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रायबरेली में आईटीआई फैक्ट्री बंद होने से छिन गई हजारों लोंगों की रोजी-रोटी, सरकार से नहीं मिल रही कोई सहायता

Akansha Singh

Publish: Aug 12, 2019 07:50 AM | Updated: Aug 12, 2019 12:40 PM

Raebareli

रायबरेली में इंदिरा गांधी के समय (1973) आईटीआई फैक्ट्री रायबरेली और अमेठी के लोगों के लिए एक नया रोजगार का साधन की शुरुआत की गई थी। लेकिन धीरे धीरे आज आईटीआई की स्थिति इतनी बत्तर हो गई है

रायबरेली. रायबरेली में इंदिरा गांधी के समय (1973) आईटीआई फैक्ट्री रायबरेली और अमेठी के लोगों के लिए एक नया रोजगार का साधन की शुरुआत की गई थी। लेकिन धीरे धीरे आज आईटीआई की स्थिति इतनी बत्तर हो गई है कि वहां पर रोजगार जैसा शब्द कर्मचारियों के लिए बेमानी लगता है। आईटीआई के कर्मचारियों और यूनियन नेताओं का कहना है कांग्रेस कि सरकार जब तक रही थी तब तक इस फैक्ट्री को काफी अच्छा बजट मिलता रहा, लेकिन इसके बाद भी सोनिया गांधी आईटीआई कर्मचारियों के लिए बजट दिलाने की कोशिश करती रही लेकिन दूसरी सरकार आने के बाद आईटीआई को पूरी तरह से बंदी की कगार पर खड़ा कर दिया गया है। इसके कुछ समय पहले कर्मचारियों में वीआरएस को लेकर भी अफवाह बनी रही और सैकड़ों की संख्या में यहां के कर्मचारियों को वीआरएस थमा दिया गया। आज कुछ मात्र आईटीआई में काम करने वाले कर्मचारी बचे हैं साथ ही फैक्ट्री में इस समय कोई भी काम नहीं है। आईटीआई फैक्ट्री में न ही कोई बाहर से कच्चा काम आ रहा है जिससे यहां के कर्मचारी उसको पूरा करके अपनी रोजी रोटी को चला सके। कर्मचारियों का कहना है कि आने वाले समय में आईटीआई फैक्ट्री पूरी तरह से ठेके पर चलने जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

आईटीआई के श्रम यूनियन के कर्मचारियों और अन्य पार्टी के यूनियनों के लोगों ने भारत सरकार के इस उपक्रम को काफी सराहना की थी। देश में रायबरेली की आईटीआई एक समय में रोजगार का बड़ा अच्छा साधन हुआ करता था । लेकिन आज यहां के हालात बहुत ही बुरे हैं। आईटीआई गेट के सामने लगे आईटीआई बोर्ड तक का अता पता नहीं है। अंदर फैक्ट्री के सन्नाटा जैसा माहौल बना रहता है। कर्मचारियों ने भारत सरकार पर आरोप लगाया है की उन्होंने यहां पर रोजगार का साधन पूरी तरह से छीन लिया है। रायबरेली आईटीआई के फैक्ट्री के कर्मचारी बयान देते नजर आए। किसी ने कहा आने वाले समय में फैक्ट्री ठेके पद्धति पर होने जा रही है तो किसी ने फैक्ट्री को पूरी तरह से बंद करने की भी बात कह डाली। क्योंकि कर्मचारी एक उम्मीद लगाए थे कि कभी न कभी इस फैक्ट्री में काम आएगा और हम लोग उस दोबारा रोजगार मिल सकेगा। लेकिन अब लोगों का कहना है की निगमी करण होने जा रही है। इसलिये अब तो कर्मचारी पूरी तरह से नउम्मीद नजर आ रहे हैं। आने वाले समय में शायद ही आईटीआई फैक्ट्री का कुछ भला हो हो जाए।

श्रमिक संघ के यूनीयन के महांमत्री आशीष सिंह ने इस फैक्ट्री के लिये कहा कि हमारा संघ सरकार को फैक्ट्री को फिर से चलाने के लिये बात भी कर चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार का कोई आश्वासन नही मिला है। उधर कांग्रेस पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सरकार से इस आईटीआई फैक्ट्री को कुछ काम दिलाने की कोशिश करुगीं जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिल सके। आईटीआई कर्मचारियों में अपने अपने बयान देने वालों में नागेन्द्र तिवारी, मिश्री लाल धानुक, वीरेन्द्र कुमार पाठक, कान्ती देवी, शिवशंकर, शत्रुघन चौधरी, श्रीराम आदि लोगों ने बात बताई।