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एक सच्चे सुर का सफर है 'इंडिया म्यूजिक समिट' - प्रसून जोशी

Anurag Trivedi

Publish: Sep 17, 2019 12:55 PM | Updated: Sep 17, 2019 12:55 PM

Patrika plus

- समिट के मेंटोर, कवि, गीतकार प्रसून जोशी ने पत्रिका प्लस से शेयर किए अनुभव, 4 अक्टूबर से होटल फेयरमॉन्ट में आयोजित होगा तीन दिवसीय समिट, इवेंट का पेट्रर्न है राजस्थान पत्रिका

जयपुर. देशभर के संगीतकारों को एक मंच पर लाने वाले एमटीवी इंडिया म्यूजिक समिट की शुरुआत 4 अक्टूबर से होगी। कूकस स्थित होटल फेयरमॉन्ट में होने वाले इस समिट में 120 से ज्यादा संगीत के दिग्गज म्यूजिक लवर्स से रूबरू होंगे, जहां वे अपने अनुभवों के साथ म्यूजिक प्रस्तुतियां देंगे। समिट का पेट्रर्न राजस्थान पत्रिका है। राजस्थान पत्रिका हमेशा आर्ट एंड कल्चर के प्रोत्साहन के लिए आगे रहता है। समिट की तैयारियों और अब तक के सफर पर राजस्थान पत्रिका ने समिट के मेंटोर और देश के दिग्गज कवि व गीतकार प्रसून जोशी से बातचीत की।

समिट की शुरुआत के पीछे के मकसद पर आप क्या कहेंगे?
प्रसून: इंडिया म्यूजिक समिट की शुरुआत पर मैंने एक लाइन लिखी थी 'एक सच्चा सुर'। यह 'सच्चा सुर' सिर्फ शब्दों की बात नहीं है, वो हमारी एक भावना है। यदि आप 'एक सच्चे सुर' की अहमियत संगीतप्रेमियों, संगीतसाधकों से पूछेंगे तो पाएंगे कि उनके लिए इसकी अहमियत बहुत बड़ी है। उसी 'एक सच्चे सुर' की तलाश और सफर में एक संगीतप्रेमी, संगीतसाधक निकल पड़ता है। गुणीजनों से हमने तो सिर्फ सुना है कि जिस दिन वो सच्चा सुर उसे मिल जाता है तो वो संगीतसाधक इस स्थिति में ही नहीं रह जाता है कि वो किसी को बता भी सके कि उसे 'सच्चा सुर' मिल गया है। यानी जिससे भी आप मिलोगो वो खोजी ही होगा क्योंकि जो पा चुका है वो तो बताने कि स्थिति में ही नहीं है। यह समिट भी संगीतप्रेमियों का इस तरह का अनुभव देने के लिए डिजाइन की गई है।

इस बार संगीतप्रेमियों को कोई परिवर्तन देखने को मिलेगा?
प्रसून: समिट के पिछले दो साल के शानदार के अनुभवों के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई है। म्यूजिक समिट के मोटो 'एक सच्चा सुर' में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। संगीतप्रेमियों के मध्य यह आयोजन इतना प्रसिद्ध हो गया है कि वर्तमान में 'इंडिया म्यूजिक समिट' को परिचय की आवश्यकता नहीं है।

समिट के आकर्षण के बारे में बताइए?

प्रसून: इस साल म्यूजिक समिट में प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के जीवन-यात्रा पर मेरी चर्चा होगी। यह मेरे लिए खुशी और सम्मान का विषय है, क्योंकि आशाजी के गीत बचपन से सुनते हुए हम बड़े हुए हैं और यह मेरा सौभाग्य है कि मेरे कुछ गीत उन्होंने गाए हैं।

किन कलाकारों की सहमति मिल गई है?
प्रसून: संगीतप्रेमियों को सुबह के प्रात:कालीन राग और देर रात को गाए जाने वाले राग एक ही जगह पर सुनने को मिलेंगे। मुझे वाकई में इस म्यूजिक इवेंट का इंतजार रहता है। इसमें आशा जी के अलावा संतूरवाइक शिवकुमार शर्मा हैं। इनके अलावा वेंकटेश कुमार, सुजात खान, उदय भवालकर, विक्कू विनायकरम, सुनिधि चौहान, राजन-साजन मिश्रा, राशिद खान, अरुणा साईराम, राहुल शर्मा, असलम साबरी, तौफीक कुरैशी, राधिका चौपड़ा, सुनंदा शर्मा, प्रभदीप, शशांक सुब्रमण्यम, अजय प्रसन्ना, पूरबयान चटर्जी जैसे कलाकारों की तरफ से सहमति मिल चुकी है। देशभर से १२० से ज्यादा दिग्गज संगीत विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। शिलांग चैम्बर कोयर रविवार को होने वाली ग्रैंड फिनाले परफॉर्मेंस भी खास होने वाली है।

इन दिनों आप किस तरह का संगीत सुन रहे हैं?
प्रसून: मुझे लगता है कि संगीत मेरे लिए सिर्फ कोई नया गाना, नया गीत या नया राग सुनना नहीं है, यह मेरे जीवन का एक हिस्सा है। पिछले कुछ सालों में मैंने कोशिश की है कि मैं सुबह जल्दी उठुं। इसका एक कारण यह है कि मुझे लगता था कि सुबह की जो खूबसूरती होती है, प्रात:कालीन सभा में चिडिय़ों की जो गुफ्तुगू होती है, वो एक महफिल होती है, शायद मैं उससे वंचित हो गया हूं। वहीं, एक कारण यह भी था कि मैं सुबह के जो राग हैं, वो नहीं सुन पा रहा हूं। इसी लिए शायद इन प्रात:कालीन रागों को मैंने रिडिस्कवर किया है।

म्यूजिक लवर्स इन तीनों दिनों को कैसे प्लान करें?

प्रसून: तीन दिवसीय संगीत के इस शिखर सम्मेलन में सूफी, गजल, शास्त्रीय संगीत, बॉलीवुड संगीत सहित विभिन्न शैलियों के 120 से अधिक प्रख्यात संगीतकार एक मंच पर जुटेंगे और संगीतमय प्रस्तुतियों, संवाद, मास्टरक्लास, जैम सेशन आदि में शामिल होंगे।

गौरतलब है कि अपर्णा जोशी, अम्बिका श्रीवास्तव एवं माला शेखरी की अवधारणा पर आधारित यह समिट म्यूजिकॉन्सेप्ट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आयोजित किया जा रहा है।