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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने महाराष्‍ट्र, हरियाणा और झारखंड में चुनाव से पहले फोड़ा आरक्षण बम

Dhirendra Kumar Mishra

Publish: Aug 19, 2019 13:12 PM | Updated: Aug 19, 2019 14:12 PM

Political

  • RSS Chief Mohan Bhagwat ने फिर छेड़ा आरक्षण का राग
  • इसके पक्षधर और विरोधी सौहार्दपूर्ण माहौल में करें विचार
  • भाजपा को बिहार में करारी हार का सामना करना पड़ा था

नई दिल्‍ली। महाराष्‍ट्र, झारखंड और हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ( RSS Chief Mohan Bhagwat ) ने एक बार फिर आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके इस बयान से एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ सकता है।

इससे पहले 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भागवत ने आरक्षण के मुद्दे को उठाया था। विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को उठाने की वजह से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।

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आरक्षण पर सौहार्दपूर्ण तरीके से बातचीत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ( RSS Chief Mohan Bhagwat ) ने एक कार्यक्रम में कहा था कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं उन्हें इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए। संघ प्रमुख ने कहा कि उन्होंने आरक्षण ( Reservation ) पर पहले भी बात की थी लेकिन तब इस पर काफी बवाल मचा था। सियासी बवाल की वजह से आरक्षण का मुद्दा मूल उद्देश्‍य से भटक गया था।

भागवत ने कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं, उन्हें इसका विरोध करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए। वहीं जो इसके खिलाफ हैं उन्हें भी वैसा ही करना चाहिए।

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reservation

बिहार में भाजपा की हुई थी करारी हार

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने 2015 में संघ प्रमुख के बयान के जरिए बिहार में सियासी माहौल को पूरी तरह बदल दिया था। लालू यादव अपनी हर रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख ( RSS Chief Mohan Bhagwat ) पर सीधा निशाना साधते हुए कहते थे कि अगर किसी में हिम्मत है तो वह आरक्षण ( Reservation ) खत्म करके दिखाए।

लालू के इन बयानों से आरजेडी और जेडीयू गठबंधन ( RJD-JDU alliance ) को जबरदस्त फायदा मिला था। वहीं भाजपा का बिहार में बना बनाया सियासी माहौल बिगड़ गया और करारी हार का समाना करना पड़ा था।

सामान्‍य वर्ग के लिए 40.5 फीसदी आरक्षण

बता दें कि भारत में फिलहाल अनुसूचित जाति को 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति को 7.5 फीसदी, ओबीसी यानी पिछड़ी जातियों के लिए 27 फीसदी और गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण मिल रहा है। बाकी बची 40.5 फीसदी नौकरियां सामान्य जातियों के लिए हैं।