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रायबरेली में ईद-दुल-अजहा (बकरीद) पर्व पर अदा की गई नमाज़, देश की खुशियाली की मांगी दुआ

Madhav Singh

Publish: Aug 12, 2019 15:19 PM | Updated: Aug 12, 2019 15:19 PM

Raebareli

रायबरेली में ईद-दुल-अजहा (बकरीद) पर्व पर अदा की गई नमाज़, देश की खुशियाली की मांगी दुआ

ईद-उल-अजहा (बकरीद)पर्व पर बच्चो ने भी अदा की नमाज़

रायबरेली . जिले में आज बकरीद के पर्व पर सुबह से ही शहर और गांवों में चहल-पहल दिखाई देने लगी । लोग सुबह उठकर नमाज अदा करने की तैयारी में लगे थे साथ ही जिला प्रशासन ने भी इस त्योहार को अच्छी तरह से लोगों को मनाने के लिये अपना पुख्ता इन्तजाम कर रखे थे। जिलाधिकारी नेहा शर्मा और पुलिस अधिक्षक सुनील कुमार सिंह, एवं नगर पालिका अध्यक्ष पूर्णिमा श्रीवास्तव व जिले के अन्य अधिकारी भी अपनी डियूटी निभा रहे थे। जिलाधिकारी और एसपी ने सभी को इस त्योहार पर सभी से मुलाकात की। यह त्योहार इस्लाम धर्म का पवित्र त्योहार है,‘ईद-उल-अजहा जिसे दुनिया भर में धूमधाम से मनाया जाता है। भारत में इस त्योहार को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है। बकरा ईद में एक बकरे की कुर्बानी देकर मनाया जाने वाला यह त्यौहार हमेशा लोगों की चर्चा का विषय बन जाता है। लेकिन जिन लोगों को इस धर्म तथा इससे जुड़े बकरीद के त्यौहार का पूर्ण ज्ञान नहीं है, वे नहीं जानते कि क्यों बकरे की कुर्बानी देने का महत्व है।इस दिन कुछ लोग ऊंट की कुर्बानी भी देते हैं। इस दिन जानवर कि कुर्बानी देने के पीछे धार्मिक महत्त्व है जिसके चलते आज के दिन जानवरों की कुर्बानी दी जाती है।

रायबरेली में ईद-दुल-अजहा (बकरीद) पर्व पर अदा की गई नमाज़, देश की खुशियाली की मांगी दुआ

 

इब्राहीम अलैहे इस्लाम जो अल्लाह के पैगम्बर थे, जिन्हें सपने में अल्लाह का हुक्म आया कि ये इब्राहिम अपने बेटे इस्माइल को अल्लाह के राह में कुर्बान कर दो । यह इब्राहीम अलैहे इस्लाम के लिए एक इम्तिहान था, जिसमें एक तरफ थी अपने बेटे से मुहब्बत और एक तरफ था अल्लाह का हुक्म। लेकिन अल्लाह का हुक्म ठुकराना अपने धर्म की तौहीन करने के समान था, जो इब्राहीम अलैहे इस्लाम को कभी भी कुबूल ना था। इसलिए उन्होंने सिर्फ अल्लाह के हुक्म को पूरा करने का निर्णय माना और अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए और रेगिस्तान में पहुचे, बेटे को लिटा दिया। बेटे इस्माइल के जुबान से आवाज आई अब्बू जान मुझे पता है कि आप मुझे अल्लाह के राह में कुर्बान करने जा रहे हैं।आप मेरे आंखों में पट्टी बांध दीजिये और अपने आंखों में भी पट्टी बांध लीजिए, कही ऐसा ना हो कि मेरी गर्दन पर आप छुरा चलाये और आप मुझे देख कर अपना छुरा रोक दे और अल्लाह के हुक्म की फ़रमान झूठा हो जाये।इतना सुनना था कि इब्राहिम अलैहे इस्लाम की आंखे नम हो गई। लेकिन अल्लाह का हुक्म को मानते हुये इब्राहिम अलैहे इस्लाम बेटे की कुर्बानी देने के लिए आंखों पर पट्टी बांध कर हाथो में छुरा ले कर जैसे ही अपने बेटे इस्माइल पर छुरी चलाये कुर्बान करने लगे, वैसे ही फरिश्तों के सरदार जिब्रील अमीन ने आकर बच्चे की जगह मेमन रख दिया। जिससे बच्चे की जान बच गई। और यहीं से इस पर्व की शुरूआत हुई और लोगो द्वारा कुर्बानी बकरा गुम्बा आदि का देने लगे।