स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

आपके बच्चे नहीं हैं कॉन्फिडेंट तो अपनाएं ये टिप्स

Pawan Kumar Rana

Publish: Dec 03, 2017 17:24 PM | Updated: Dec 03, 2017 17:24 PM

Parenting

आपको उन्हें सिखाना होगा कि विफल होने का मतलब हारना नहीं है, बल्कि विफलता तो केवल एक शुरुआत है।

कामयाबी पाने के लिए हर किसी को खुद पर विश्वास होना चाहिए और उसमें आत्म-सम्मान होना चाहिए। अगर आप चाहती हैं कि आपके बच्चे भी कॉन्फिडेंट बनें और खुद पर विश्वास रखें तो आपको इसमें उनकी मदद करनी होगी। आपको उन्हें सिखाना होगा कि विफल होने का मतलब हारना नहीं है, बल्कि विफलता तो केवल एक शुरुआत है। आपको उन्हें विफल होने की अहमियत बतानी होगी। आपके हौसले से आपके बच्चे कभी निराश नहीं होंगे और खुद पर विश्वास रखकर आगे बढ़ेंगे।

आपका प्यार है जरूरी

एक शोध में पाया गया है कि जिन बच्चों का उनके अभिभावकों के साथ मजबूत और प्यार भरा रिश्ता होता है, उनमें आत्म-सम्मान भी आसानी से विकसित होता है। महज प्रशंसा करने से बेहतर है कि आप अपने बच्चों को प्यार भरा रिश्ता दें और उनके आत्म-सम्मान को बढ़ावा दें। इससे आपके बच्चों को उनकी अहमियत का पता चलेगा और वह कॉन्फिडेंट बनेंगे। उनकी गलतियों पर उन्हें प्यार से समझाएं भी।

हमेशा काम नहीं आती शाबाशी
आपका बच्चा कोई भी काम करे, भले ही वह कितना ही छोटा क्यों न हो, आप उसकी तारीफ जरूर करते हैं क्योंकि इससे आपके बच्चे कामों को ढंग से करते हैं। हालांकि, हर काम में अपने बच्चे की तारीफ करना हमेशा काम नहीं आता। कई बार आपकी तारीफ की वजह से बच्चे में आत्म-सम्मान की भावना नहीं आ पाती। आपको चाहिए कि आप अपने बच्चे में ‘सेंस ऑफ सेल्फ’ विकसित करने की कोशिश करें और उसमें आत्म-विश्वास जगाएं।

बताएं, क्यों खास है?
कुछ बच्चे कॉन्फिडेंट होते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन्हें खुद पर विश्वास नहीं होता। ऐसे बच्चे खुद को दूसरों से कमतर आंकते हैं। अगर आपका बच्चा भी ऐसा है तो आपको उनकी मदद करनी चाहिए। आपको उसे समझाना चाहिए कि वह भी खास है। उसमें भी हुनर है और वह भी बहुत कुछ कर सकता है, वह किसी से कम नहीं है।

उन पर दबाव न बनाएं
आपकी हद से ज्यादा प्रशंसा, आपके बच्चों पर एक तरह का दबाव बना सकती है। हो सकता है कि जब कभी वे अच्छा न करें तो उन्हें लगे कि आपको अच्छा नहीं लगेगा और वे इस कारण परेशान हो जाएं। यह चिंता उन्हें विफलता की ओर भी ले जा सकती है। अपने बच्चे की परवरिश इस तरह करें कि गलती करने पर वह खुद सोचे कि उसे उम्मीद के मुताबिक परिणाम क्यों नहीं मिला और किस तरह वह खुद में बदलाव लाकर इस स्थिति से बाहर आ सकता है।