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अब कतार में नहीं खड़ा होगा अन्नदाता, कृषि विभाग ने समय से पहले किया यह काम

Subodh Kumar Tripathi

Publish: Sep 21, 2019 13:47 PM | Updated: Sep 21, 2019 13:47 PM

Neemuch

अब कतार में नहीं खड़ा होगा अन्नदाता, कृषि विभाग ने समय से पहले किया यह काम

नीमच. पिछले साल अन्नदाता को यूरिया के लिए दिन दिनभर कतारों में खड़ा होना पड़ा, इसके बावजूद भी किसी को दो तो किसी को एक बोरी यूरिया ही हाथ लगा था। इसलिए इस बार अन्नदाताओं को यूरिया के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसलिए समय से पहले यूरिया के गोदाम फूल हो गए हैं। ताकि खरीफ फसल भले ही अन्नदाता के हाथ से छूट गई हो, लेकिन रबी फसल का अन्नदाता बेहतर उत्पादन प्राप्त करे।
बतादें की पिछले साल जिले में यूरिया की काफी मारामारी रही, चूकि समय पर फसल को यूरिया नहीं मिलने से उसका विकास रूक जाता है। इस कारण किसान भी जैसे ही सोसायटी पर यूरिया आता तो अलसुबह से कतार में जाकर खड़े हो जाते थे, ताकि उन्हें इतना यूरिया तो मिल ही जाए जिससे उन्हें अच्छा उत्पादन मिले। गत वर्ष हुई यूरिया की मारामारी को देखते हुए कृषि विभाग ने इस बार समय से पहले अग्रिम भंडारण का लक्ष्य निर्धारित कर भंडारण शुरू कर दिया है। ताकि इस बार अन्नदाता को रबी सीजन की फसलों में यूरिया की मारामारी का सामना नहीं करना पड़े।


खाद्य और उर्वरक के लक्ष्य और भंडारण पर एक नजर
उर्वरक का नाम अग्रिम भंडारण का लक्ष्य भंडारण
डीएपी 2000 1490
एनपीके 2500 2078
यूरिया 12000 7232
पोटास 250 215


खरीफ में बच गया था 42 प्रतिशत यूरिया
खरीफ की फसल के लिए यूरिया का लक्ष्य 7250 था। चूकि सोयाबीन, मक्का सहित अन्य खरीफ की फसलों की बोवनी सर्वाधिक क्षेत्र में होती है। इस कारण यूरिया लक्ष्य के अनुपात में काफी अधिक यानि करीब 9410 टन मंगवाया था। लेकिन खपत मात्र 5507 टन ही हुई। जो की कुल आवक का मात्र 58 प्रतिशत है। ऐसे में 42 प्रतिशत यूरिया अभी भी सोसायटी और जिला विपणन के गोदामों में भरा पड़ा है। खरीफ सीजन में यूरिया का उपयोग कम होने का मुख्य कारण खरीफ सीजन की फसलें अतिवृष्टि के कारण प्रभावित होना है। क्योंकि किसानों ने बोवनी के समय तो यूरिया का उपयोग किया, लेकिन बाद में फसलें खराब होने लगी तो यूरिया तो दूर की बात किसी अन्य खाद्य एवं उर्वरक का उपयोग भी किसान नहीं कर पाए। इस कारण यूरिया काफी मात्रा में बच गया है। वहीं दो दिन पहले भी एक यूरिया की रेेक नीमच पहुंच थी, जिससे इस बार निश्चित ही किसानों को यूरिया की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

रबी सीजन में किसानों को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े, इस कारण यूरिया सहित अन्य उर्वरकों का अग्रिम भंडारण लक्ष्य के अनुसार किया जा रहा है।
-एसएस चौहान, उप संचालक कृषि