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भारत की मांग के समर्थन में उतरा ऑस्ट्रेलिया, कर सकता है राष्ट्रमंडल खेल-2022 का बहिष्कार

Mazkoor Alam

Publish: Aug 13, 2019 17:24 PM | Updated: Aug 13, 2019 21:08 PM

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भारत को अब ऑस्ट्रेलिया का साथ मिला है। ऑस्ट्रेलिया से भी निशानेबाजी प्रतियोगिताओं को Commonwealth Games-2022 में शामिल करने की बात उठने लगी है।

मेलबर्न : बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में निशानेबाजी को शामिल करने की भारत की मांग को अब ऑस्ट्रेलिया का भी साथ मिला है। कॉमनवेल्थ गेम्स ( Commonwealth Games-2022 ) में निशाने को शामिल न करने पर अब भारत के सुर में सुर मिलाते हुए ऑस्ट्रेलिया ने भी बहिष्कार की बात कही है। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ ( CGF ) ने जून में फैसला लिया है कि 2022 में बर्मिघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी को जगह नहीं दी जाएगी।

निशानेबाजी 1970 से लगातार शामिल है राष्ट्रमंडल खेलों में

निशानेबाजी 1970 से लगातार राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल है। अगर 2022 में इसे शामिल नहीं किया जाता है तो 52 साल के कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब निशानेबाजी शामिल नहीं होगी। सीजीएफ के इस फैसले के बाद भारत में बर्मिघम राष्ट्रमंडल खेल-2022 के बहिष्कार की मांग उठ रही है। दिग्गज निशानेबाज हिना सिद्धू ने हाल ही में कहा था कि भारत को 2022 में बर्मिघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के बहिष्कार के बारे में विचार करना चाहिए। हिना के बयान के बाद भारतीय ओलंपिक संघ ( IOA ) के अध्यक्ष नरेंदर बत्रा ने भी कहा था कि बहिष्कार एक विकल्प हो सकता है।

ऑस्ट्रेलिया भी हुआ इस मांग में शामिल

भारत के बाद अब ऑस्ट्रेलिया ने भी निशानेबाजी को बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल में शामिल करने की मांग उठाई है। शूटर्स यूनियन ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि अगर शूटिंग को शामिल नहीं किया जाता तो उसे बहिष्कार के बारे में सोचना चाहिए। एसयूए एक लॉबी समूह है, जो ऑस्ट्रेलिया में हजारों बंदूक मालिकों और लोगों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है। यह अमरीका में राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन से संबद्ध है। एसयूए के अध्यक्ष ग्राहम पार्क ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी को शामिल करने की मांग में भारत के साथ खड़ा होना चाहिए। अगर सीजीएफ ऐसा नहीं करता है तो ऑस्ट्रेलिया को इसका बहिष्कार करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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कड़ी मेहनत करने वाले एथलीटों के लिए सही नहीं है

पार्क ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को विश्व स्तर पर खेल उपलब्धियों के लिए जाना जाता है। मनमाने ढंग से हमारे निशानेबाजों को इस अहम टूर्नामेंट में भाग लेने से वंचित करना सही नहीं है। वह कड़ी मेहनत करते हैं। इससे हमारे लिए पदक की संभावना कम होगी, जो राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सवाल है।

पूर्व निशानेबाजी मैनेजर ने कहा- खराब असर पड़ेगा

ऑस्ट्रेलिया निशानेबाजी टीम की पूर्व मैनेजर जैन लिंसले ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि निशानेबाजी को हटाने से ऑस्ट्रेलिया में खेलों के भविष्य पर गलत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर बर्मिंघम खेलों में निशानेबाजी नहीं होती है तो ऑस्ट्रेलिया में निशानेबाजों की ट्रेनिंग के लिए पैसे कम हो जाएंगे। इससे ओलंपिक के लिए निशानेबाजों को तैयार करने और उन्हें पदक जीतने लायक बनाने के अभियान को भी काफी बड़ा धक्का लगेगा।

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पिछले राष्ट्रमंडल में ऑस्ट्रेलिया ने किया था अच्छा प्रदर्शन

ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी में तीन स्वर्ण पदक सहित नौ पदक जीते थे। निशानेबाजी में भारत के बाद वह सबसे ज्यादा पदक जीतने वाला दूसरा देश था।