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बच्चों के सवाल जो अभिभावकों को करते हैं परेशान, जानिए उनके जवाब

Manish Kumar Singh

Publish: Jan 11, 2019 17:43 PM | Updated: Jan 11, 2019 17:43 PM

Parenting

अमरीकी टीचर मेघन लीह तीन बच्चों की मां और पैरेंट कोच हैं। अभिभावक उनसे बच्चों को लेकर समाधान पूछते हैं। ऐसे ही सवालों के जवाब.

सवाल: मेरी 8 माह की बेटी है और पहले पति की पत्नी से 6 वर्ष का बेटा है। वह हायपर एक्टिविटी डिस्ऑर्डर बीमारी से ग्रसित है। मेडिटेशन और अन्य चीजों से उसको थोड़ी राहत है लेकिन वह अक्सर हायपर हो जाता है। ऐसे में बताएं हम क्या करें?

जवाब: सौतेले बच्चों की परवरिश बेहद मुश्किल मानी गई है। दरअसल सबसे बड़ी परेशानी प्राइमरी पैरेंटिंग की होती है जो आपने नहीं की। ऐसे में बच्चे के मनोभाव और आदतों को समझकर उसे अपने अनुसार ढालना चुनौती का काम होता है। हायपर एक्टिविटी डिस्ऑर्डर के बारे में कहते हैं कि यह बीमारी परिस्थतियों में भारी बदलाव के कारण ज्यादा महसूस होती है। दुनिया का हर बच्चा माता-पिता के साथ रहना चाहता है। वर्तमान हालात में उसे मजबूरी में आपके साथ रहना पड़ रहा है। ऐसे में अपने पति का साथ लेते हुए उसके मन के विज्ञान को समझने की कोशिश करें। जितना हो सके उसका विश्वास जीतने की कोशिश करें। बच्चे के साथ समय बिताएं और उससे अच्छे से बात करें। उसकी परेशानी जल्द ठीक हो जाएगी।

सवाल: मैं अपने चार साल के बेटे को क्या टैबलेट दे सकती हूं? दूसरे अभिभावक ऐसा कर रहे हैं? मैं देखती हूं कि मेरे दोस्तों ने अपने प्री- स्कूल किड्स को टैबलेट दिया हुआ है जिसमें वे गेम्स खेलने के साथ वीडियो देखते हैं? क्या ये सही है?

जवाब: आपने जिस तरह से सीधा सवाल किया है वो मुझे पसंद आया। मेरा भी सीधा जवाब है ‘नहीं’। प्री-स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को टैबलेट की कोई जरूरत नहीं है। इससे वो स्मार्ट नहीं बनेगा। चार साल के बच्चे को घर पर अच्छी देखभाल के साथ अभिभावकों के लाड-प्यार की जरूरत होती है। अच्छा और पौष्टिक खाना, पानी और अच्छी नींद उसके लिए बहुत जरूरी है। टैब पर गेम खेलने से बच्चे का मन भटकेगा। खेल में हार और जीत उसके दिमाग का किसी तरह से विकास नहीं करेगी। बाल रोग विशेषज्ञ और न्यूरोलॉजिस्ट ने शोध के बाद चेतावनी दी थी कि तकनीक बच्चों को बुरा बर्ताव करने के लिए प्रेरित करती है। ऐसी स्थिति में चार साल के बच्चे को टैब देना किसी भी तरह से ठीक नहीं है। जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होगा आपको कई तरह के निर्णय लेने होंगे जो उसके भविष्य को बेहतर बनाने का काम करेंगे। सभी अभिभावकों ये पता होना चाहिए कि उसके लिए क्या बेहतर है क्या नहीं। ञ्च वाशिंगटन पोस्ट

सवाल: मेरा तीन साल का बच्चा है। उसे कुछ भी समझाओ तो उसे मानने में परेशानी है। किसी बात को लेकर ‘ना’ कहा जाता है तो दांत से काटता है। हमने पूरी कोशिश की ताकि उसकी आदत सुधर जाए पर कोई खास बदलाव नहीं है। मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब: तीन साल का बच्चा जब गुस्सा होगा तो उसका इजहार भी करेगा। बच्चा गुस्सा क्यों हो रहा है इसका पता लगाएं। बच्चा जब नाराजगी जता रहा है तो आप संयमित रहें। उससे प्यार से पेश आएं। कभी ये न बोलें कि बंद करो या मैं चली जाऊंगी। इसके लिए बच्चे के साथ खेलें। उसके साथ हंसे और अच्छे सवाल पूछें। हर परिस्थिति में बेहतर ढंग से समझाएं। इस उम्र में मस्तिष्क विकास के कारण चीजें समझने का उसे समय दें।

सवाल: दो साल के बच्चे को उसकी गलती का अहसास कैसे कराया जाए जिससे वह माफी मांग सके? मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि अपने भाई या डॉगी को मारने के बाद वो खुद को गलत नहीं मानता है। इस उम्र में क्या करें जिससे सुधार हो जाए ?

जवाब: बच्चे की बौद्धिक और चीजों को समझने की क्षमता बेहतर करने के लिए उसे सामाजिक दायित्वों के बारे में बताना चाहिए। जब उसे अहसास हो जाएगा कि उसकी किसी बात से किसी को कैसे क्षति पहुंचती है तो उसे अपनी गलतियों का अहसास खुद-ब- खुद होने लगेगा। बच्चे की छोटी से छोटी गलत हरकत पर उसे टोकना चाहिए। जैसे वे अपने भाई को मार रहा है, डॉगी की पूंछ खींच रहा है। बच्चे की उम्र छह साल से कम है तो उसे माफी मांगने के लिए दबाव न बनाएं। उसे आपके व्यवहार से ही पता चल जाएगा कि उसने गलती की है। बच्चे की उम्र दो साल है तो उसे नहीं पता कि उसकी गलती से दूसरे को क्या हुआ है। ये दर्शाने की कोशिश करें कि उसकी गलती से किसी को नुकसान हुआ है। इससे बच्चे की मनोस्थिति सुधरेगी। बच्चा आपकी भावना को समझेगा और अपनी गलतियों में सुधार करेगा।