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lord mahadev : ‘त्रिनेत्री ही नहीं योगीराज भी हैं भगवान भोले शंकर’

Sanjay Tiwari

Publish: Aug 20, 2019 00:08 AM | Updated: Aug 20, 2019 00:08 AM

Narsinghpur

पूजन और अनुष्ठान के लिए अनुकूल दिन है पूर्णिमा, अमावस्या

नरसिंहपुर/करेली। मां नर्मदा की विशेष कृपा है कि भगवान ब्रह्मा तपोभूमि में, श्रावण मास में चातुर्मास के दौरान अनुष्ठान का अवसर प्राप्त हुआ है। श्रावण मास के सोमवार का विशेष महत्व है। इसी तरह पूर्णिमा का भी विशेष महत्व है। वैज्ञानिकों ने भी माना है कि पूर्णिमा और अमावस्या में पृथ्वी में विशेष प्रकार की तरंगे व्याप्त रहती हैं। एक अदभुत अध्यात्मिक शक्ति है जो पूर्णिमा, अमावस्या के दिन प्रकृति में विद्यमान हो जाती है। पूर्णिमा के दिन पूजन अनुष्ठान में अनुकूलता रहती है।

सत्संग भवन बरमान खुर्द में चातुर्मास कर रहे तपोनिष्ठ संत षण्मुखानंद जी महाराज ने प्रतिदिन के उपदेश, सत्संग में श्रावण पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यह उदगार व्यक्त किए। कहा कि हमारे ऋषियों ने इस गुप्त जगत का अनुभव किया है। ऋ षि यानी मंत्र दृष्टा, इसी से ऋ षि शब्द बना है। आपके और ऋ षियों के देखने में अंतर है। जो आपके सामने हैं आपको वह दिखता है लेकिन ऋ षियों के दिव्य चक्षु होते हैं। भगवान शंकर केवल त्रिनेत्री नहीं हैं, वे योगीराज भी हैं। जो योग की अवस्था पा लेता है, उसको दिव्य चक्षु प्राप्त होते हैं। आपको सिर्फ वर्तमान और भूतकाल दिखता है। लेकिन हमारे बाल्मीकि जी को आने वाला कल भी दिख रहा है।

उन्होंने राम अवतार नहीं हुआ और रामायण लिख दी। पूर्णिमा, अमावस्या सहित सभी सनातनी पर्व विशिष्ट हैं। ऋषियों ने इन्हें अनुभव पर बनाया है। ऋ षि मुनि प्रतिदिन पूजन भजन करते हैं परंतु उन्होंने पूर्णिमा, अमावस्या के दिन विशेष अनुभव किया कि इस दिन प्रकृति में विशेष परमाणु व्याप्त रहते हैं। पूर्णिमा के दिन यह प्रत्यक्ष है देखने मिलता है। पूर्णिमा के दिन पूजन पाठ से चंद्रदेव जल्दी प्रसन्न होते हैं। इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण स्वरूप आकार में रहता है। चंद्रदेव की 16 कलाएं हैं। पूर्णिमा के दिन 16 कलाएं विद्यमान रहती हैं। चंद्रमा, सूर्य के प्रकाश को प्रतिबिंबित करता है। सूर्य नवग्रहों में श्रेष्ठ हैं, प्रत्यक्ष देवता है। आपके शरीर में कई अंग है और प्रत्येक अंग का एक अधिष्ठात्र देवता है। प्रत्येक देवता आपके शरीर में विराजमान है। क्या कुछ अंड में है, वह पिंड में भी है।

वेद कहते हैं कि चंद्रमा आपके मन में विराजमान है, वे मन के अधिष्ठात्र देवता हैं। इसीलिए चंद्रदेव की कृपा हो तो मन में सद विचार आएंगे। मन में सत्य संकल्प आएंगे। चौबे धर्मशाला बरमान खुर्द में प्रतिदिन संध्या 7 बजे से आयोजित दैनिक उपदेश में श्रीमद् भागवत गीता सहित मैया रेवा की महिमा अमृत वर्षा हो रही है।