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एड्स पीड़ित महिला को भी मिल सकता है मातृत्व सुख, जानें कैसे

Vikas Gupta

Publish: Dec 05, 2017 19:23 PM | Updated: Dec 05, 2017 19:23 PM

Parenting

आई यू आई, आई वी एफ व ईक्सी की मदद से स्त्री के संक्रमित होने की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है,

एच आई वी से संक्रमित जोड़ों के लिए खुशखबरी है कि वे भी अब मातृत्व सुख का आनंद ले सकते हैं। ये मुमकिन है उन एड्स से संक्रमित जोड़ों में जिसमें स्त्री एच आई वी नेगेटिव है व पुरुष एच आई वी पॉजिटिव है। ऐसा जोड़ा फर्टिलिटी उपचारों की मदद से अपनी सूनी गोद हरी कर सकता है। आई यू आई, आई वी एफ व ईक्सी की मदद से स्त्री के संक्रमित होने की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है, इस वजह से माता से शिशु को होने वाला संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है।

दो तरह के उपचार
दो प्रकार से फर्टिलिटी उपचारों को लिया जा सकता है।
स्पर्म डोनर
पहला तरीका स्पर्म डोनर हो सकता है। इस उपचार में एच आई वी नेगेटिव स्त्री छांट कर निकाले गए शुक्राणु को गर्भधारण के लिए इस्तेमाल में लेती है। ये तरीका ठीक उसी प्रकार है जो स्त्री उस वक्त लेती यदि पुरुष बांझपन का शिकार होता तो।
स्पर्म वाशिंग
दूसरा उपाय है स्पर्म वाशिंग जो बहुत सफलतापूर्वक कई दम्पति सिर्फ इसलिए अपना रहे हैं क्योंकि वो आनुवांशिक रूप से अपने पुरुष साथी को पिता बनते देखना चाहते हैं। यह उपचार इस सिद्धांत पर आधारित है कि एच आई वी से संक्रमित पदार्थ केवल शुक्र संबंधी द्रव में मौजूद होते हैं न कि शुक्राणु में। पुरुष के सेमनल फ्लूइड को प्रयोगशाला में अच्छे से धोया जाता है ताकि उसका संक्रमण हटाया जा सके। इसके बाद उस शुक्राणु को तब तक संग्रहित रखा जाता है जब तक कि महिला में अण्डोत्सर्ग न होने लगे। अण्डोत्सर्ग होने पर आई यू आई की मदद से महिला के गर्भ में शुक्राणु स्थापित कर दिया जाता है। यदि जोड़ीदार में कोई अन्य फर्टिलिटी संबंधित दिक्कत है तो आई वी एफ या ईक्सी की मदद भी ली जा सकती है।
नई तकनीक की वजह से अब'एड्स पीडि़त जोड़े भी चिन्तामुक्त होकर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद से अपने घर में किलकारियों की गूंज अनुभव कर सकते हैं। फर्टिलिटी उपचारों की मदद से वो खुद की सन्तान प्राप्त कर सकते हैं वो भी इस विश्वास के साथ कि उसमें एच आई वी संक्रमित होने का खतरा बहुत कम होगा।