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शराब की बोतलें उठाने के बाद यहां के शिक्षक कर पाते हैं स्कूल में प्रवेश

Mahendra Kumar Upadhyay

Publish: Nov 20, 2019 20:20 PM | Updated: Nov 20, 2019 20:20 PM

Neemuch

पढ़ाने से पहले शिक्षक रोज हटाते हैं शराब की बोतलें
डिस्पोजल पाउच और नमकीन बिखरे पड़े रहते हैं स्कूल परिसर में
रोज अंधेरा होते ही मयखाने में तब्दील हो जाता है माध्यमिक विद्यालय परिसर

नीमच. जिले की मनासा तहसील के ६ हजार की आबादी वाले गांव भाटखेड़ी में संचालित शासकीय माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रतिदिन शर्मसार होना पड़ता है। यहां कि शिक्षक स्कूल में तब प्रवेश कर पाते हैं जब वे शराब की बोतलें हटाते हैं। स्कूल के मेनगेट के सामने ही बड़ी संख्या में शराब की बोतलें, डिस्पोजल आदि का ढेर लगा रहता है।
स्कूल खोलने से पहले माध्यमिक विद्यालय भाटखेड़ी के शिक्षकों को शर्मसार करने वाला काम करना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई बाद में शुरू होती है पहले शिक्षक शराब की बोतलों, डिस्पोजल और नमकीन से दो चार होते हैं। चपरासी नहीं होने से शिक्षकों को स्वयं शराब की बोतलें हटानी पड़ती है। यह घृणित कार्य एक-दो दिन नहीं शिक्षकों की दिनचर्या में ही सुमार से हो गया है।
स्कूल के पीछे की करते हैं शौच
जहां मां सरस्वती की पूजा होती है उस शिक्षा के मंदिर में प्रतिदिन अंधेरा होते ही जाम छलकने लगते हैं। ऐसा नहीं कि यह एक-दो दिन की ही बात हो। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण शराब और कबाब का लुत्फ उठाने जमा होते हैं। अपने साथ लाई शराब की बोतलें, डिस्पोजल ग्लास, नमकीन, चना आदि स्कूल के मेन गेट के सामने भी छोड़ जाते हैं। सुबह बच्चे जब स्कूल पहुंचते हैं तो उन्हें परिसर में जगह जगह बिखरी शराब की बोतलें दिखाई देती हैं। ऐसा नहीं है कि इस बारे में शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों, पुलिस, जनप्रतिनिधियों आदि को अवगत कराकर रोक लगाने का प्रयास नहीं किया गया हो। ग्रामीण परिवेश होने की वजह से पंगा कौन ले इस कारण कार्रवाई नहीं कराते। सरपंच प्रतिनिधि ने प्रयास भी किया था। कुछ लोगों को जेल की हवा भी खिलाई, लेकिन खामियाजा भी भुगतना पड़ा। शराब के नशे में लोगों ने उनके घर पहुंचकर हंगामा किया। अपशब्दों का उपयोग किया। महिला सरपंच होने से आगे कार्रवाई से बचने लगे। गांव के जागरूक लोग भी सरपंच का सहयोग नहीं करते। परिणाम सबके सामने है। भाटखेड़ी का माध्यमिक विद्यालय परिसर में अंधेरा होते ही मयखाना बन जाता है। इतना भर होता तो भी शिक्षक और विद्यार्थी सहन कर सकते थे। स्कूल परिसर में ही खुले में शौच करने भी ग्रामीण पहुंचते हैं। गंदी बदबू की वजह से बच्चों को कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो जाता है। शिक्षक भी परेशान रहते हैं। शिकायत करने पर भी आज तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गांव की आबादी करीब ६ हजार है। स्कूल में करीब ४५ बालक और बालिकाएं अध्ययनरत् हैं। प्रतिदिन वे भी शराब की बोतलों को देखते हैं। इसका उनपर गलत असर पड़ता है।
मैं रोज हटाता हूं शराब की बोतलें
स्कूल आता हूं बच्चों को पढ़ाने के लिए, लेकिन सबसे पहले मेनगेट के सामने लगा शराब की बोतलों का ढेर हटाता हूं। रोज बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां शराब पीते हैं। जाते समय बोतलें, डिस्पोजल आदि यहीं छोड़ जाते हैं। जगह जगह नमकीन और चने भी बिखरे पड़े रहते हैं। उन्हें भी साफ करना पड़ता है। किसी बात को लेकर मंगलवार सुबह भी स्कूल परिसर में जमकर हंगामा हुआ था।
- अर्जुन यजुर्वेदी, शिक्षक माध्यमिक विद्यालय भाटखेड़ी
मैं जांच करवाता हूं, उचित कार्रवाई करेंगे
ग्राम भाटखेड़ी माध्यमिक विद्यालय में यदि ग्रामीण प्रतिदिन शाराब पीते हैं तो यह ठीक नहीं है। इस बारे में मैं जांच करवाकर उचित कार्रवाई करवाता हूं।
- केएल बामनिया, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी
पुलिस भी नहीं करती कार्रवाई
यह बात सही है कि स्कूल परिसर में बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन शराब पीते हैं। स्कूल परिसर में शराब पीने वाले प्रभावशाली लोगों को वहां से हटाया भी था। लगातार कार्रवाई भी की थी। कुछ लोगों को पुलिस के हवाले भी किया था। कार्रवाई कराने पर शराबी नशे में घर पर आकर हंगामा करने लगते हैं। अपशब्द कहते हैं। पुलिस को सूचना देने पर वे शराबियों को पकड़कर ले जाने में परहेज पालते हैं। गांव के जागरूक लोगों द्वारा सहयोग नहीं किए जाने से इस समस्या का स्थाई हल नहीं निकल पा रहा है।
- संतोष दीपक जोशी, सरपंच भाटखेड़ी

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