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सिंगल पेरेंट्स के बारे में जानें ये अहम चीजें

Pawan Kumar Rana

Publish: Nov 29, 2017 16:07 PM | Updated: Nov 29, 2017 16:07 PM

Parenting

अगर आप विवाहित हैं और आपको अपने पार्टनर से यह शिकायत रहती है कि वह हमेशा काम करते रहते हैं और आप अपनी तुलना सिंगल पेरेंट से करने लगती हैं

जब बच्चों के पालन-पोषण की बात आती है, तब दो अभिभावकों को भी मुश्किलें आती हैं। ऐसे में, सिंगल पेरेंट के लिए कितनी मुश्किलें होती होंगी, आप खुद ही सोच सकती हैं। बच्चों की देख-रेख आसान काम नहीं है और सिंगल पेरेंट्स के मामले में तो यह बहुत ज्यादा मुश्किल है। आइए जानते हैं कि सिंगल पेरेंट्स अपनी इस जिम्मेदारी को किस तरह से निभाते हैं और उनके बारे में कुछ अहम बातें-

अकेले होने से बहुत ज्यादा है यह
अगर आप यह सोचती हैं कि सिंगल पेरेंटिंग भी एक तरह की पेरेंटिंग ही है, बस फर्क इतना है कि इसमें एक ही अभिभावक होता है तो आप गलत हैं। अकेला होना और पेरेंटिंग, अकेले पेरेंटिंग करने से बहुत ज्यादा है। इसमें आपको न सिर्फ आपको अपना ध्यान रखना है , बल्कि दूसरों का ध्यान भी रखना है और वह भी सिर्फ एक शख्स की कमाई में। इस दौरान आपके पास खुद के लिए समय ही नहीं होता। आपके पास बीमार होने का विकल्प नहीं होता।

पार्टनर काम करे तो सिंगल पेरेंट नहीं हैं
अगर आप विवाहित हैं और आपको अपने पार्टनर से यह शिकायत रहती है कि वह हमेशा काम करते रहते हैं और आप अपनी तुलना सिंगल पेरेंट से करने लगती हैं तो आप गलत करती हैं। जब आपके पास पार्टनर है, भले ही वह सिर्फ वीकएंड्स पर ही घर पर रहें या हमेशा काम में लगे रहें, लेकिन आपके पास कोई तो है। उनकी कमाई आपकी एक जिम्मेदारी तो कम कर ही रही है। जबकि सिंगल पेरेंट्स को बच्चे की जिम्मेदारी के साथ ही कमाई के लिए भी अकेले ही मेहनत करनी पड़ती है।

सिंगल डैड को भी होती है समस्या
अगर आप सिंगल डैड हैं और आपकी बेटी छोटी है तो आपको तमाम तरह की परेशानियां होती होंगी। आप हर जगह उसके साथ जा नहीं सकते और वह छोटी होने की वजह से खुद सभी काम कर नहीं सकती। ऐसे में आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता होगा। खासकर सार्वजनिक जगहों पर।

मुश्किल होता है फैसले करना
कुछ के लिए पार्टनर के बिना जिंदगी बिताना खुशी लाता है, वहीं जिनके लाइफ-पार्टनर अचानक दुनिया से चले जाते हैं, उनके लिए छोटे-छोटे फैसले लेना भी मुश्किल हो जाता है। उन्हें खुद को इतने बड़े सदमे से बाहर निकालना होता है, साथ ही बच्चों की देखरेख भी करनी होती है। ऐसे में घर के या बाहर के छोटे से छोटे या बड़े से बड़े फैसले उन्हें खुद ही करने होते हैं। ऐसा करना उनके लिए काफी मुश्किल होता है। सिंगल पेरेंटिंग उनके लिए विकल्प नहीं होती, उन्हें स्थितियों की वजह से ऐसा करना पड़ता है।


सफलता-विफलता के खुद हैं जिम्मेदार
सिंगल पेरेंटिंग का सबसे मुश्किल हिस्सा होता है, किसी भी दबाव को अकेले झेलना। जब आप अकेली होती हैं, तब आपको खुद ही सभी समस्याओं से लडऩा पड़ता है। अगर कुछ गलत होता है तो उसकी जिम्मेदार सिर्फ आप होती हैं। वहीं कुछ अच्छा होने पर भी आप ही उसके पीछे होती हैं। आपको अकेले ही सभी सुख और दुख का सामना करना होता है। आपको अकेले ही रोना होता है और अकेले ही जश्न भी मनाना होता है।

ज्यादा स्वावलंबी होते हैं बच्चे
किसी भी सिंगल पेरेंट के बच्चे ज्यादा स्वतंत्र होते हैं। शायद इसलिए क्योंकि उन्हें ऐसा होना पड़ता है। चूंकि सिंगल पेरेंट के लिए हर समय उनके साथ रहना संभव नहीं है तो उन्हें खुद को स्वावलंबी बनाना पड़ता है। उन्हें यह समझना होता है कि उनके पेरेंट के पास और भी जिम्मेदारियां हैं, ऐसे में वे खुद को ज्यादा आत्मनिर्भर बना लेते हैं।