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अब तो किताबें भी इन्हें पढऩा चाहती हैं

Jaya Sharma

Publish: Jul 17, 2019 20:32 PM | Updated: Jul 17, 2019 20:32 PM

Patrika plus

1981 में रिटायर हुए, तबसे रोज डॉक्टर्स को पढ़ाते डॉ. पीसी डांडिया, 93 की एज में डेली स्वीमिंग भी
लाइफ मंत्रा— बड़ी उम्र नहीं, अरमान होते हैं

जयपुर. 70 की उम्र में लोग खुद को बुजुर्ग मान लेते हैं लेकिन एमएमएस मेडिकल कॉलेज के डिस्टिंगुइशड एमेरिटस प्रो. डॉ. पी.सी.डांडिया ने 93 की उम्र में भी एक्टिव हैं। 1926 में जन्मे डॉ. डांडिया 71 साल से मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर्स को पढ़ा रहे हैं। 1981 में रिटायर हुए पर अब भी रोज तीन घंटे मेडिकल कॉलेज जाते हैं। वे काफी एक्टिव हैं। सुबह मॉर्निंग वॉक और शाम को आधा घंटा स्वीमिंग करते हैं। डॉ. डांडिया की अब तक 16 बुक्स और 240 रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। इन दिनों वे अपनी तीसरी बायोग्राफी लिखने में भी बिजी हैं जो 2020 में प्रकाशित होगी। इससे पहले 2000 और 2012 में इनकी ऑटोबायोग्राफी आ चुकी है। रिटायर होने के बाद यूनिवर्सिटीज में पढ़ाने वाले सीनियर प्रोफेसर्स को सम्मान में एमेरिटस की उपाधि दी जाती है। उससे सीनियर होने पर डिस्टिंगुइशड एमेरिटस प्रोफेसर का सम्मान मिलता है। इसके ऊपर कोई सम्मान नहीं होता है।

डॉ. डांडिया कहते हैं कि उनपर बीएचयू फाउंडर पं. मदन मोहन मालवीय और तत्कालीन वीसी एस. राधाकृष्णन का असर पड़ा। राधाकृष्णन कुर्सी मेज की बजाय पलंग पर बैठकर काम करते थे। वे कहते थे- ऊंचा काम करोगे तो ऊंचा मान मिलेगा, हक मांगना नहीं पड़ेगा।
राजपुताना स्टेट कोटे से 16 की उम्र में पहुंचे बीएचयू
डॉ. डांडिया महाराजा कॉलेज से हाई-स्कूल और इंटर करने के बाद १६ वर्ष की उम्र में राजपुताना स्टेट कोटे से फार्मा की पढ़ाई के लिए बीएचयू (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी) गए। नया सब्जेक्ट होने के कारण इन्होंने इसको कॅरियर का क्षेत्र बनाया। उस समय पूरे राजपुताना स्टेट से बीएचयू में कुल 7 स्टूडेंट्स थे। तब राजस्थान राज्य
नहीं बना था।

डॉ. डांडिया कहते हैं कि विद्या बांटने के लिए है, जितना खर्च करेंगे उतना ही सम्मान मिलेगा। स्टूडेंट्स से हर बात शेयर करें। वे असली धरोहर हैं। काम करने की कोई उम्र नहीं, बड़ा लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। उम्र कभी बाधा नहीं बनती।