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drama : जब चिडिय़ा बन गई शेर

Sanjay Tiwari

Publish: Sep 11, 2019 23:55 PM | Updated: Sep 11, 2019 23:55 PM

Narsinghpur

कलाकरों ने किया टूटते परिवार और बुजुर्गों की व्यथा का मंचन

नरसिंहपुर। नाट्य प्रस्तुति देकर अपनी जीवन्त प्रस्तुति से लोगों को दिलों को छू लेने वाली कला आज भी जिंदा है। ऐसी ही कला का प्रदर्शन कलाकारों ने किया और उन्होंने वर्तमान में टूटते परिवार और बुजुर्गों की व्यथा का मंचन कर दर्शकों का दिल जीत लिया। हृदयस्पर्शी मंचन को देख लोगों की आंखों में आंसू छलक आए। इसी तरह दूसरे दिन जब चिकिडय़ा बन गई शेर का मंचन कर कलाकारों ने वाहवाही लूटी।

स्वामी विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय में संस्कृति संचालनालय के सहायोग से आयोजित रंग सरोकार नाट्य समिति के तीसरे बुंदेली नाटय समारोह का समापन किया गया। समारोह में पूर्वरंग के तहत मुंशी प्रेमचंद की रचना कर्म पर विषय विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी तदोपरांत एक-एक रंग थिएटर सोसाइटी भोपाल का सुप्रसिद्ध नाटक नटसम्राट खेला गया। इस नाटक के लेखक शिरवाडकर साहित्य अकादमी से सम्मानित एवं पद्म पुरस्कार से अलंकृत है। नाटक की मुख्य भूमिका में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से अभिनय में गोल्ड मेडल केसरी आलोक चटर्जी ने अपने अभिनय अभिनेश से दर्शकों को अभिभूत कर दिया। इस नाटक में टूटते परिवारों की व्यथा है। बुजुर्गों की व्यथा है। उनके बुढ़ापे की व्यथा है। दूसरे दिन रंग सरोकार नाट्य समिति की ओर से रंग संगीत प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में देश के ख्याति प्राप्त नाट्य निर्देशकों एवं नाट्य संगीतकारों के बनाए हुए रंगमंचजी गीत प्रस्तुत किए गए जो कि पहाड़ी भोजपुरी बुंदेली पंजाबी में गाय गए। इसके बाद दूसरी प्रस्तुति रंग दूत सीधी समिति की ओर से और चिडिय़ा बन गई शेर प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति को युवा रंग कर्मियों द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें कुछ बच्चे भी शामिल थे। यह कहानी वर्तमान राजनीतिक विसंगतियों एवं सत्ता के दुरुपयोग पर एक व्यंग था, जिसे नाट्य से सजा सजा कर प्रस्तुत किया गया।