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पिता जावेद जाफरी चाहते थे कि मैं एक्टर ना बनूं, क्योंकि बॉलीवुड में जलने वाले ज्यादा है - मीजान जाफरी

Anurag Trivedi

Publish: Jul 07, 2019 17:51 PM | Updated: Jul 07, 2019 17:51 PM

Patrika plus

फिल्म 'मलाल' के एक्टर मीजान जाफरी और शार्मिन सेगल ने शेयर किए अनुभव

 

जयपुर. 'दादा जगदीप की बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान रही है, वहीं पिता जावेद जाफरी बतौर डांसर आए थे। अब हमारे परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में लीड हीरो के रूप में आ रहा हूं। इस बात को मैं झूठ नहीं मानूंगा कि मैं आज जो भी हूं, दादा और पिता की वजह से ही हूं। इन दोनों के कॅरियर से मैंने बहुत कुछ सीखा। दोनों के कॅरियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, जो गलतियां उन्होंने की थी, वो आज मैं नहीं करूंगा। कॅरियर कैसे आगे बढ़ाना है, यह मैं आज इस एक्सपीरियंस से ही जानता हूं।' यह कहना है, एक्टर मीजान जाफरी का। अपनी फिल्म 'मलाल' के प्रमोशन के लिए जयपुर आए मीजान के साथ एक्ट्रेस शार्मिन सेगल भी मौजूद थीं। दोनों कलाकार झालाना स्थित राजस्थान पत्रिका कार्यालय पहुंचे और अपने अनुभव शेयर किए।
मीजान ने बताया कि पिता नहीं चाहते थे कि मैं फिल्मों में नहीं आउं। यह डेस्टिनी का ही रोल रहा है। पैरेंट्स ने कभी प्लान नहीं किया था, इसलिए मैंने बिजनेस की पढ़ाई भी शुरू कर दी थी। पिता ने अपने कॅरियर के ३५ साल में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। डिफिकल्ट चीजें देखी है, ऐसे में वे नहीं चाहते थे कि मैं कोई बुरा वक्त देखूं। पिता का डांस वीडियो 'रॉक एंड रॉल' काफी पॉपुलर हो गया था और इसके बाद लोगों ने यह अफवाह फैला दी थी कि जावेद जाफरी अब कभी डांस नहीं कर पाएंगे। इंडस्ट्री में कई ऐसे लोग होते हैं, जो आपको देखकर जलते हैं। पापा आज भी डांस करते हैं, हालही में उन्होंने पहली बार मेरे साथ डांस किया। यह उन अफवाहों को करारा जवाब था। लेकिन उस दौर में पापा को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

जिस कॉलेज में शूट था, पापा वहां लड्डू बांट रहे थे
उन्होंने बताया कि बिजनेस की पढ़ाई के बीच थोड़ा बोर होने लग गया था और घर आकर मैंने पापा से कहा कि यह मेरा फील्ड नहीं है। मैं फिल्म इंडस्ट्री में ही कुछ कर सकता हूं और क्योंकि अब तक यही देखता आया हूं। पापा ने तब कहा कि 'एक्टिंग मत करना, बाकि डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी या एडिटिंग सीख लो।' मैंने फिल्म स्कूल जॉइन कर लिया और एक साल के भीतर ही संजय लीला भंसाली से 'बाजीराव मस्तानी' के सेट पर मुलाकात हुई। संजय सर ने मुलाकात पर कहा कि 'तुम एक स्टार हो और तुम्हें एक्टिंग करनी चाहिए। फिर उन्होंने मुझे फिल्म में लॉन्च करने की बात कही।' यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। कार में बैठने के बाद मैंने मां को फोन किया और संजय सर की बात बताई। पापा शूट पर थे और जब वे रात को आए तो खाने की टेबल पर मैंने यह बात बताई। पापा को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन थोड़ी देर बार वे उठकर आए और मुझे गले लगा लिया। यह मेरे लिए बहुत प्राउड वाला समय था। जब शूट शुरू हुआ और जिस कॉलेज में शूटिंग चल रही थी, उस वक्त पापा पूरे कॉलेज में स्टूडेंट्स और टीचर्स को मिठाईयां खिला रहे थे।

94 किलो वजन था, एक्टिंग से सारा डिप्रेशन खत्म किया
शार्मिन सेगल ने बताया कि सबसे पहले मैंने कॅरियर रूप में मेडिकल फील्ड चुना था। उस वक्त मेरा वजन 94 किलो था और साथी स्टूडेंट्स इसके लिए जमकर मजाक बनाते थे। कॉलेज में एक रिक्वायरमेंट पर मैंने थिएटर जॉइन किया, स्टेज पर गई तो ऑडियंस हंस रहे थे, इस बार वे मेरे मोटापे पर नहीं मेरे किरदार पर हंस रहे हैं। फिर लगा कि एक्टिंग में तो यह फिलिंग भी आ सकती है और एक शरीर में कई किरदार जीए जा सकते हैं, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। मेरा सारा डिप्रेशन खत्म हो गया। मां के पास गई और पता लगा कि एक्ट्रेस बनने के लिए मोटापा कम करना होगा। वेट कम होने के बाद मेरा कॉन्फिडेंस लेवल भी बढ़ गया। एक्टर बनने से पहले 'मेरीकॉम' और 'बाजीराव मस्तानी' फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया।

संजय सर सीख देते रहे
उन्होंने कहा कि कैमरे के पीछे और आगे बहुत अंतर है। 'बाजीराव...' की शूटिंग के वक्त जयपुर के रायसर में १२०० लोग साथ काम कर रहे थे, जो मेहनत मैंने की वो रणवीर सिंह के चेहरे पर खत्म होती थी। इन सभी की मेहनत मेरे कंधों पर थीं, मैं उसका हिस्सा थी और उससे काफी कुछ सीखने को मिला। 'बाजीराव मस्तानी' के सेट पर संजय लीला भंसाली को काम करते हुए देखा, तब मुझे उनकी असली वैल्यू समझ में आई। वे एक सीन को लेकर जितनी मेहनत करते थे, इससे मुझे प्रेरणा मिलती थी। इससे पहले मैं उन्हें मामा या मामू कहकर बुलाती थी, लेकिन शूटिंग एक्सपीरियंस के बाद वो मेरे संजय सर हो गए।