स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

प्रदूषण इतना की झाग छोडऩे लगा जीवन दायनी किलकिला का पानी

Shashikant Mishra

Publish: Dec 09, 2019 12:20 PM | Updated: Dec 09, 2019 12:20 PM

Panna

नालों का दूषित पानी और सब्जियों की रसायनिक दवाओं ने किलकिला के पानी को बनाया जहरीला
पीना तो दूर उपयोग के लायक भी नहीं बचा किलकिला का पानी

पन्ना. नगर के बीच से बहने वाली किलकिला नदी इतनी अधिक प्रदूषित हो चुकी है कि नदी के किलकिला कुंड में झाग ही झाग दिखाई दे रहा है। प्रदूषण के कारण इसका पानी पीना तो दूर उपयोग के लायक भी नहीं बचा है।
किलकिला नदी पर बने किलकिला कुंड का मुआयना करने पर पाया गया कि पूरे कुंड में पानी की बड़े-बड़े झाग उठे हुए हैं। ये फॉल की आसपास की चट्टानों से लगे होने के साथ फाल के नीचे के हिस्से के पानी में भी तैर रहे हैं। बताया गया कि नदी में प्रदूषण का स्तर बढऩे पर ऐसे हालात बनते हैं। किलकिला नदी में एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े नाले मिलते हैं। इनका दूषित पानी नदी में ही बहता है। इसके साथ ही नदी किनारे रहने वाले लोगों द्वारा सब्जियां उगाने के लिए नदी के पानी का उपयोग करने के साथ ही सब्जियों को मार्केट में भेजने से पूर्व साफ करने के लिए भी नदी के पानी का ही उपयोग किया जाता है। जिसे नदी में ही बहा दिया जाता है। इससे भी नदी में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। पूरे किलकिला कुंड में फैला झाग किसी का परिणाम बताया जा रहा है।


नदी का है धार्मिक महत्व
गौरतलब है कि पन्ना प्रणामी समाज का अंतरराष्ट्रीय तीर्थ भी है। प्रणामी समाज के लोगों की ऐसी मान्यता है कि करीब ४०० साल पूर्व यह नदी इसी तरह से जहरीली थी। जिसे महामति प्राणनाथ ने शुद्ध किया था। इसीकारण से प्रणामी समाज के लोगों के लिए नदी का धार्मिक महत्व भी है। नदी के खराब होते पानी को देखते हुए ही प्रणामी समाज द्वारा नदी के किनारे श्मशान घाट के पास स्वीमिंग पूल बनाया गया है। जिससे लोग इसमें नहाकर नदी में नहाने का अनुभव कर सकें। इससे अच्छा होता यदि नदी को साफ-सुथरा रखने की दिशा में काम किया जा रहा होता।

[MORE_ADVERTISE1]