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VIDEO : विधानसभा पर्यावरण समिति ने जमकर लगाई फटकार, कहा- जहर फैलाने वालों को पीढियां नहीं करेगी माफ

Suresh Hemnani

Publish: Sep 21, 2019 14:17 PM | Updated: Sep 21, 2019 14:17 PM

Pali

जिला परिषद सभागार में ली बैठक : लूणी विधायक के सवाल पर आरओ शर्मा ने स्वीकारा, बांडी नदी में जा रहा प्रदूषित पानी

पाली। राजस्थान विधानसभा पर्यावरण संबंधी समिति ने जिला परिषद सभागार में आयोजित बैठक में एनएचएआइ, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, खनन, चिकित्सा और कृषि समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों और उद्यमियों की जमकर क्लास लगाई। करीब तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली बैठक और जनसुनवाई में अधिकांश विभागों को पर्यावरण नियमों का पालन कठोरता से नहीं कराने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्हें कई आने वाली पीढि़यां माफ नहीं करेंगी। समिति के चेयरमैन अर्जुनराम जीनगर बोले, पाली को इतना जहरीला कर दिया कि सांस लेना दुर्भर हो गया है। यहां के काश्तकारों की लाखों बीघा जमीनें बंजर हो गई है। काश्तकार रो रहे हैं, लेकिन प्रदूषण फैलाने वालों को रतिभर शर्म नहीं आ रही। उन्होंने पर्यावरण असंतुलन के लिए चिंता जताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमें गंभीर होना चाहिए। ऑक्सीजन बाजार में नहीं मिलेगी।

बैठक में सर्वप्रथम जिला कलक्टर दिनेशचंद जैन ने सभी सदस्यों का अभिवादन किया। तत्पश्चात बिंदुवार चर्चा शुरू हुई। नदियों का प्रदूषण रोकने के पहले ही बिंदु पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अमित शर्मा ने जैसे ही प्रगति से अवगत कराया, लूणी विधायक महेन्द्र विश्नोई ने तल्खी दिखाई। विश्नोई बोले, आप तो यह बताओ नदी में प्रदूषित पानी जा रहा है या नहीं। विधायक के सवाल पर शर्मा ने वास्तविकता से अवगत कराया कि पानी नदी में ही जा रहा है। आरओ ने यह भी स्वीकारा कि तमाम प्रयासों के बावजूद सीइटीपी मापदंडों के अनुरूप नहीं चल रहा है।

इसकी जानकारी मुख्यालय को भी दे दी है। तब चेयरमैन जीनगर बोले, बंद कराओ इनको, आपको किसने रोका है। उन्होंने नेक्स्ट जैन पार्क के मामले में भी तल्खी दिखाई कि जब पार्क मापदंडों के अनुरूप ही नहीं चल रहा है तो हम बंद क्यों नहीं करा रहे। बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर पौधरोपण के मामले में एनएचएआइ अधिकारियों की जमकर खिंचाई की। सीमेंट इकाइयों से फैल रहे प्रदूषण और एनएचएआइ व सीमेंट इकाइयों द्वारा किए गए प्लांटेंशन की जांच कराने को भी कहा। सिवाणा विधायक हमीरसिंह भायल, लूणी विधायक महेन्द्र विश्नोई व मारवाड़ जंक्शन विधायक खुशवीरसिंह भी पर्यावरण संरक्षण के लिए मुखर हुए। इससे पूर्व सर्किट हाउस में किसानों ने अपनी व्यथा
सुनाई।

बैठक में एनएचएआइ रही निशाने पर
बैठक के दौरान समिति अध्यक्ष जीनगर व मारवाड़ जंक्शन विधायक सिंह के निशाने पर एनएचएआइ और एनएचआइ के अधिकारी रहे। जीनगर ने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर कहीं पेड़ नहीं दिखे। उन्होंने विभाग के अधिकारी पूछा कि कितने पौधे लगाए। अधिकारी के जवाब से वे संतुष्ट नहीं हुए। इस बीच, मारवाड़ जंक्शन विधायक सिंह ने भी एनएचआइ अधिकारी की जमकर खिंचाई की। उन्होंने कहा कि पौधों के आंकड़ों में जरा भी हेरफेर हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। सिंह ने जिला कलक्टर से दोनों राजमार्गों पर एक-एक किलोमीटर तक सर्वे कराने की बात कही। सीमेंट कंपनियों के सीएसआर फंड के उपयोग और पौधरोपण के आंकड़ों को लेकर समिति सदस्यों ने सवाल उठाए।

ये दिए निर्देश
-नियमों की अवहेलना करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।
-सीएसआर के तहत कहां-कहां पौधरोपण किया गया इसका भौतिक सत्यापन कराया जाए। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए।
-जोधपुर से पाली व ब्यावर से पिण्डवाड़ा के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर किए गए पौधरोपण का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
-वन विभाग की अनुमति से ही तकनीकी पहलुओं के आधार पर पौधरोपण किया जाए।
-साकदड़ा में खेतों में स्लज बिखरने वाल खान मालिकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाए।
-जल संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता जांची जाए।
-ग्राउंड वाटर की स्थिति का पता लगाए जाए। इसकी रिपोर्ट समिति को उपलब्ध कराई जाए।
-सीमेंट कंपनियों की बैंलेंस शीट उपलब्ध कराई जाए।

किसने क्या कहा
अर्जुनलाल जीनगर समिति चेयरमैन
हाथ पर हाथ धरे कब तक बैठे रहेंगे। काश्तकारों की जमीनें खराब हो गई। वातावरण पूरा दूषित हो रहा। प्रदूषित पानी अब भी नदी में जा रहा है। कुछ इकाइयों को बंद कराने के बाद भी सुधार नहीं हो रहा है तो सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। क्या हम अब भी किसी के मरने का इंतजार कर रहे हैं। औद्योगिकीकरण का यह मतलब तो कतई नहीं होना चाहिए। पर्यावरण ही गड़बड़ा जाएगा तो हम कैसे बचेंगे। इसकी चिंता सभी को करनी चाहिए। ग्रेनाइट क्षेत्र में भी अब डंपिंग यार्ड पर विचार किया गया है, जबकि दो दशक पहले ग्रेनाइट उद्योग लग गए। दो दशक में किसी भी को पर्यावरण की चिंता नहीं हुई।

दिनेशचंद जैन, जिला कलक्टर
एनजीटी के 2019 के निर्देशानुसार प्रदूषित पानी नदी में नहीं जा सकता। वर्तमान में सीइटीपी से 7 व सिटी सीवरेज से 22 एमएलडी पानी आ रहा है। इतना पानी वर्तमान में रोकना संभव नहीं है। नेहड़ा बांध से पहले यह पानी रोकने के लिए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कच्चा बांध बनाकर पानी रोकेंगे। इसके लिए एक कमेटी भी काम कर रही है। बांडी नदी की सफाई के लिए भी योजना पर काम चल रहा है। एक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण मंडल यदि कसेंट निरस्त कर दे तो हम सीइटीपी बंद करा देंगे। फिर भी नेहड़ा तक पानी नहीं जाए इसका पूरा प्रयास कर रहे हैं।

हमीरसिंह भायल, विधायक सिवाणा
सालों से यही सुनते आ रहे हैं कि प्रदूषण रोकने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक तो कुछ भी सुधार नहीं लग रहा। हम उद्योगों के खिलाफ नहीं है। लेकिन पर्यावरण की चिंता तो करनी पड़ेगी। किसानों की लाखों बीघा जमीन बंजर हो गई है। नेहड़ा बांध को भी डंपिंग यार्ड बना दिया गया। नदी के आसपास 20-20 किलोमीटर में कुओं का पानी लाल-पीला आ रहा है। खारड़ा बांध में अब पानी आया है उसको भी बर्बाद मत कर देना। पाली से लेकर बालोतरा और आगे तक स्थिति विकट हो गई है। किसान ही नहीं आम आदमी भी इसका खामियाजा भुगत रहा है।

खुशवीरसिंह जोजावर, विधायक मा.ज.
सरकार ने ऐसे विधायकों को समिति में सौंपा है जो पर्यावरण से निकटता से जुड़े हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को गंभीरता बरतनी होगी। हम उद्योग बंद कराने नहीं आए है, लेकिन यह भी बर्दाश्त नहीं होगा कि पर्यावरण को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचे। सीमेंट फैक्ट्रियां भूजल का जमकर दोहन कर रही है। वाटर हार्वेस्टिंग के लिए इकाइयों ने अब तक कोई प्रयास नहीं किया, यह गंभीर विषय है।

महेन्द्र विश्नोई, विधायक, लूणी
पाली में जल संरक्षण के हालात विकट है। ये तो भगवान की कृपा रही कि एक टे्रन से ही काम चल गया और अच्छी बारिश हो गई। अब दोबारा ऐसी स्थिति मत लाना जोधपुर में भी पानी कम है। नेशनल हाइवे पर पेड़ नजर ही नहीं आते। जबकि सडक़ बनाने के दौरान बड़ी तादाद में पेड़ों की बलि ली गई थी। इंजीनियर्स यदि ठीक से काम कर लें तो उन्हें यहां आने की नौबत ही नहीं आए।

महावीरसिंह सुकरलाई, किसान संघर्ष समिति
प्रदूषण की समस्या अभी की नहीं है। इसके लिए सीइटीपी और प्रदूषण नियंत्रण मंडल जिम्मेदार है। उन्होंने समस्या समाधान का प्रयास नहीं किया। सीइटीपी मापदंडों पर खरा नहीं उतरा। इसके बावजूद कपड़ा इकाइयों का पानी बांडी नदी में छोड़ा जा रहा है। जबकि हाइकाई और एनजीटी के निर्देश है कि प्रदूषित पानी नदी में नहीं जाए। नेहड़ा के किसान बरसों से पीड़ा भुगत रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।

अविनाश गहलोत, विधायक जैतारण
सीमेंट इकाइयां अंधाधुंध प्रदूषण फैला रही है। चोरी-छिपे भूजल का दोहन किया जा रहा है। निम्बोल में स्थिति
विकट है। वेस्ट किसी भी खातेदारी में डाल दिया जाता है। स्थानीय ग्रामीण परेशान है, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। जांच के लिए आने वाली एजेंसियों को घुसने भी नहीं दिया जाता है।

श्रवण बंजारा, प्रधान
साकदड़ा में माइनिंग के कारण किसानों की जमीन खराब हो रही है। स्लज खेतों में फैंकी जा रही है। इससे किसान परेशान है। इस समस्या पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में हालात विकट हो सकते हैं। बांडी नदी को लेकर भी सिर्फ कौरी बातें हो रही है। समस्या यथावत है। ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण सालों बाद भी प्रदूषण का दंश झेलने को मजबूर है।

बैठक में ये मौजूद
अतिरिक्त जिला कलक्टर वीरेन्द्रसिंह चौधरी, सीईओ हरिराम मीना, एसडीएम रोहिताश्वसिंह तोमर, एसीइओ प्रियंका विश्नोई, सीटी सीओ नारायणदान सहित अधिकारी मौजूद रहे।

सीइटीपी में फर्जीवाड़े का आरोप
विधायक खुशवीरसिंह ने सीइटीपी की ऑडिट में फर्जीवाड़े के आरोप लगाते हुए जिला कलक्टर से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सीइटीपी की ऑडिट में करोड़ों रुपए की रिकवरी की अनुशंसा की गई है।