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कृषि वैज्ञानिकों ने पीला मोजेक से बचाव के दिए सलाह, कहा-इस तरह से करेंगे खेती तो फसलों में नहीं लगेंगे रोग

Anil Singh Kushwaha

Publish: Sep 10, 2019 22:39 PM | Updated: Sep 10, 2019 22:39 PM

Panna

पन्ना में कृषि वैज्ञानिकों ने किया खेतों का भ्रमण

पन्ना. जिले में वर्तमान खरीफ मौसम में 1.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द की खेती जा रही है। पुरानी किस्मों के उपयोग जो कि पीला मोजेक रोग के लिए रोगग्राही है तथा कीटनाशी का समय पर छिड़काव न करने से काफी मात्रा में पीला मोजेक रोग का प्रकोप वर्तमान में देखा जा रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए सलाह
कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के वैज्ञानिकों डॉ. आशीष त्रिपाठी, डॉ. आरके जायसवाल, डॉ. रणविजय सिंह, रीतेश बागोरा ने जिले के विभिन्न विकासखण्डों में कृषक प्रक्षेत्रों का भ्रमण कर पीला मोजेक रोग की तीव्रता 15-20 प्रतिशत तक देखी है। इससे 15-20 प्रतिशत उत्पादन में कमी देखी गई है। पीला मोजेक रोग, जो कि एक विषाणु जनित रोग है जो सफेद मक्खी नामक रसचूसक कीट द्धारा फैलता है। रोग नियंत्रण हेतु रोगग्रस्त पौधों को खेत से निकालकर नष्ट करें।

किसानों को पीला मोजेक से बचाव के दिए टिप्स
खड़ी फसल में सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु थायोमेथाक्जाम 25 डब्लू.पी. अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल अथवा ऐसिटामिप्रिड 20 एसपी की 150 ग्राम प्रति हैक्टेयऱ के मान से छिड़काव करें। इसी प्रकार कुछ स्थानों पर सरकोस्पोरा पर्ण दाग एवं मक्रोफोमिना पर्णदाग रोग के लक्षण भी पश्रियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बों के रूप में देखने को मिले हैं, उक्त रोग नियंत्रण हेतु पूर्व मिश्रित कवकनाशी कार्बेन्डाजिम $ मैंकोजेब की 400 ग्राम मात्रा अथवा थियोफिनेट मिथाईल की 200 ग्राम मात्रा 200 ली. पानी में घोलकर प्रति एकड़ के मान से छिड़काव करें।