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हरियाणा के 65 हजार मतदाताओं को नहीं भाया कोई प्रत्याशी, .52 फीसदी ने दबाया नोटा का बटन

Navneet Sharma

Publish: Oct 25, 2019 18:14 PM | Updated: Oct 25, 2019 18:14 PM

Patna

65 हजार से अधिक मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को खारिज करते हुए नॅन ऑफ दी अबोव (नोटा) को चुना। रिव्यू किया जाए तो इस बार नोटा के खाते में जाने वाली वोटों में 0.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

चंडीगढ़. हरियाणा में जहां एक करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है वहीं प्रदेश के नब्बे विधानसभा क्षेत्रों में 65 हजार से अधिक मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को खारिज करते हुए नॅन ऑफ दी अबोव (नोटा) को चुना। विधानसभा चुनाव परिणाम का अगर रिव्यू किया जाए तो इस बार नोटा के खाते में जाने वाली वोटों में 0.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
चुनाव आयोग ने सबसे पहले वर्ष 2014 में इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन में नोटा की सुविधा प्रदान की थी। इस मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को एक ऐसा विकल्प प्रदान करना है जिसके तहत वह भले ही किसी प्रत्याशी को अपने प्रतिनिधि के रूप में न चुनें लेकिन मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए मतदान केंद्र तक जरूर जाएं। इसी साल मई माह के दौरान हुए लोकसभा चुनाव के दौरान 53.7 लाख के करीब मतदाताओं ने वोट नहीं डाली।
इसके उलट हरियाणा में कुल 41 हजार 781 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। इससे पहले वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले हरियाणा के करीब एक करोड़ 15 लाख मतदाताओं में से 34 हजार 225 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। आंकड़ों से साफ पता चलता है कि वर्ष 2014 में केवल 0.30 प्रतिशत मतदाता ही प्रत्याशियों को खारिज करने के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचे। जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में 45.9 लाख से अधिक मतदाता ऐसे थे जिन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया।
हरियाणा में वर्ष 2014 के दौरान विधानसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में सबसे अधिक 53 हजार 613 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। 14वीं विधानसभा में नोटा के खाते में करीब 65 हजार 573 वोट गए। जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब साढ़े 11 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष नोटा के बटन को 0.52 प्रतिशत मतदाताओं ने दबाया, यानि इन मतदाताओं को 1169 उम्मीदवारों में से किसी भी उम्मीदवारी पंसद नहीं आई। चुनाव आयोग से मिली जानकारी के अनुसार फरीदाबाद जिले में कुल 69 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे जहां 9135 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के गढ़ हिसार में भी नोटा को लेकर मतदाताओं ने अच्छी खासी दिलचस्पी दिखाई। यहां पर सात विस सीटों पर 118 उम्मीदवार अपना भाग्य अजमा रहे थे और 4678 मतदाताओं की नोटा पहली पसंद रहा। नोटा के पक्ष में सीएम सिटी करनाल के मतदाता भी पीछे नहीं रहे।
करनाल जिले में 59 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे और यहां पर 4784 मतदाताओं ने नोटा के पक्ष में वोट किए। नोटा के पक्ष में सबसे कम चरखी-दादरी जिले से गए, यहां से केवल 994 वोट ही पड़े जबकि पंचकूला से नोटा के खाते में 1932 वोट गए। हरियाणा में बडख़ल विधानसभा क्षेत्र ऐसे है जहां सबसे ज्यादा 2274 वोट नोट के पक्ष में पड़े। इसी तरह फरीदाबाद से 1754, तिगांव से 1569 और बादशाहपुर से 1654 मत नोटा के पक्ष में पड़े।

जिला का नाम नोटा
चरखी-दादरी 0994
पंचकूला 1932
अंबाला 3585
यमुनानगर 3833
कुरुक्षेत्र 3114
कैथल 2338
पानीपत 3575
सोनीपत 2239
जींद 2413
फतेहाबाद 2152
सिरसा 4138
रोहतक 2102
झज्जर 1305
भिवानी 1932
महेंद्रगढ़ 1723
रेवाड़ी 1927
गुरुग्राम 3297
नूंह 1028
पलवल 2050

चुनाव नोटा मतदाता प्रतिशत
लोकसभा 2019 41,781 0.33
जींद चुनाव 00,345 0.26
मेयर चुनाव 2018 07,546 - -
विधानसभा 2014 53,613 0.04
लोकसभा 2014 34,225 0.30
विधानसभा 2019 65,573 0.52
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