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कॉलेज तक जिसने जींस नहीं पहनी, आज वो ब्यूटी पैजेंट की फाइनलिस्ट

Anurag Trivedi

Publish: Jul 07, 2019 17:24 PM | Updated: Jul 07, 2019 17:24 PM

Patrika plus

मिस राजस्थान की टॉप 28 फाइनलिस्ट की घोषणा, कई गल्र्स को इस स्टेज तक पहुंचने के लिए करना पड़ा स्ट्रगल, परिवार की सहमति के साथ बढ़ीं आगे

जयपुर. ब्यूटी पैजेंट मिस राजस्थान 2019 की फाइनलिस्ट की घोषणा गुरुवार को हुई। इस पैजेंट में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से भी गल्र्स ने हिस्सा लिया है और फाइनलिस्ट बनीं है। यहां तक पहुंचने से पहले कुछ गल्र्स ने संघर्ष भी किया है, साथ ही कई एेसी गल्र्स भी हैं, जिन्होंने कॉलेज टाइम तक जींस तक नहीं पहनी थी। सामाजिक बंदिशों को तोड़कर आज ये गल्र्स न केवल मॉडलिंग से अपनी पहचान बना रही है, बल्कि ब्यूटी पैजेंट का खिताब जीतने के लिए दमदार टक्कर दे रही हैं। पत्रिका प्लस ऐसी ही कुछ गल्र्स की कहानियों को साझा कर रहा है, जिन्होंने कड़े मुकाबले में खुद को सबसे आगे खड़ा किया है।

कॉलेज तक जींस नहीं पहनी

नागौर जिले के डीडवाना क्षेत्र के खारिया गांव निवासी शाहीन खान ने बताया कि हमारे यहां जींस या मॉडर्न डे्रस कैरी नहीं होती है। १२वीं की पढ़ाई डीडवाना में की है और तब तक मैंने जींस नहीं पहनी। जब पहली बार कॉलेज के लिए जयपुर आई तो यहां जींस पहनना शुरू किया। कॉलेज में मिस फ्रेशर के वक्त कैटवॉक की और स्टूडेंट्स व टीचर्स से सराहना मिली। इसके बाद इंस्टाग्राम पर अलिशा रावत को फॉलो किया, ये मॉडलिंग ट्रेनर है और इनसे वहां काफी कुछ सीखने को मिला। पिछले साल भी मैंने मिस राजस्थान के लिए ट्राइ किया था, लेकिन तब नहीं हुआ, इस बार फाइनलिस्ट बनकर खुशी हो रही है। पिता सिंकदर खान बीएसएफ में है और उन्होंने मुझे का कि कभी गलत रास्ते पर मत चलना, आगे सब अच्छा ही होगा।

इंडिपेंडेड होकर पैजेंट की तरफ किया रुख

टोंक के वनस्थली की खुशबू वर्मा ने बताया कि जब मैं छह साल की थी तब मेरे पिता की डेथ हो गई थी, मां मेरे नाना के यहां चली गई। मेरी परवरिश दादी और चाचा-चाची ने की। वनस्थली यूनिवर्सिटी से मैंने मास्टर्स किया है और तब मैंने कभी जींस नहीं पहनी। कॉलेज मंे भी खादी का सूट पहना करती थी, घर में भी मॉडर्न ड्रेसेज पर पाबंदी थी। जयपुर में जॉब लगने बाद मैं यहीं रहने लगी, यहां से मैंने अपनी गू्रमिंग पर ध्यान दिया और सैलेरी से मेकओवर व पर्सनैलिटी डवलपमेंट पर काम किया। मैंने मिस जयपुर के लिए भी हिस्सा लिया था और वहां फस्र्ट रनरअप आई थी। इसके बाद फोटो न्यूजपेपर में पब्लिश हुई थी और हॉर्डिंग्स पर फोटोज लगी थी। इस तरह की पॉजिटिव चीजों को देखकर मैंने पैरेंट्स को समझाया और फिर परिवार की सहमति के बाद मिस राजस्थान का हिस्सा बन गई।

पैरेंट्स की खुशी में ही मेरी खुशी

सीकर के जेरठी गांव की श्रुति काजला ने बताया कि बचपन से ही एक्टिंग और मॉडलिंग की तरफ रुझान था। पिता महेन्द्र सिंह और मां कमला दोनों गवर्नमेंट टीचर्स है और दोनों ने ही मेरा सपोर्ट किया। पैरेंट्स की तरफ से कभी पहनावे पर रोक-टोक नहीं थी, लेकिन ग्रामीण परिवेश में मॉडर्न ड्रेस कभी पहनी नहीं। वहां सिर्फ पढ़ाई की तरफ ध्यान देने के लिए ही कहा जाता था। मोदी यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रही हूं और वहां पहली बार मिस फ्रेशर के लिए पार्टिसिपेट किया था। यहीं से हौसला बुलंद हो गया। आज मुझे फाइनलिस्ट बनते हुए देख पैरेंट्स सबसे ज्यादा खुश है और उनकी खुशी में ही मेरी खुशी है।

प्राइवेट जॉब में रहते हुए पिता ने हमें आगे बढ़ाया

जयपुर की ज्योति गुर्जर ने बताया कि मेरा जन्म जयपुर में हुआ है, लेकिन पिता बाबुलाल गुर्जर अलवर से ताल्लुक रखते हैं। मेरे ताऊजी आज भी गांव में ही रहते हैं और उनकी दो बेटियों की शादी गांव में ही हुई है, वे दोनों आज खेती करती है। पापा ने प्राइवेट जॉब में रहते हुए हमारी पढ़ाई से लेकर परवरिश में कोई कमी नहीं रखी। उनके संघर्ष को देखकर मुझे मोटिवेशन मिला। पैरेंट्स को जब मैंने मॉडलिंग की बात बताई तो वे थोड़े नाराज हुए, लेकिन थोड़ा समझाने के बाद उनका साथ मिल गया। कॉलेज में मुझे मिस फेयरवेल, मिस फ्रेशर और मिस डांडिया का भी टाइटल मिल चुका है।