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ऐसा क्या हुआ यहां जो खुद के घर देखकर छलकने लगे आंसू

Subodh Kumar Tripathi

Publish: Sep 22, 2019 13:25 PM | Updated: Sep 22, 2019 13:25 PM

Neemuch

ऐसा क्या हुआ यहां जो खुद के घर देखकर छलकने लगे आंसू

नीमच/मनासा. मनासा विकासखंड में आसमानी आफत का ऐसा कहर बरपा की एक सप्ताह होने के बाद भी लोग संभल नहीं पाए हैं। अचानक बरसे इस कहर से लोगों ने अपनी जान तो बचा ली, लेकिन आंखों के सामने डूबे अपने घरों और बर्बाद हुई सालों की मेहनत को देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलक उठे।


बाढ़ का पानी उतरने के बाद अपने जब लोग अपने घरों की ओर लौटे तो उन्हें उम्र भर की कमाई खत्म होते नजर आई। किसी का घर टूट गया तो किसी की दुकान में सब कुछ खत्म हो गया। ऐसे में लोगों की आंखों से आंसू छलकते नहीं रूक रहे हैं। ऐसे में जब शुक्रवार को विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर डाली तो हालात आश्चर्य जनक नजर आए।


रामपुरा में पानी उतरा पर समस्याएं विकराल
बाढ से पूरी तरह प्रभावित रामपुरा वर्तमान में अपने अस्तित्व की तलाश कर रहा है। यहा के करीब आधा दर्जन वार्ड पूरी तरह गांधी सागर बांध के पानी से डूब गए थे। रामपुरा को वर्षों से सुरक्षित रखने वाली रिंगवाल क्या टूटी मानों पूरे शहर में बाढ़ के पानी के कारण कयामत आ गई थी। अब रामपुरा में बाढ का पानी तो ऊतरा लेकिन लोगों के सामने खाने पीने सहित रोजगार के साधन जुटाना चुनौती बनकर सामने खड़ा हो गया। रामपुरा सीएमओ महेंद्र वशिष्ट ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित करीब 2 हजार लोग सात राहत शिविरों में ठहरे हुए थे। जो अब अपने घरों की ओर लोट गए हैं। वर्तमान में पांच राहत शिविरों में लोग रूके हुए हैं। बाढ के कारण करीब 15 से 20 करोड़ का नुकसान है। जबकि रामपुरा व्यापारी संघ के सदस्य राकेश जैन एवं करूण माहेश्वरी ने बताया कि 300 दुकाने पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। जिसके चलते करीब 30 करोड़ का नुकसान हुआ है। वहीं कच्चे और पक्के मिलाकर करीब 500 मकान प्रभावित हुए हैं जिनका आकड़ा 100 से 125 करोड़ के करीब है।


मनासा में व्यापारियों को हुआ भारी नुकसान
मनासा में नाले पर अतिक्रमण के कारण नाले का सारा पानी मुख्य बाजार में होकर निकला। जिससे मंशापूर्ण महादेव के आसपास स्थित व्यापारियों की दुकानों में पानी घुस गया। जिससे व्यापारियों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ। कई कच्चे मकान धराशाई हो गए। जिनकी नप ने कोई सुध नहीं ली। सीएमओ नीता जैन ने बताया कि कुल चार मकान धराशाई हुए हैं। ज्यादा नुकसानी मनासा शहर में नहीं हुई है।


महागढ में आशियानों की तलाश में लोग
पानी के साथ आए तूफान के कारण गांव महागढ़ की नालेश्वर कॉलोनी में कई मकान धराशाई हो गए थे। अब तबाह हुए घरों को वापस खड़ा करने में लोग जुट गए। कॉलोनी में ही करीब 50 मकान धराशाई हुई। कारूलाल ने बताया कि फसल खराब हो चुकी। मकान पूरा क्षतिग्रस्त हो गया है साथ ही गेहूं भी बारिश की भेंट चढ़ गया। अब किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। हमारे हालात सामान्य नहीं होने तक बिजली बिल, पानी एवं अन्य सुविधा शासन द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाए। यशवंत राठोर, कोमलसिंह राजपूत ने बताया कि कॉलोनी मेें 300 लोगों को भारी नुकसान हुआ हैं।


ढाणी के ग्रामीणों ने कि पुनर्वास की मांग


गांधी सागर बांध के पानी से चारों तरफ से घिरे गांव ढाणी की स्थिति बहुत खराब हैं। यहा पर प्रशासनिक व्यवस्था नहीं पंहुचने पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने आगे आकर बाढ़ पीडितों की मदद की। गांव में तीन दर्जन कच्चे मकान धराशाई हो गए। ऐसे में कोई शिविर में रह रहे हैं तो कुछ अपने घर को लौट गए। सरकार से ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थान पर भूमि आवंटित करने। व उचित मुआवजा राशि की मांग की है। ग्रामीणों ने वर्तमान में खानखेड़ी पंचायत के अंतर्गत आने वाले बिजली ग्रिड के यहा गांव को बसाने की मांग की। पूर्व में यहां ढाणी गांव के लोगों के लिए भूमि आंवटन की भी बात कही। जहां पर वर्तमान में लोगों ने अतिक्रमण कर लिया। लेकिन प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा पूरा गांव खण्डर में बदल गया।
बाढ़ पीडित गांवों में मेडिकल एसोसिएशन द्वारा लगातार नि:शुल्क दवाई वितरण कर किया जा रहा हैं। अजय तिवारी ने बताया कि राहत शिविरों एवं एवं बाढ प्रभावित गांवों का दौरा कर वहां पर आवश्यक दवाईयां वितरित की जा रही हैं।
इन गांवों में हुआ है नुकसान
मनासा विकासखंड के ग्राम पंचायत देथल एवं सेमली आंतरी में करीब 125 मकान, महागढ़ में 100 मकान, नलखेड़ा में 90 मकान, चुकनी में 19 मकान, ढाणी में 30 मकान, देवरान में 30 मकान क्षतिग्रस्त हुए। जहां पर प्रशासनिक सुविधाएं नहीं पंहुचने पर विभिन्न संस्थाओं एवं ग्रामीणों ने राहत सामग्री पहुंचाकर मदद की।
जल संसाधन विभाग की रही बड़ी चूक
रामपुरा की बर्बादी का कारण रिंगवाल की मरम्मत नहीं होना रहा। सात हजार फीट लंबी एवं २० फीट चौड़ी रिंगवाल 200 फीट टूट चुकी है। बारिश से पूर्व रिंगवाल की मरम्मत के लिए 15 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी। जबकि विभाग ने केवल 4 लाख रुपए में जेसीबी मशीन द्वारा रिंगवाल की मरम्मत करवाई। जिससे रिंगवाल पर खड़े पेड़ उखडऩे के साथ ही गड्ढ़े हो गए। जिसके चलते रिंगवाल कमजोर हो गई ओर बाढ़ के पानी के कारण टूट गई।
रिंगवाल की 15 लाख रुपए की लागत से मरम्मरत करवाई जानी थी। लेकिन बारिश शुरू होने के कारण समय पर कार्य नहीं हो पाया। मशीन द्वारा 4 लाख से रिंगवाल की मरम्मत की जा सकी थी। पेड़ पौधे उखडऩे एवं गड्ढे होने जैसी कोई बात नहीं हैं। टूटी हुई रिंगवाल को मुरम डालकर भरा जा रहा हैं।
-आरके त्रिवेदी, एसडीओ, जलसंसाधन विभाग रामपुरा
मनासा तहसील में वर्तमान सर्वे के अनुसार 279 पक्के मकान, 843 कच्चे मकान एवं 46 पशुओं की मौत हो चुकी हैं। अभी वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे टीम कार्य कर रही हैं। जानकारी आना बाकी है।
-केसी तिवारी, तहसीलदार मनासा
बाढ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों का आंकलन करना कोई ओचित्य नहीं रहा। रामपुरा में जो बाढ़ आई है वो मानवीय भुल है न की प्राकृतिक आपदा। रामपुरा सहित अन्य बाढ प्रभावित गांवों के लोगों को 100 प्रतिशत मुआवजा शासन की ओर से दिया जाना चाहिए।
-अनिरू द्ध माधव मारू, विधायक मनासा