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तीन तलाक पर अमित शाह बोले- विरोध के पीछे तुष्टिकरण की राजनीति, कुप्रथा को हटाने में लग गए 56 साल

Prashant Kumar Jha

Publish: Aug 18, 2019 20:13 PM | Updated: Aug 19, 2019 09:04 AM

Political

  • दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में अमित शाह बोले
  • तीन तलाक के विरोध के पीछे सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति
  • 19 देशों में 16 देश इस्लामिक देशों में तीन तलाक को अपराध माना

     

     

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ( Amit Shah ) ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए कुछ दलों ने तीन तलाक का विरोध किया। तुष्टिकरण की राजनीति के चलते तीन तलाक इतने साल तक चलता रहा। तीन तलाक को हटाने की हिम्मत किसी में नहीं थी। लेकिन मोदी सरकार ने तुष्टिकरण की राजनीति खत्म करते हुए 56 साल बाद मुस्लिम महिलाओं को हक दिलाने में कामयाब हुई। इस ऐतिहासिक कदम के लिए पीएम मोदी का नाम देश के समाज सुधारकों में लिखा जाएगा।

अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक की कुप्रथा को हटाने पर इतना विरोध क्यों है? इसके पीछे तुष्टीकरण का भाव और तुष्टीकरण की राजनीति जिम्मेदार है। कांग्रेस को अब भी शर्म नहीं है और वह इस कुप्रथा का समर्थन करती है।

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तुष्टिकरण ही भारत के टूटने का कारण बनी

दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन की तरफ से आयोजित 'तीन तलाक का खात्मा: ऐतिहासिक गलती का सुधार' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा ट्रिपल तलाक पर कई बार मैने बोला है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पहले ही भारत को टूटने से बचाने के लिए तुष्टिकरण की शुरुआत हुई और वह तुष्टिकरण ही भारत के टूटने का कारण बनी। आजादी के बाद 60 के दशक में तुष्टीकरण से ही वोटबैंक की राजनीति होने लगी। इसकी आदत कुछ राजनीतिक दलोंको बन गई और इसी के चलते ऐसी कुप्रथाएं चलती रहीं।

शाह ने कहा कि ट्रिपल तलाक एक कुप्रथा थी। 16 घोषि‍त इस्लामी देशों ने अलग-अलग समय पर ट्रिपल तलाक को तलाक देने का काम किया है, लेकिन हमें 56 साल लग गए इसका मुख्य कारण राजनीतिक पार्टियों की तुष्ट‍िकरण की राजनीति थी। अगर यह इस्लाम के खिलाफ होता तो ये देश गैर इस्लामिक काम क्यों करते। साठ के दशक में कांग्रेस ने इसकी शुरुआत की बाद में दूसरे कुछ राजनीतिक दलों ने भी इसे आगे बढाया जिसे 2019 में नरेंद्र मोदी ने खत्म किया।

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कुप्रथा नहीं हटाते तो लोकतंत्र पर धब्बा होता

अमित शाह ने तीन तलाक को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। अमित शाह ने कहा कि अगर तीन तलाक की कुप्रथा को नहीं हटाते तो यह भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा धब्बा होता। शाह बानो ने तीन तलाक को कोर्ट में चुनौती दी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे असंवैधानिक और गैर इस्लामिक माना था। उस दौरान राजीव गांधी की बहुमत वाली सरकार थी और सरकार ने संसद में कानून बनाकर शीर्ष अदालत के फैसले को बदल दिया। लेकिन ये राजीव गांधी की नहीं नरेंद्र मोदी की सरकार थी और हमने मुस्लिम महिलाओं के हक में फैसला लिया।

कांग्रेस वोट बैंक संभालने के लिए विरोध कर रही

शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी वोट बैंक को संभालने के लिए विरोध कर रही है। उसे आज भी शर्म नहीं है। उनके नेता कह रहे हैं कि वो आज भी तीन तलाक के पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने एक भी फैसला मुस्लिम महिलाओं के हक में नहीं लिया। समाज के साथ यदि कोई रीति रिवाज कुप्रथा बन जाए तो उसे खत्म करना चाहिए। ना की उसे ढोना चाहिए। मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण का काम बीजेपी ने किया है। नरेंद्र मोदी जी ने परिवारवाद और तुष्टिकरण की नीति को खत्म किया है।

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विकास के लिए संवेदना की जरूरत

शाह ने मुस्लिम महिलाओं से गुजारिश की कि वोट जाति के आधार पर नहीं बल्कि देश के आगे ले जाने वाली पार्टी को दें। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं से कहा कि वो माफी मांगते हैं कि इस कुप्रथा की वजह से आपको तकलीफ हुई।शाह ने कहा कि सबके विकास के लिए तुष्टिकरण की नहीं बल्कि संवेदना की जरूरत होती है। गरीब गरीब होता, चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, ईसाई हो, पारसी हो या जैन हो।'