के अधिकारियों ने यह कहा कि उसका जाति प्रमाण पत्र नहीं बन सका। वहीं यह कहा गया कि नगर निगम के परिषद बैठक में यदि उसे आदिवासी होने का प्रस्ताव पारित करते हैं तो उसका जाति प्रमाण पत्र बन सकेगा। ऐसे में वह नगर निगम कार्यालय पहुंचा और महापौर, नगर निगम आयुक्त, और सभापति के नाम से एक आवेदन दिया। इस आवेदन में उसके प्रस्ताव को शामिल करने की मांग की गई। इस बात को करीब डेढ साल हो गए, लेकिन नगर निगम के परिषद में उसके प्रस्ताव को शामिल नहीं किया। इसकी वजह से अब तक उस परिवार का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन सका है।

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बैगा कार्य से चलता है जीविकोपार्जन
सूरज कोरवा के दादा कार्तिक राम व अन्य पीढ़ी शुरू से ही मोहल्ले में बैगा का कार्य करते हैं। इस कार्य को सुरज के पिता ने भी किया और अब सूरज कोरवा भी कर रहा है। हालांकि इसमें ज्यादा आमदनी नहीं होती। इससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे सुरज और उसका भाई रोजी मजदूरी करते हैं।

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नौकरी से रहा वंचित
सूरज कोरवा ने बताया कि समय-समय पर सरकारी कार्यालय से निकलने वाली वेकेंसी में वह आवेदन जमा करता है, लेकिन इसमें वह जाति प्रमाण पत्र नहीं लगा पाता। इससे उसका आवेदन फार्म पहले स्क्रुटनी में ही बाहर हो जाता है। एक दो बार संबंधित विभाग के अधिकारियों ने जाति प्रमाण पत्र जमा करने की बात भी कही, लेकिन उसे पास जाति प्रमाण पत्र ही नहीं था। ऐसे में वह जमा नहीं कर पाया और नौकरी से भी वंचित हुआ।

वर्जन
इस तरह के दो आवेदन आए हैं, अब जब भी सामान्य सभा की बैठक होगी उस बैठक में इनके प्रस्ताव को शामिल किया जाएगा। यह आवेदन डेढ साल पहले नहीं बल्कि कुछ माह पहले ही आया है।
सलीम नियारिया, सभापति, नगर निगम

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