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जिला सहकारी बैंक मनासा के एक कर्मचारी को हुई सजा

Mukesh Sharaiya

Publish: Jan 17, 2020 13:27 PM | Updated: Jan 17, 2020 13:27 PM

Neemuch

फर्जी मार्कशीट प्रकरण में 11 आरोपियों को विभिन्न धाराओं में हुई 10-10 साल का सश्रम कारावास

नीमच. 23 साल पुराने फर्जी मार्कशीट प्रकरण में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने 11 आरोपियों को विभिन्न धाराओं में 10-10 साल की सजा सुनाई है। सजायाफ्ता में एक आरोपी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा में पदस्थ कर्मचारी भी है। इसी कर्मचारी को पिछले दिनों कलेक्टर ने मुख्यमंत्री के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट करने और शिकायतकर्ता को धमकाने पर जिला बदर का नोटिस थमाया था।
फर्जी मार्कशीट के दम पर ले रहे थे कॉलेज में प्रवेश
शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नीमच में वर्ष 1997 में फर्जी मार्कशीट बनाने का एक गिरोह सक्रिय हुआ था। गुमराह कर अधिकांश ऐसे युवकों को फर्जी मार्कशीट उपलब्ध कराई जाती थी जिन्हें नौकरी नहीं करना होती थी। जिन फजी मार्कशीट के दम पर पीजी कॉलेज में प्रवेश लिया गया था तब उनकी जांच हुई तो परतदर परत खुलती चली गई। कुल 21 लोग पुलिस के घेरे में आए। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए। अभियोजन मीडिया सेल को सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी विवेक सोमानी ने बताया कि सुनवाई के दौरान 3 आरोपियों की मौत हो गई। 11 आरोपियों को कोर्ट ने सजा सुनाई। करीब 7 आरोपी इस प्रकरण में बरी हुई हैं। फर्जी अंकसूची का प्रकरण 30 मार्च 1997 का है। अब इस प्रकरण में सजाई सुनाई गई है। सोमानी ने बताया कि अभियुक्तगण द्वारा वर्ष 1997 में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा आयोजित बीए, बीकॉम आदि मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए पीजी कॉलेज नीमच की अंकसूची में नंबरों की वृद्धि कर आने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किए थे। आवेदन पत्रों के साथ संलग्न अंकसूचियों को विश्वविद्यालय के रिकार्ड से मिलान किया गया तो पाया गया कि परीक्षार्थी की मार्कशीट में नम्बरों में वृद्धि की गई है। जो मार्कशीट आवेदन के साथ संलग्न की गई हैं वो झूठी हैं। मार्कशीर्ट झूठी बनाकर उसमें उत्तीर्ण (पास) दर्शया गया है। इस आधार पर उक्त परीक्षार्थी (आरोपीगण) के आवेदन पत्र निरस्त किए गए थे। आरोपियों के विरुद्ध पुलिस थाना नीमच में अपराध क्रमांक 378/1997, धारा 120बी, 420, 467, 471 भादवि के अंतर्गत दर्ज किए गए। विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। अभियोजन की ओर से न्यायालय में सभी आवश्यक गवाहों के बयान कराकर अपराध को प्रमाणित कराया गया। दंड के प्रश्न पर तर्क दिया कि आरोपीगण द्वारा फर्जी मार्कशीट बनाकर सम्पत्ति एवं सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध आने वाला गंभीर अपराध किया गया हैं। ऐसे में आरोपीगण को कठोरदंड दिया जाए। कोर्ट ने जिन व्यापारियों को सजा सुनाई है इनमें आशीर्ष पलोड़ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मनासा में उच्च पद पर पदस्थ है। करीब साढ़े सात महीने पहले उसने मुख्यमंत्री कमलनाथ खिलाफ अपनी फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट की थी। इसके बाद उसे निलंबित कर मंदसौर शाखा में अटैच कर दिया गया। पिछले दिनों कलेक्टर ने आशीष के खिलाफ जिला बदर का नोटिस जारी किया। इस नोटिस के खिलाफ माहेश्वरी सहित अन्य समाजों के प्रतिनिधि कलेक्टोरेट पहुंचे थे। कलेक्टर से मिलकर आशीष को इनोसेंट बताया गया था। यहां तक कहा गया था कि इसका पहला अपराध है। उसपर जिला बदर की कार्रवाई नहीं हो सकती। तब किसी को यह पता नहीं था कि उसपर फर्जी अंकसूची बनाने के एक बड़े मामले में प्रकरण दर्ज है। न्यायालय में पिछले 23 सालों से सुनवाई चल रही है। अब उन समाजजनों की बोलती बंद हो गई है जो उसकी पैरवी करने के लिए कलेक्टर से मिलने आए थे।
इन आरोपियों को हुई कठोर सजा
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी नीमच एमए देहलवी ने आरोपीगण लाभचंद पिता वरदीचंद (43) निवासी ग्राम कंजार्डा, आशीष पिता मुरलीधर पलोड़ (41) निवासी सदर बाजार, संदीप पिता रामनिवास दरक (42) निवासी उषागंज, बलराम पिता रामेश्वर चिचानी (42) निवासी सदर बाजार, दिलीप पिता टीटीराम सोनी (45) निवासी भाटखेड़ी रोड पांचों निवासी तहसील मनासा जिला नीमच, ललित पिता लादूसिंह चुंडावत (45), मार्टिन पिता यूएम लायन (48) दोनों निवासी इंदिरा नगर नीमच, राजेश पिता जगदीश प्रसाद शर्मा निवासी विकास नगर नीमच, जितेन्द्र पिता प्रतापसिंह चंडावत (45) निवासी पिपल्याहाना इंदौर, सुरेश पिता साहबसिंह पटेल (44) निवासी होशंगाबाद व ब्रजमोहन पिता नरायणसिंह (47) निवासी जिला भरतपुर राजस्थान को धारा 120बी व धारा 471 भादवि में 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास व एक-एक हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 420 व धारा 467 भादवि में 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास व एक-एक हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। इस प्रकार विभिन्न धाराओं में आरोपीगण को कुल 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास व 4-4 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया गया। न्यायालय द्वारा सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश प्रदान किया गया। इस प्रकार प्रत्येक आरोपी को 3-3 वर्ष व 4-4 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई।

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