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बच्चों की आदतों से हैं परेशान तो जाने उनका बेहतर इलाज़

Manish Kumar Singh

Publish: Jan 11, 2019 18:37 PM | Updated: Jan 11, 2019 18:37 PM

Parenting

अमरीकी टीचर मेघन लीह तीन बच्चों की मां और पैरेंट कोच हैं। अभिभावक उनसे बच्चों को लेकर समाधान पूछते हैं। ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब...

सवाल: मैं कामकाजी महिला हूं और पहली बार मां बनने वाली हूं। बच्चे के जन्म के बाद मैं पूरी छुट्टियां खत्म करने के बाद ही ऑफिस जाने का मन है। इसके बाद मेरी सास बच्चे की देखभाल करेंगी। पर मुझे डर लगता है कि कहीं मैं बच्चे से अलग न हो जाऊं ?

जवाब: बच्चे के जन्म के बाद आप छुट्टी पर रहेंगी तो बच्चा आपके करीब रहेगा। जब उसे आप अपनी सास के पास छोडकऱ जाएंगी तो दिल नहीं मानेगा। इस दुविधा से निकलने के लिए बच्चे के जन्म से पहले अपनी सासू मां के करीब रहें। याद रखें बच्चे की उम्र चार, पांच या छह साल है तब वे आपसे जुड़ा रहेगा। इसके बाद अगर वे दादी या नानी के पास रहता है तो वे उनके अधिक करीब होगा, पर इसका मतलब ये नहीं कि वे आपको भूल जाएगा। जब भी समय मिले बच्चे के साथ समय बिताएं।

सवाल: मेरी बेटी ने हाल ही स्कूल जाना शुरू किया है। मैने देखा है कि वे कुछ मामलों में झूठ बोलती है। ये कोई बड़ा मसला नहीं है लेकिन मुझे डर लगता है कि कहीं ये अविश्वास की स्थिति न बन जाए। मैने गौर किया है कि वह टिफिन ले जाती है इसके बाद भी स्कूल कैफेटेरिया से कुछ खरीदकर खाती है। जब मैं उससे पूछती हूं तो वह सिरे से नकार देती है, जबकि इसकी पुष्टि मैंने कैफेटेरिया से की है। क्या छोटी उम्र की ये आदत जिंदगीभर बनी रहेगी?

जवाब: इस तरह की परेशानी दूसरे अभिभावकों के साथ भी रहती है। पांच से छह साल के उम्र के बच्चों में ऐसी आदत देखी जाती है। पहले इसपर सोचिए कि बच्ची झूठ क्यों बोल रही है। स्कूल में बच्चे वैसा ही करते हैं जैसा उनके दोस्त करते हैं। आपकी बच्ची टिफिन ले जाने के बाद भी स्कूल कैफेटेरिया से खाना खा रही है क्योंकि उसके दोस्त भी बाहर से खाना खरीद रहे हैं। अगर आपको सच्चाई पता है तो बच्ची से ये न पूछें कि वह झूठ क्यों बोल रही है। बच्ची को जरूर बताएं कि इस महीने वह इतनी बार अपना टिफिन बिना खाए वापस लाई। बच्ची का पसंदीदा खाना टिफिन में दें। बच्ची से बात कर तय करें कि महीने में तीन दिन कब कैफेटेरिया से खाना चाहती है। उस दिन कैफेटेरिया से खाना खाने दें। अगर आप ऐसा नहीं करेंगी तो बच्ची के झूठ बोलने की आदत बढ़ेगी और वह परेशान भी रहेगी।

सवाल: मैं घरेलू महिला हूं और मेरे तीन बच्चे हैं जिनकी उम्र पांच, चार और दो साल है। मैं अपने चार साल के बच्चे की शिकायत करने की आदत से परेशान हूं। वो प्री-स्कूल में पढऩे जाता है। जब वे घर आता है तो टीवी देखने के लिए कहता है या किसी के साथ खेलने की जिद्द करता है। जब पांच साल का बच्चा स्कूल से वापस आता है तो वे भी अपने छोटे भाई जैसा व्यवहार करता है। मेरा ज्यादा समय दो साल के बच्चे की देखभाल में गुजरता है। बच्चे मुझे परेशान करने लगे हैं। क्या तरीका है जिससे ये सब ठीक हो जाए ?

जवाब: दूसरे नंबर का बच्चा आपकी परेशानी का सबब है। कारण जानना होगा कि वो ऐसा क्यों कर रहा है? बच्चे चाहते हैं कि वो कुछ ऐसा करें जिससे अभिभावकों का ध्यान उन पर बना रहे। उसे पता है जब वह टीवी देखने की जिद्द करता है तो आप उसे उसके कमरे में भेजने लगती है। इसका मतलब है कि उसे आप उतना ध्यान नहीं दे पा रही हैं जितना ध्यान दूसरे बच्चों को दे रही हैं। आप यह कबूल करिए की आप तीनों बच्चों की पालनहार हैं। बच्चों की गलत आदत के लिए हम उन्हें दोषी नहीं ठहरा सकते हैं जो अपरिपक्व हैं। चार साल के बच्चे के लिए रोजाना 10 से 30 मिनट का समय निकालें और उससे बात करें। बच्चे को चुप कराना या डांटना किसी समस्या का समाधान नहीं है। बच्चे को कभी ये मत कहिए कि जिद्द मत करो। जिस दिन से आप ऐसा करने लगेंगी सारी समस्या हल हो जाएगी और बच्चे भी खुश रहेंगे।

सवाल: मैंने अपने दो साल के बच्चे को कुछ दिन पहले ही प्री-स्कूल भेजना शुरू किया है। कुछ दिन से उसे सर्दी, जुकाम के साथ नाक बहने की समस्या रहने लगी है। कई दिन स्कूल भी नहीं भेजा लेकिन वह स्कूल जाने की जिद करता है तो उसे जरूरी देखभाल के साथ स्कूल भेज रही हूं लेकिन उसकी हालत मुझे ठीक नहीं लगती है। स्कूल में भी खांसने व छींकने से परेशान रहता है। ऐसी स्थिति में मैं नहीं चाहती कि वह स्कूल जाए लेकिन मुझे भी ऑफिस जाना होता है इसलिए स्कूल भेजती हूं। अब मैं क्या करूं?

जवाब: बच्चे की सेहत ठीक रहे यह सबसे बड़ा बिंदु है। आपके बच्चे की नाक लगातार बह रही है और खांसी व छींकने की समस्या है तो सबसे पहले किसी बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं जिससे पता चले कि उसे ये तकलीफ बार-बार क्यों हो रही है। इस स्थिति में बच्चे को स्कूल भेजना बिलकुल भी ठीक नहीं है। अच्छा यही होगा कि उसे कुछ दिन तक आराम करने दें। अगर ऐसी हालत में बच्चा स्कूल जाएगा तो उसकी तबीयत और खराब हो सकती है। बच्चे के खानपान और साफ-सफाई को लेकर सावधानी बरतें क्योंकि इसमें लापरवाही उसकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। इस बात का भी ध्यान रखें कि ऐसी हालत में बच्चे को घर में दूसरों के भरोसे न छोड़ें। आपके बच्चे को देखभाल की जरूरत है जिसके बाद ही उसे इस समस्या से निजात मिल सकती है। बच्चे को ऐसी हालत में स्कूल भेजने से उसकी क्लास में पढऩे वाले बच्चे को भी संक्रमण हो सकता है। बच्चे का ध्यान रखें और उसे समय दें जिससे उसकी समस्या हल हो सके। आप वर्किंग हैं तो बच्चे को स्कूल भेजकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश न करें। आप छुट्टी लें और बच्चे की सेहत पर पूरा ध्यान दें।

वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत