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सर्पदंश से अचेत विवाहिता को देख चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी- बोला यहां कोई नहीं, ब्यावर ले जाओ

Satyadev Upadhaya

Publish: Oct 22, 2019 01:54 AM | Updated: Oct 22, 2019 01:54 AM

Pali

रायपुर मारवाड़ . उपखण्ड मुख्यालय के राजकीय चिकित्सालय का भगवान ही मालिक है। सोमवार रात 9 बजे कालब कलां से कुछ लोग सर्प काटने से अचेत विवाहिता को लेकर यहां पहुंचे। यहां न तो चिकित्सक मिला न कम्पाउंडर। ड्यूटी पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिला। जो चिकित्सालय पहुंचते ही उन लोगों से बोला यहां कोई नहीं है विवाहिता को ब्यावर ले जाओ।

रायपुर मारवाड़ . उपखण्ड मुख्यालय के राजकीय चिकित्सालय का भगवान ही मालिक है। सोमवार रात 9 बजे कालब कलां से कुछ लोग सर्प काटने से अचेत विवाहिता को लेकर यहां पहुंचे। यहां न तो चिकित्सक मिला न कम्पाउंडर। ड्यूटी पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिला। जो चिकित्सालय पहुंचते ही उन लोगों से बोला यहां कोई नहीं है विवाहिता को ब्यावर ले जाओ।
कालब कलां निवासी दिहाड़ी श्रमिक चेनादेवी पत्नी हुकम सिंह रावत को खेत में कृषि कार्य करते समय शाम को सर्प ने काट लिया। इससे वह अचेत हो गई। परिजनों ने अंधविश्वास के चलते पहले इसे किसी बाबजी के पास ले गए। वहां राहत नहीं मिली।
इसकी सूचना पर इसी गांव के लक्ष्मण सिंह चौहान ने विवाहिता के परिजनों से समझाइश की ओर अपनी जीप में बैठा यहां के चिकित्सालय लेकर आए। यहां चिकित्सक नहीं मिले। कम्पाउंडर अपने काम से बाहर गए हुए थे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने ब्यावर का रास्ता दिखा दिया। ये हालात देख विवाहिता के साथ आए लोग भडक़े भी लेकिन सुनने वाला भी कोई नहीं था। ऐसे में विवाहिता को जीप में लेकर ब्यावर रवाना होना पड़ा।

पत्रिका ने चेताया था
राजस्थान पत्रिका ने सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित कर इस चिकित्सालय में चिकित्सकों के रिक्त पदों के चलते मरीजों को होने वाली परेशानी को उजागर किया। यहां चिकित्सकों के सात पद स्वीकृत हैं। इनमे दो ही पदस्थापित हैं। इन दो में से भी एक अधिकांश तौर पर अवकाश पर रहते हैं। ऐसे में इकलौते चिकित्सक के भरोसे रोजाना चिकित्सालय पहुंचने वाले 350 मरीजों के उपचार का जिम्मा है। इस हालातों को लेकर चिकित्सा विभाग के जिम्मेदारों में आज तक नियुक्ति तो दूर वैकल्पिक व्यवस्था करना भी जरूरी नहीं समझा है।