स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

ट्रंप का नया शिगूफा

Dilip Chaturvedi

Publish: Jul 24, 2019 15:09 PM | Updated: Jul 24, 2019 15:09 PM

Opinion

ट्रंप की जुबान जिस तरह फिसली है, उसने अमरीका में भी उनकी किरकिरी कर दी है। खुद अमरीकी विदेश मंत्रालय को ट्रंप के दावे की कोई बुनियाद नहीं मिल रही है।

कहा जाता है कि आदमी जितने बड़े पद पर बैठता है, उसकी जिम्मेदारियों का भूगोल उतना ही बढ़ जाता है। उसके हर कदम और हर कथन से जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है, लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कदम और कथन कभी अंतरराष्ट्रीय अंधड़ तो कभी भूचाल का सबब बनते रहते हैं। वाइट हाउस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मुलाकात के दौरान कश्मीर पर मध्यस्थता संबंधी बयान देकर उन्होंने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर अमरीका से मध्यस्थता की गुजारिश की थी। ट्रंप के बयान पर संसद के दोनों सदनों में हंगामा हुआ।

राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए साफ कहा कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है। इसे दोनों देश ही मिलकर सुलझाएंगे। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री की तरफ से इस मुद्दे पर मध्यस्थता की कोई गुजारिश नहीं की गई। सरकार की इस सफाई के बाद भी प्रतिपक्षी पार्टियां शांत नहीं हुई हैं, जबकि कश्मीर पर मौजूदा और पूर्ववर्ती सरकारों के रुख पर गौर किया जाए तो ट्रंप का दावा खोखली दीवार की तरह ढह जाता है। इस मुद्दे पर भारत ने किसी तीसरे के दखल को न अब तक बर्दाश्त किया है और न आगे इसकी कोई गुंजाइश नजर आती है। इमरान खान को अमरीकी मोह में लपेटने के चक्कर में कश्मीर पर ट्रंप की जुबान जिस तरह फिसली है, उसने अमरीका में भी उनकी किरकिरी कर दी है। खुद अमरीकी विदेश मंत्रालय को ट्रंप के दावे की कोई बुनियाद नहीं मिल रही है।

ट्रंप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछली मुलाकात जून में ओसाका (जापान) में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में हुई थी। न अमरीका के पास और न भारत के पास इसका कोई अधिकृत रिकॉर्ड है कि उस दौरान मोदी और ट्रंप के बीच कश्मीर मुद्दे पर कोई बातचीत हुई थी। अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सदस्य डेमोक्रेटिक पार्टी के ब्रैड शरमन ने ट्रंप के बयान को गैर-जिम्मेदाराना और गुमराह करने वाला बताया है। सवाल उठता है कि ट्रंप महोदय किसको गुमराह कर रहे हैं?

अमरीकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने हाल ही एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके मुताबिक बतौर राष्ट्रपति ट्रंप ने 869 दिन में 10,796 झूठे या भ्रामक दावे किए। रिपोर्ट में विश्लेषण करते हुए बताया गया कि राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने करीब-करीब रोजाना औसतन 12 संदिग्ध दावे किए। इस रफ्तार से झूठ बोलने वाली हस्ती की किसी भी बात पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं किया जा सकता। ट्रंप का कश्मीर संबंधी ताजा बयान भी एक और ‘झूठ’ या ‘संदिग्ध दावा’ ज्यादा लग रहा है। जैसा कि किसी शायर ने कहा है द्ग ‘खंजर लेकर सोचते क्या हो, कत्ले-मुराद भी कर डालो/ दाग हैं सौ दामन पे तुम्हारे, एक इजाफा और सही।’