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जयपुर की अर्पिता यादव की इमोशनल कहानी सुन अमिताभ बच्चन ने कहा झुकना होगा दुनिया तुमको, विश्वास में अपने खड़े रहो...अड़े रहो...

Anurag Trivedi

Publish: Sep 03, 2019 19:31 PM | Updated: Sep 03, 2019 19:31 PM

Patrika plus

"कौन बनेगा करोड़पति" के मंच पर नजर आईं शहर की अर्पिता यादव, जयपुर में स्पेशल बच्चों के लिए "लर्निंग एस्पिरेशन" स्कूल चलाती हैं, सिंगल पैरेंट बनकर अपने बच्चे के लिए लड़ी लड़ाई

जयपुर. टीवी रियटिली शो में सबसे अहम माने जाने वाले "कौन बनेगा करोड़पति" की हॉट सीट पर बैठकर जयपुर की अर्पिता यादव ने अपने बेटे और खुद के स्ट्रगल की इमोशनल जर्नी को शेयर किया। अर्पिता के बेटे निर्भय के जन्म के समय डॉक्टर ने कहा था कि यह बच्चा २० साल से ज्यादा जीवित नहीं रहेगा और इतने भी दिन भी गंभीर बिमारी से पीडि़त रहेगा। एेसे में एक मां ने अपने बच्चे के लिए परिवार और समाज से लड़ाई लड़ी और स्पेशल केयर व डॉक्टर्स की डाइट और ईलाज के दम पर बेटे को डेंजर जोन से बाहर निकाल दिया। अर्पिता ने दिव्यांग बच्चों के शिक्षक की ट्रेनिंग ली और अपने बेटे की जिम्मेदारी एक प्रशिक्षित शिक्षक के तौर पर उठाई। इस इमोशनल जर्नी को सुनकर केबीसी के होस्ट और दिग्गज एक्टर अमिताभ बच्चन ने कहा कि 'संतान की बेहतरी के लिए अगर एक मां जिद पर अड़ जाती है, इंसान ही नहीं भगवान से भी लड़ जाती है। इस विषय को लेकर भी एक अभियान शुरू होना चाहिए, मकसद सच्‍चाई है तो सीना ठोक के यही कहो..."झुकना होगा दुनिया तुमको, विश्‍वास में अपने खड़े रहो...अड़े रहो..."

प्राइज मनी जीतने नहीं अपनी बात कहने गई थी

पत्रिका प्लस से बात करते हुए अर्पिता यादव ने कहा कि 'केबीसी का मंच बहुत बड़ा है और मैं यहां प्राइज मनी जीतने नहीं, बल्कि अपनी बात कहने आई थी। विकलांगता को लेकर आज भी समाज में दौहरा मापदंड है, लोग सिम्पेथी तो देते है, लेकिन इसे अपनाने से हिचकिचाते हैं। जब इस मैसेज को अमिताभ बच्चन बोलेंगे तो लोग उनकी बात जरूर सुनेंगे। इसी बात को कहने और इस अभियान से अमिताभ को जोडऩे गई थी। सेट पर मेरी कहानी सुनकर बिगबी भी भावुक हो गए थे और उन्होंने मेरा साथ देने का वादा भी किया है। जल्द ही वे इस विषय पर कुछ करने भी वाले हैं।

बेटे के खातिर सब छोड़ दिया
उन्होंने कहा कि मेरे सबसे पहले बेटी हुई थी, लेकिन उसकी भी तीन महीने बाद मृत्यू हो गई थी। इसके बाद बेटे का जन्म हुआ और उसके साथ जन्म से गंभीर बीमारी जुड़ गई। जन्म के समय जब बेटे को देखा तो मैंं निराश हो गई। भगवान से दोष देने लगी कि ऐसा मेरे साथ क्यों हुआ? मन में निराशा का भाव ऐसा जागा कि अपने साथ परिवार और समाज से भी नाराज हो गईं। बेटे के लिए मैंने किसी की नहीं सुनी, सिर्फ उसके ईलाज पर ध्यान देने लगी। एेसे में पति ने बेटा या खुद को चुनने की शर्त रख दी। एेसे में मैंने बेटे की खातिर सब को छोड़ दिया।

स्पेशल एजुकेशन की पढ़ाई
अर्पिता ने बताया कि बेटे के लिए दिल्ली में स्पेशल एजुकेशन की पढ़ाई की और फिर वहां "आदि" एनजीओ में जॉब करने लगी। स्पेशल बच्चों को शिक्षित-प्रशिक्षित करने के साथ डॉक्टर की सलाह पर बेटे निर्भय की डाइटिंग पर ध्यान दिया। इसके बाद जयपुर में दिशा संस्थान से जुड़ गई और बेटे के साथ यहां शिफ्ट हो गई। इसके बाद स्पेशल बच्चों के लिए खुद का स्कूल शुरू हुआ और अभी ४० बच्चे यहां शिक्षा ले रहे हैं। शो में मेरे साथ मां कमलेश यादव भी शामिल हुईं।