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कागजों में चला दस्तक, जमीनी स्तर पर खाली पड़े एनआरसी सेंटर

Subodh Kumar Tripathi

Publish: Aug 19, 2019 12:42 PM | Updated: Aug 19, 2019 12:42 PM

Neemuch

कागजों में चला दस्तक, जमीनी स्तर पर खाली पड़े एनआरसी सेंटर

नीमच. जिले में एक भी बच्चा कुपोषित नहीं बचे, इसलिए जिले के पोषण पुर्नवास केंद्रों में दस्तक अभियान के तहत सीटें बढ़ाकर अधिक से अधिक कुपोषित बच्चों को ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। लेकिन दस्तक अभियान समाप्त होने के साथ ही पोषण पुर्नवास केंद्र में सन्नाटा नजर आने लगा है। क्योंकि यहां कुपोषित बच्चों की जगह खाली पलंग नजर आ रहे हैं। ऐसा ही नजारा रविवार को जिला चिकित्सालय में स्थित एनआरसी में नजर आया, कहने को तो यह 20 सीटर है लेकिन यहां मात्र 4-5 पलंग पर ही कुपोषित बच्चे थे, बाकी सब खाली पड़े थे। लेकिन जिम्मेदारों का इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं है।


526 से अधिक कुपोषित बच्चे, जिले में मात्र 50 सीटर की व्यवस्था
एक एक कुपोषित बच्चे को कम से कम 14 दिन तक एनआरसी में रखना जरूरी होता है। चूकि जिले में करीब चार सेंटर मिलाकर 50 बच्चों का एनआरसी में रखने की व्यवस्था है। इस कारण निश्चित ही एक माह में 100 से अधिक बच्चे कुपोषण के बाहर नहीं आ सकते हैं। इस कारण 500 से अधिक कुपोषित बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए भी करीब 5 माह का समय चाहिए। ऐसे में दस्तक अभियान समाप्त होने के बाद भी करीब चार माह तक जिले के सभी पोषण पुर्नवास केंद्र फूल रहने थे, लेकिन आश्चर्य की बात है जब रविवार को पोषण पुर्नवास केंद्रों पर नजर डाली तो वह खाली पड़ा था।


दस्तक अभियान के तहत 10 जून से 20 जुलाई तक 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की विभिन्न बिंदुओं के आधार पर परीक्षण कर उन्हें उचित उपचार दिलाने की व्यवस्था करना या हायर सेंटर पर रेफर किया जाना था। लेकिन कुछ बच्चे छूट जाने के कारण यह अभियान दस दिन के लिए ओर बढ़ा दिया गया, इस प्रकार करीब सवा माह अभियान चलने पर जिले में 526 से अधिक अतिकुपोषित बच्चे सामने आए। लेकिन 27 जुलाई तक एनआरसी में मात्र 173 बच्चे ही भर्ती हुए थे। यानि 450 से अधिक बच्चों को भर्ती किया जाना शेष है। वहीं 589 से अधिक बच्चों में खून की कमी पाई गई। इस प्रकार करीब एक हजार से अधिक बच्चों को उपचार की जरूरत है। लेकिन जमीनी स्तर पर चंद बच्चों को ही लाभ मिल पाया है।

 

यह नजर आए एनआरसी में कुपोषित बच्चों के साथ
मेरी करीब डेढ़ साल की बच्ची है। जो खाना नहीं खाने के कारण लगातार कमजोर हो रही थी, आंगनवाड़ी के माध्यम से यहां आकर उपचार चालु किया तो बच्ची खाने पीने लगी है। उसके वजन में भी बढ़ोतरी हुई है। एनआरसी में सभी सुविधाएं व उपचार आदि समय पर मिल रहा है।
-कविता बाई, एकता कॉलोनी

 


मेरा 10 माह का लड़का है। जिसका वजन काफी कम होने की वजह से पिछले 8 दिन से यहां रह रहे हंै। यहां अच्छी देखभाल ओर उपचार मिलने से बच्चे का वजन अब बढऩे लगा है।
-मेहरबानो शाह, नीमच सिटी


दस्तक अभियान का मुख्य उद्देश्य कुपोषित बच्चों को एनआरसी के माध्यम से उपचार दिलाना है। चूकि सभी को 14-14 दिन का उपचार देना है। इस कारण कुपोषित बच्चों को बारी बारी से पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती किया जाना है। चूकि बच्चे आंगनवाडिय़ों के अंतर्गत आते हैं ऐसे में उन्हें अपने क्षेत्र के बच्चों को एनआरसी में भेजने की जिम्मेदारी है। हम इस संबंध में सीएमएचओ से चर्चा कर छूटे हुए बच्चों को भी एनआरसी में भर्ती करवाने की व्यवस्था करवाएंगे।
-डॉ जेपी जोशी, दस्तक अभियान, नोडल अधिकारी