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राष्ट्रपति के स्वागत में राजगीर की दरोदीवारों पर उकेरी गई बिहार की लोककलाएं

Navneet Sharma

Publish: Oct 25, 2019 17:53 PM | Updated: Oct 25, 2019 17:53 PM

Patna

विश्वशांति स्तूप के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान बिहार की लोककलाओं को जबर्दस्त तरीके से दरोदीवार पर उकेरा गया। कला संस्कृति विभाग ने उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान के जरिए बिहार की लोककलाओं के चित्रों से दीवारों को सजाया।

राजगीर. राजगीर के अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विश्वशांति स्तूप के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान बिहार की लोककलाओं को जबर्दस्त तरीके से दरोदीवार पर उकेरा गया। कला संस्कृति विभाग ने उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान के जरिए बिहार की लोककलाओं के चित्रों से दीवारों को सजाया।
भगवान बुद्ध ,भगवान महावीर समेत राजगीर की थातियों और मगध के ऐतिही धरोहरों को केंद्र में रखकर बिहार की पारंपरिक लोककलाओं के माध्यम से राजगीर के 35हजार वर्गफुट में कलाकृतियों का निर्माण किया जा रहा है।फिलहाल 75हजार वर्गफुट में चित्र सजाए गये। शेष काम छठ बाद होंगे। एक कलाकार को सौ वर्गफुट में चित्र बनाना है। इस कार्य में कुल 175कलाकार लगाए गये हैं। इन्हें प्रतिवर्गफुट 250रुपये मानदेय दिए जा रहे हैं।
संस्थान के निदेशक ने बताया कि चित्रों में मिथिला पेंटिंग, टिकुली आर्ट,मंजूषा और भोजपुरी कलाकृतियों को बनाया जा रहा है। उद्घाटन और शांति स्तूप की पूजार्चना के बाद राष्ट्रपति ने कहा,शांति के बगैर बेहतर जीवन की कल्पना असंभव है। भगवान बुद्ध हमें विश्वशांति के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बुद्ध के विचारों और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाले।उन्होंने बुद्ध के विचारों के व्यक्तिगत स्तरों पर पडऩे वाले प्रभावों के साथ सामाजिक साझेदारी की बात भी कही।
राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों में बुद्ध की अहिंसा का उपदेश झलकता है। उन्होंने कहा कि बिहार का राज्यपाल रहते मैं भी विश्वशांति स्तूप के वार्षिकोत्सव में शामिल होता रहा हूं। उन्होंने एशिया यूरोप के डेलीगेट्स को विश्वशांति का दूत बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि जापानी धर्मगुरु फुजि गुरु जी और गांधी ने विश्वशांति की राह चलने की प्रेरणा दी।

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