सभी को राहत का लेखा-जोखा

Dilip Chaturvedi

Publish: Feb 03, 2019 20:09 PM | Updated: Feb 03, 2019 20:09 PM

Opinion

बजट में हर किसान, जिसके पास दो हेक्टेयर या कम भूमि है, उसे 6000 रुपए सालाना की आमदनी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया। इसके लिए 75,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया। माना जा रहा है कि यह सभी को न्यूनतम बेसिक आमदनी की ओर पहला कदम है।

अश्विनी महाजन, आर्थिक मामलों के जानकार

चूंकि मोदी सरकार का कार्यकाल मई में पूर्ण होगा, यह असमंजस चल रहा था कि क्या यह बजट अंतरिम बजट होगा या पूर्ण बजट, क्या सरकार कुछ घोषणाएं कर पाएगी या नहीं, अंततोगत्वा कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने वर्ष 2019-20 के लिए अपना अंतरिम बजट संसद में पेश कर दिया और किसान, गरीब, लघु उद्योगों और अभावग्रस्त लोगों के कल्याण के बारे में सरकार की मंशा भी जाहिर कर दी।

पिछले काफी समय से खेती-किसानी के संकट पर चर्चा चल रही है। किसानों की ऋणग्रस्तता और उस पर ऋण माफी की राजनीति, किसानों को उसकी उपज का सही मूल्य दिलाने की बात से लेकर किसान की आमदनी दोगुना करने की बात, पिछले कम से कम एक साल से चर्चा में है। स्वभाविक ही था कि बजट में खेती किसानी के लिए प्रावधान होने थे।
गौरतलब है कि ग्रोथ के इस दौर में खेती बहुत पीछे छूटती जा रही है। महंगी खाद और बीज, तथा किसानों को मिलने वाली कृषि पदार्थों की कीमतों में अपर्याप्त वृद्धि ने किसानों का जीवन दूभर कर दिया है। आज स्थिति यह है कि 'नाबार्डÓ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार गांवों में जहां खेती से आय ही मुख्य हुआ करती थी, वहां भी लोगों को मात्र 23 प्रतिशत ही आय कृषि से होती है, बाकी मजदूरी, वेतन और थोड़ा-बहुत उद्यम से होती है।

स्थिति यह है कि गांवों में प्रति व्यक्ति आय सालाना मात्र 23000 रुपए से भी कम है, जबकि शहरों में उसका 12.3 गुणा यानी 2,89,000 रुपए है। इसलिए गांववासियों की आमदनी बढ़ाना और उनको न्यूनतम आय दिलाना आज के वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। इस बजट में प्रत्येक किसान, जिसके पास दो हेक्टेयर या इससे कम भूमि है, उसे 6000 रुपए सालाना की आमदनी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया, जो समानता की ओर बड़ा कदम है। यह राशि तीन किस्तों में दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए 75,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। यह भी माना जा रहा है कि यह सभी को न्यूनतम बेसिक आमदनी की ओर पहला कदम है।

बेरोजगारी, आज एक बड़ी समस्या है और गांवों की बेरोजगारी ज्यादा पीड़ादायी है। पिछले सालों से आगे बढ़ते हुए, इस वर्ष मनरेगा के लिए 60,000 करोड़ रुपए का प्रावधान भी ग्रामीण, भूमिहीनों और गरीब किसानों के हालात सुधारते हुए समानता और रोजगार के लिए एक बड़ा कदम माना जा सकता है। रोजगार बढ़ाने के लिए मनरेगा जैसे प्रयासों पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता। जरूरत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर जुटाए जाएं।
इस संदर्भ में पिछले बजट में जहां पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का प्रावधान किया गया
था, इस साल पहली बार इनको कृषि की तर्ज पर, चाहे थोड़ी

ही लेकिन 2 प्रतिशत तक की छूट पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए लिए गए ऋणों पर मिलने से इन व्यवसायों में रोजगार बढऩे की आस जगी है। साथ ही किसानों की आमदनी भी बढऩे की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

जरूरत इस बात की है कि कृषि के अतिरिक्त पशुपालन और मत्स्य पालन के अलावा खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम उत्पादन, बागवानी, मुर्गी पालन, वानिकी इत्यादि के विकास के माध्यम से रोजगार के अतिरिक्त अवसर जुटाए जाएं और ग्रामीण क्षेत्र में आमदनी बढ़ाई जाए।

असंगठित क्षेत्र कहें या विश्वकर्मा क्षेत्र, अब वहां कार्यरत लोगों, जिनकी आय 15000 रुपए तक है, को 100 रुपए प्रतिमाह जमा करने पर 60 साल की आयु के बाद 3000 रुपए प्रतिमाह पेंशन का प्रावधान भी समानता की ओर एक बड़ा कदम होगा। 18 वर्ष की आयु में प्रवेश करने पर तो इसके लिए मात्र 55 रुपए ही प्रतिमाह जमा करने होंगे। स्वास्थ्य बजट में वृद्धि भी एक सराहनीय कदम है।

आय कर में छूट की सीमा को पांच लाख तक लेकर जाना, एक बड़ी छलांग है। इससे लगभग 3 करोड़ लोगों को लाभ होगा। साथ ही साथ वेतन भोगियों के लिए मानक कटौती 40,000 से 50,000 रुपए करना भी राहत देने वाला कदम है। ग्रेच्यूटी की सीमा 10 लाख से 30 लाख किया जाना, पूंजीगत लाभों को एक घर से बढ़ाकर दो घरों तक करना भी मध्यम वर्ग के निवेश को प्रोत्साहित करेगा। इन घोषणाओं से गृहनिर्माण को प्रोत्साहन मिलने की भरपूर संभावना है। जीएसटी में पंजीकृत लघु उद्योगों को 2 प्रतिशत ब्याज में छूट की घोषणा भी महत्त्वपूर्ण है और सराहनीय भी। 'जैमÓ, जो कि सरकारी खरीद के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल है, को अब केंद्र सरकार के उद्यमों के लिए भी खोले जाने से लघु उद्यमों को अपने समान को बेचने में आसानी होगी।

रक्षा बजट को 3 लाख करोड़ पर ले जाना, रेलवे समेत इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रावधान, प्रदूषण कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन, भ्रष्टाचार पर चोट आदि सराहनीय कदम हैं। इन खर्चों से बजट डगमगा सकता था, लेकिन अच्छी बात यह है कि इससे राजकोषीय घाटे को भी जीडीपी के मात्र 3.4 प्रतिशत तक रखा जाना, वर्तमान बजट की विशेषता है। पिछले वर्ष के कुल बजट आकार 24,42,213 करोड़ रुपए से बढ़ाकर इस साल का बजट आकार 27,84,200 करोड़ रुपए का है, (यानी 3,41,987 करोड़ रुपए ज्यादा)। लेकिन इसके बावजूद राजकोषीय घाटा पिछले साल के संशोधित अनुमानों के आधार पर जीडीपी के 3.4 प्रतिशत के बराबर ही आकलित किया गया है। यह इसलिए संभव हुआ है, क्योंकि आगामी साल में इस साल की तुलना में कर राजस्व 2 लाख 52 हजार करोड़ ज्यादा आकलित किया गया है, जो कि एक रिकॉर्ड है।

(लेखक, दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक।)