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problems to Sugarcane farmer : अधर में सहकारी शुुगर मिल की स्थापना

Sanjay Tiwari

Publish: Aug 22, 2019 20:44 PM | Updated: Aug 22, 2019 20:44 PM

Narsinghpur

किसान समिति बना सके न पंजीयन करा पाए

नरसिंहपुर। पिछले सीजन में करीब 700 करोड़ का गन्ना बेचने वाले किसानों के हित में अभी तक यहां सहकारी शुगर मिल की स्थापना का काम जमीनी स्तर पर नहीं आ सका है। शासन ने कुछ समय पहले एक टीम बनाकर नोडल अधिकारी नियुक्त किया था पर किसानों के स्तर पर सहकारी समितियों का गठन नहीं हो सका है जिससे मिल की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही है।

गन्ना किसानों ने अभी तक नहीं दिखाई रुचि
जानकारी के अनुसार गन्ना किसानों को खुद ही सहकारी समितियों का गठन करना है। जिसके बाद सहकारी शुगर मिल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। गन्ना किसानों की राजनीति करने वाले नेताओं ने भी अभी तक इस मामले में अभी तक कोई रुचि नहीं दिखाई है। जबकि शासन ने सहकारी मिल की स्थापना के लिए एक टीम बनाकर नोडल अधिकारी की नियुक्ति की है। नोडल अधिकारी एआरसीएस के संयुक्त संचालक को बनाया गया है।

कागजों से बाहर नहीं आई गन्ना विकास परिषद
एमपी के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक जिले में गन्ना विकास परिषद का गठन नहीं हो सका है। दो साल पहले प्रदेश के कृषि विकास मंत्री ने गन्ना विकास परिषद के गठन की घोषणा की थी पर जानकारी के अनुसार अभी तक न तो इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन किया गया और न ही इसके लिए बनाए गए एकाउंट में कोई राशि जमा की गई है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के गन्ना किसानों की समस्याओं को दूर करने और गन्ना के विकास के लिए शासन, प्रशासन और जन प्रतिनिधि कितने संवेदनशील हैं। गौरतलब है कि शुगर मिलों द्वारा गन्ना किसानों के शोषण, गन्ना के सही दाम और समय पर भुगतान आदि को लेकर जिले में वर्ष 2018 में नवंबर से लेकर जनवरी तक किसानों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए थे। कई किसानों को जेल जाना पड़ा था और प्रशासन ने बल प्रयोग कर आंदोलनकारी किसानों का दमन भी किया था।

सितंबर 2017 में की थी घोषणा
कृषि विकास मंत्री ने सितंबर 2017 में गन्ना विकास परिषद के गठन की घोषणा की थी। शुगर मिलों द्वाराफंड में राशि जमा करने के लिए अकाउंट नंबर भी जारी कर दिया था। पर यह केवल कागजी साबित हुआ क्योंकि अभी तक शासन स्तर पर गन्ना विकास परिषद के गठन को लेकर किसी तरह की अधिसूचना जारी नहीं की गई। जिससे इस परिषद के गठन को लेकर शासन और जन प्रतिनिधियों की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

परिषद में ये होंगे शामिल
परिषद में अध्यक्ष के अलावा शकर कारखानों के प्रतिनिधि व अन्य जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। परिषद के कार्य में शकर कारखाना के लिए गन्ने के प्रदायक, गन्ने की किस्म, कारखानों के प्रबंधकों, गन्ना उत्पादक सहकारी समितियों आदि के बीच संबंध बनाए रखने की जिम्मेदारी भी होगी। गन्ना परिषद को लेकर तैयार किए गए मसौदे में किसानों के हितों से संबंधित तमाम अन्य चीजें शामिल की गईं हैं।

शुगर मिलों ने जमा नहीं की 80 लाख की राशि
जानकारी के अनुसार गन्ना विकास परिषद के गठन के संबंध में शासन ने जो एकाउंट नंबर जारी किया था उसमें प्रत्येक गन्ना मिल को 50 पैसे प्रति क्विंटल के हिसाब से अपना अंशदान जमा करना है। पर अभी तक उसमें एक पैसा भी जमा नहीं हो सका। यह राशि पिछले वर्षों में खरीदे गए गन्ना की मात्रा के हिसाब से जमा की जानी है। जानकारी के मुताबिक यहां की 8 शुगर मिल मालिकों को अपने हिस्से का 80 लाख रुपए परिषद के खाते में जमा करना है। शासन स्तर पर अधिसूचना जारी न होने से गन्ना मिल मालिक भी यह राशि अपने पास दबा कर बैठे हैं।

प्रदेश में सबसे अधिक गन्ना उत्पादक जिला
नरसिंहपुर जिला प्रदेश में सबसे अधिक गन्ना का उत्पादन करने वाला जिला है। इस बार गन्ना किसानों ने यहां की शुगर मिलों को करीब 570 करोड़ का गन्ना बेचा है । यहां 8 शुगर मिलें हैं और प्रदेश की सबसे बड़ी व प्रसिद्ध करेली गुड़ मंडी भी यहीं है। इसके बावजूद यहां सहकारी शुगर मिल की स्थापना नहीं हो सकी जबकि बुरहानपुर में कई वर्षों से सहकारी शुगर मिल संचालित है।

8 फरवरी को हुई बैठक में कमिश्नर ने दिया था आश्वासन
इस वर्ष 8 फरवरी को जबलपुर राजस्व संभाग आयुक्त की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया था कि वर्ष 2018-19 में जिले में गन्ने का क्षेत्र 65 हजार 200 हेक्टर था जिसके अगले वर्ष 70 हजार हेक्टर होने की संभावना है। कलेक्टर ने बताया था कि जिले की 8 शुगर मिलों की क्षमता से अधिक गन्ने का उत्पादन जिले में हो रहा है, इस कारण से जिले में सहकारी क्षेत्र में शुगर मिल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस पर कमिश्नर ने कहा था कि सहकारी क्षेत्र की शुगर मिल के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग दिया जायेगा।

इनका कहना है
जिले में सहकारी शुगर मिल की स्थापना के लिए शासन ने एक टीम का गठन कर दिया है। इसका नोडल अधिकारी सहकारिता एवं पंजीयन विभाग के संयुक्त संचालक को बनाया गया है। गन्ना किसानों को अपनी सहकारी समितियों का गठन कर उनका पंजीयन कराना है ताकि मिल की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
दीपक सक्सेना, कलेक्टर