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शिकारियों के बिछाए जाल में फंसकर घंटों परेशान होता रहा तेंदुआ, मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों ने कहा-तेंदुआ नहीं वह सियार होगा

Sonelal Kushwaha

Publish: Jan 16, 2020 01:48 AM | Updated: Jan 16, 2020 01:48 AM

Panna

चौकीदार व ग्रामीणों ने की थी तेंदुआ होने की पुष्टि, सूचना देेने के काफी देर बाद पहुंचा वन अमला

पन्ना. उत्तर वन मंडल के धरमपुर क्षेत्र में मंगलवार रात फंदे से फंसा तेंदुए दिखने की खबर से सनसनी फैली हुई। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। हालांकि, उनका दावा यह भी है कि मौके पर तेंदुआ नहीं था। वे सियार व लकड़बग्घा होने पर आशंका जता रहे हैं। लेकिन सवाल यह नहीं है कि जाल में फंसने वाला तेदुआं था या फिर लकड़बग्घा। सवाल उनकी संवेदनशीलता व शिकारियों की संक्रियता का है। वन विभाग की तमाम सख्ती के बाद क्षेत्र में कैसे कोई जाल बिछा देता है, जो वन्य प्राणियां के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। जिले में वन्य जीवों की औसतन हर महीने वाली मौतों से भी विभाग के अधिकारी आखिर सीख क्यों नहीं ले रहे हैं। स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद उन्हें मौके पर पहुंचने में इतना समय आखिर क्यों लगता है कि मौके से शिकारी व वन्य जीव गायब हो जाते हंै।

ग्रामीणों ने बताया कि जाल में फंसे तेदुएं को उन्होंने अपनी आंखों से देखा है। बचने के लिए वह घंटों तक चीखता चिल्लाता रहा। यह सब उनसे नहीं देखा गया तो विभाग को सूचना दी थी, लेकिन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने देर कर दी। जब तक मौके पर पहुंचे, तब तक तेंदुआ जान बचाकर भाग निकला था। धरमपुर रेंज की रमजूपुर बीट में ग्रामीणों ने लगभग 36 घंटे से ज्यादा समय तक शिकारियों के बिछाए तार के फंदे में तेंदुआ फंसा होने की जानकारी दी थी। लेकिन वन अमला सूचना के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचा। घटना सोमवार 13 जनवरी की बताई जा रही है। लकडिय़ां लेने के लिए जंगल गए लोगों ने ठाकुर बाबा के स्थान के पास खेतों के पास फंदे में फंसे तेंदुए की सूचना वन समिति के चैकीदार को दी थी। मौके पर पहुचे चैकीदार ने बीट गार्ड को बताया। धरमपुर के रेंजर बीके विश्वकर्मा को भी सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने भी देर कर दी।


घंटों जद्दोजहद के बाद भागने में कामयाब
कई बार सूचित करने के बाद भी वन अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचे। धरमपुर रेंजर अमले के साथ दूसरे दिन यानी 14 जनवरी को मौके पर पहुंचे और घटना स्थल से काफी दूर स्थित घर में बैठ गए। रात लगभग तीन बजे पता चला कि तेंदुआ फंदे से छूट कर भाग गया है। तभी रेंजर ने सभी को समझाते हुए कहा कि वह तेंदुआ नहीं लकड़बग्घा या सियार रहा होगा। जबकि गांव वालों ने अपनी आंखों से फंदे पर फंसे तेंदुए को देखने की बात कही थी। कुछ ग्रामीणों ने इस बात का जिक्र किया तो उन्हें धमकी का सामना भी करना पड़ा। सच बताने वाले चौकीदार को डांट-फटकार मिलने की बात समाने आ रही है। हालाकि, कोई भी विभागीय कर्मचारी इस संबंध में कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

&सूचना मिली थी। 14 व 15 जनवरी की रात मैं अमले के साथ मौके था। रात 2 से 3 बजे तक वहीं रहा। लेकिन ऐसी कोई वारदात सामने नहीं आई। फंदे पर सियार फंसा रहा होगा, जो भाग गया था।
बीके विश्वकर्मा, रेंजर धरमपुर

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