स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

मोती सिंह हुए नाकाम, स्वामी प्रसाद मौर्य ने अमर बहादुर मौर्य के परिवार को अंतिम संस्कार के लिये मनाया

Mohd Rafatuddin Faridi

Publish: Jun 27, 2019 12:33 PM | Updated: Jun 27, 2019 12:33 PM

Pratapgarh

  • यूपी में माचिस मांगने दबंगों ने अमर बहादुर मौर्य को पीट-पीटकर मार डाला था।
  • नाराज परिजनों ने अंतिम संस्कार से मना कर दिया था, जिद पर अड़ा था परिवार।
  • शासन प्रशासन के लोग समझाने में हुए नाकाम, मंत्री मोती सिंह को भी दो बार परिवार ने लौटाया।
  • कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य पहुंचे, समझाया तब जाकर अंतिम संस्कार को तैयार हुआ परिवार।

प्रतापगढ़. माचिस मांगने के विवाद में लाठी डंडे से पीटकर अमर बहादुर मौर्य की हत्या से नाराज परिजन आखिरकार 49 घंटे बाद तब माने जब योगी सरकार के उनकी ही बिरादरी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य पहुंचे और परिजनों को समझाया। इसके पहले बुधवार को मंत्री मोती सिंह ने भी दो बार वहां पहुंचकर परिजनों को समझाने की कोशिश की थी कि वो अंतिम संस्कार कर लें, लेकिन नाराज परिजनों ने उन्हें वापस लौटा दिया था। वह भी तब जबकि उन्होंने पीड़ित परिवार की ज्यादातर मांगें स्वीकार कर ली थी, जिसमें 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद, मुख्यमंत्री राहत कोश से मृतक की विधवा को आंगनबाड़ी में नौकरी, शस्त्र लाइसेंस, आवास और आवास के लिये पट्टा समेत मांगें शामिल थीं।

इसे भी पढ़ें

डीएम समझाते रहे काम का महत्व, बगल में बठे तहसीलदार खेलते रहे मोबाइल पर गेम

मंत्री मोती सिंह भी जब परिवार को समझाने में नाकाम रहे तो इसके बाद पीड़ित मौर्य परिवार को समझाने के लिये कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य आए। उन्होंने परिवार को अकेले में ले जाकर बात की और समझाया। उनसे बात करने के बाद एसपी से आरोपी की जल्द गिरफ्तारी करने को कहा। उन्होंन परिजनों की नौकरी आदि की मांगों को भी जल्द पूरा करने का भरोसा दिया।

इसे भी पढ़ें

डीआईजी को बैठक कवर कर रहे पत्रकार पर आया गुस्सा, मोबाइल छीनकर डिनलीट किया वीडियो

बताते चलें कि कादीपुर मीरासी के अमर बहादुर मौर्य को गांव के हीदबंग माता प्रसाद सिंह उर्फ राजा पर माचिस मांगने के विवाद में लाठी-डंडे से पीट-पीटकर मार डालने का आरोप है। हत्या से परिवार वाले इतने नाराज थे कि पोस्टमार्टम के बाद शव आने पर उन्होंने अंतिम संस्कार नहीं किया। शासन-प्रशासन के नुमाइंदों ने वहां पहुंचकर बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं माने। मोती सिंह की दो बार वहां जाकर समझाने की कवायद भी फेल रही। बाद में स्वामी प्रसाद मौर्य ने किसी तरह वहां पहुंचकर परिवार को समझाया। 49 घंटे बाद बुधवार की रात को जाकर परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिये ले जाने को राजी हुए।

By Sunil Somvanshi