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क्रोध मुक्त और शांतिपूर्ण जीवन के लिए प्रभु के प्रति आस्थावान होना जरुरी

Mukesh Sharaiya

Publish: Oct 19, 2019 15:19 PM | Updated: Oct 19, 2019 15:19 PM

Neemuch

ब्रहमाकुमारी सविता बहन ने किया आध्यात्मिक संवाद

मंदसौर. आध्यत्मिक चेतना अभियान द्वारा शहर के महादेव मंदिर टेलीफोन कार्यालय परिसर पर आध्यात्मिक संवाद का आयोजन किया गया। ब्रहमाकुमारी सविता बहन ने कहा कि वर्र्तमान समय में सहनशीलता घट रही है और असंतोष बढ़ रहा है। इस कारण मन की शांति चली गई है।
ब्रहमाकुमारी सविता बहन ने कहा कि क्रोध के कारण सर्वत्र तनाव व्याप्त है। अन्य व्यक्तियों की भावना का आदर व उनका हित चिंतन कर परस्पर व्यवहार हो तो संबंधो में मधुरता संभव है। क्रोध मुक्त व शांतिपूर्ण जीवन के लिए प्रभु के प्रति आस्थावान होना जरुरी है। माता अपने बच्चे को सुसंस्कार देने के लिए जो कठोर व्यवहार करती है। उसमें ममता व स्नेह अंतर्निहित होता है। ऐसा ही व्यवहार सब करें तो ही जीवन आनंदपूर्ण रहता है। प्रकाश रातडिय़ा ने कहा कि क्रोध की जड़ अहंकार है। अहंकार तथ्य पर आधारित नही होता है, बल्कि भ्रान्ति पर आधारित होता है। किसी अन्य को सबक सिखाने या दण्डित करने के लिए गुस्सा करने वाले पहले स्वयं का आत्म अवलोकन कर अपनी गलतियों का बोध व सुधार कर ले। तो कभी क्रोध की चपेट में नही आएंगे। इस अवसरपर श्याम चौबे, शंकरलाल त्रिवेदी, प्रहलाद मालवीय, यशवंत प्रजापति सहित अन्य लोग मौजूद थे।