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यहां तीन किलोमीटर के दायरे में विराजमान हैं तीन प्रमुख देवियां, नवरात्रि में जरूर जाएं

Devendra Kashyap

Publish: Sep 27, 2019 15:43 PM | Updated: Sep 27, 2019 15:43 PM

Pilgrimage Trips

एक ऐसे जागृत शक्तिपीठ, जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी रहेगा

आज हम एक ऐसे जागृत शक्तिपीठ के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी रहेगा। यहां तीन किलोमीटर के दायरे में तीन प्रमुख देवियां विराजमान हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को देवी के 3 रूपों के दर्शन के सौभाग्य प्राप्त होता है।

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हम बात कर रहे हैं मां विंध्यवासिनी की। मां विंध्यवासिनी का दरबार उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर पर विंध्याचल पर्वत पर स्थित है। पुराणों में भी विंध्य को तपोभूमि के रूप में वर्णन किया गया है। विंध्याचल की देवी मां विंध्यवासिनी को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि जो मनुष्य इस स्थान पर तप करता है, उसे अवश्य सिद्धि प्राप्त होती है।


मान्यता है कि सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी इस क्षेत्र का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं हो सकता। मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहां देश के कोने-कोने से लोगों आते हैं और माता रानी के दर्शन करते हैं।


सबसे खास बात यह है कि यहां तीन किलोमीटर के दायरे में तीन प्रमुख देवियां विराजमान हैं। मान्यता है कि तीनों देवियों के दर्शन किए बिना विंध्याचल की यात्रा अधूरी मानी जाती है। तीनों देवियों के केन्द्र में मां विंध्यवासिनी हैं। कालीखोह पहाड़ी पर महाकाली और अष्टभुजा पहाड़ी पर अष्टभुजी देवी विराजमान हैं।


मां विंध्यवासिनी के इस धाम में त्रिकोण यात्रा का विशेष महत्व होता है, जिसमें लघु और वृहद त्रिकोण यात्रा की जाती है। लघु त्रिकोण यात्रा में एक मंदिर परिसर में माता के तीनों रूप के दर्शन होते हैं जबकि वृहद त्रिकोण यात्रा में मां के अलग-अलग तीन रूपों के दर्शन के सौभाग्य मिलता है, जिसमें मां विंध्यवासिनी, मां महाकाली और मां अष्टभुजी के दर्शन होते हैं।