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बच्चों से सवालों से हैं परेशान तो जानें उनके सटीक जवाब

Manish Kumar Singh

Publish: Jan 11, 2019 18:08 PM | Updated: Jan 11, 2019 18:08 PM

Parenting

अमरीकी टीचर मेघन लीह तीन बच्चों की मां और पैरेंट कोच हैं। अभिभावक उनसे बच्चों को लेकर समाधान पूछते हैं। ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब...

सवाल: अपनी मां के साथ मेरा बहुत अच्छा रिश्ता नहीं था। मुझे उनसे कुछ खास लाड प्यार नहीं मिला है। अब मैं खुद एक बच्ची की मां हूं और मैं उसके साथ हर चीज श्ेायर करती हूं। क्या मैं अपने मां के रिश्ते को अपनी बेटी से साझा कर सकती हूं। क्या ये सही है?

जवाब: जब हम अभिभावक बनते हैं तब हमें पता चलता है कि हमने क्या पाया है और बचपन में हमें क्या नहीं मिला। अब आपकी बच्ची को उसकी नानी से जो लाड प्यार मिल रहा है उसे आप अपने बचपन के दिनों से तुलना कर रही हैं। आप खुद को दबाव में न रखें। उसे अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ समय बिताने दें। बेटी को सीमाओं में बांध कर न रखें। इससे जो परेशानी आपको हो रही है वैसी ही परेशानी भविष्य में बेटी को होगी।

सवाल: मेरे चार साल के बच्चे का बात करने का तरीका बदल गया है। जब वह गुस्साता है या जो वह चाहता है, उसे नहीं मिलता है तो मुझे और अपने पिता को ‘दमदम’ बुलाता है। कभी-कभी वह(आई हेट यू) भी कहता है। उसकी आदत कैसे ठीक होगी?

जवाब: चार साल का बच्चा स्वभाव से थोड़ा नटखट होता है। इस उम्र में बोलना सीख रहा होता है, जिससे कई बार वह अपनी सीमाओं को लांघ जाता है। गुस्से में अपनी भावना का इजहार करने के लिए ऐसी चीजें करता है। ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा जिससे उसकी आदत में सुधार हो सके। जब वो गुस्सा करे तो आप शांत रहें। उसकी ये आदत छुड़ाने के लिए उसे किसी भी तरह की धमकी न दें। कभी ये न कहें कि ऐसा करने पर आप उसे पार्क नहीं ले जाएंगे या उसकी पसंद की चीज नहीं देंगे। इससे उसका गुस्सा और बढ़ेगा। जब वह दमदम बुलाता है तो उसे यह अहसास न होने दें कि आपको इससे बुरा लग रहा है। यदि उसकी समझ में यह बात बैठ गई कि उसकी आदतों से आपको परेशानी हो रही है तो वह उन्हें बार-बार दोहराएगा। बच्चे की आदत को लेकर परेशान न हों। जब वह गुस्सा करे तो उसे शांत करने की कोशिश करें सब ठीक हो जाएगा।

सवाल: मेरा पांच साल का बच्चा जब कुछ नया करना चाहता है और वे नहीं कर पाता है (जैसे बॉल कैच करना, कोई नया शब्द लिखना) तो वे उस काम को छोड़ देता है या रोने लगता है। मैने बहुत कोशिश की लेकिन सब नाकाम हो गई क्योंकि वो चाहता है कि चीजें बिना किसी की मदद के सीखे। अपने नाम का एक शब्द नहीं लिख पा रहा था। मैं वहां से चली गई क्योंकि बेहद निराश दिख रहा था। मैं चाहते हुए भी उसकी मदद नहीं कर पा रही हूं। मैं उसकी इस आदत को लेकर काफी परेशान हूं। मेरी मदद करें।

जवाब: बच्चे के इस व्यवहार के कारणों को तलाशना होगा और उसकी निराशा के कारणों को जानें। उसे बॉल पकडऩे और शब्दों को लिखने में दिक्कत है तो उसे दिमाग संबंधी तकलीफ हो सकती है। इसके लिए चिकित्सक से मिलें। आपका बच्चा खुद से अपना नाम लिखना चाहता है। जब हाथों में पेंसिल पकड़ता है तो उसे उम्मीद होती है कि वे ऐसा कर लेगा पर नहीं कर पाता है। वे शब्दों को वैसे नहीं लिख पा रहा है जैसा लिखने की तस्वीर उसने अपने मन में बनाई है जो उसकी निराशा का कारण है। जब वे किसी शब्द को लिखने की कोशिश कर रहा हो तो आप वहां से जाएं नहीं। ये कभी मत सोचिए की नियमित अभ्यास से वो कर लेगा, ये भ्रम बच्चे की निराशा को और बढ़ाएगा। खेल-खेल में लिखना सीख जाएगा। बच्चा गुस्सा करे तो आप शांत रहें और धैर्य रखें। आप एहसास कराएं कि मैं यहीं खड़ी रहूंगी और तुम्हारा गुस्सा नियंत्रित करूंगी। बच्चा कोई शब्द थोड़ा भी सही लिखता है तो उसे प्रोत्साहित करें। बॉल कैच करने की समस्या से निजात के लिए उसके साथ खेलें जिसमें बॉल कैच करने या रिंग पकडऩे अभ्यास हो सके। उम्मीद है कुछ दिन में समस्या हल हो जाएगी।

सवाल: जब मेरा छह साल का बच्चा कुछ गलत करता है और मैं उसे मना करती हूं तो वे खुद को मारने लगता है। वे खुद को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता है लेकिन वे कहता है कि उसे खुद की बुरी आदतें उसे खराब लगती हैं इसलिए वे ऐसा करता है। कई बार वह गुस्स्से में कुछ भी फेंक देता है। अपने भाई को मार देता है इसके बाद वे अपने पैरों को जमीन पर पटकने लगता है। उससे पूछते हैं कि वे ऐसा क्यों कर रहा है तो वे कहता है कि उसने जो किया उसे सोचकर बुरा लगता है इसलिए ऐसा करता है। हम क्या करें?

जवाब: घर के छोटे बच्चों में ऐसी आदत आमतौर पर देखी जाती है और आप अकेली नहीं है। इसका निदान यही है कि पहले आप पता करें कि आखिर वे ऐसा क्यों कर रहा है। इस उम्र के बच्चों का दिमाग पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। इस वजह से वे रोते-चिल्लाते हैं, गुस्सा करते हैं और कई बार अपनी भावना जाहिर करने के लिए चीजें भी तोड़ देते हैं। जैसा कि आपने बताया था कि आपका दूसरा बच्चा भी है, वहीं, आपके बड़े बच्चे की निराशा और परेशानी का केंद्र बन चुका है। छोटे बच्चे पर आपका ध्यान अधिक रहता है इसे देख बड़े बच्चे का व्यवहार ऐसा हो रहा है। इससे निजात पाने के लिए दोनों बच्चों को एकसाथ लेकर बैठें और प्यार से बात करें। बच्चे से ये कहना बंद करें कि अपने भाई को नहीं मारते। जब वह अपने भाई को मारें तो आप कहें कि अरे देखो भाई को चोट लग गई। जाओ आइसपैक लेकर आओ। इसे दर्द हो रहा है। तब उसे अहसास होगा कि वह गलत कर रहा है। बड़े बच्चे की पुरानी तस्वीरों को उसे दिखाते हुए बताएं कि जब वह घर में आया था तब सब कितने खुश थे। इससे बच्चे के मन में जो नकारात्मक भाव हैं वे खत्म होंगे।

वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत