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बहन चामुंडा से मिलने पहुंची चंबल मैया, पहली बार पखारे पैर

Kamlesh verma

Publish: Jul 04, 2019 20:27 PM | Updated: Jul 04, 2019 20:27 PM

Nagda

शहर में अब तक ६.५४ सेमी बारिश दर्ज हो चुकी है। वहीं चंबल नदी में कुल ३९७.९१ एमसीएफटी पानी स्टोर हो चुका है।

नागदा। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात को शुरु हुई बारिश ने गुरुवार को पूरा दिन कब्जा जमाए रखा। गुरुवार का पूरा दिन बारिश
का दौर जारी रहा। चंबल नदी के लबालब हो जाने से स्थानीय उद्योगों ने राहत की सांस ली है। शहर में अब तक ६.५४ सेमी बारिश दर्ज हो चुकी है। वहीं चंबल नदी में कुल ३९७.९१ एमसीएफटी पानी स्टोर हो चुका है।चंबल नदी स्थित नायन व हनुमान पाला डेम पूरी तरह से भर गया है। बारिश में यह पहला मौका है कि, कुंड वाली चामुंडा माता मंदिर का ओटला डूबो दिया है। बता दें कि, प्रतिवर्ष माता मंदिर के पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो चंबल नदी माता चामुंडा का जलाभिषेक करने के बाद ही सुकून की सांस लेती है। दूसरी ओर राहत की बारिश शहरवासियों के लिए आफत भी साथ लेकर आई है। बारिश ने शहर के प्रमुख मार्गों की सड़कों को गड्ढों में
तब्दील कर दिया है। हालात यह हो चुके है, कि राहगीरों को गड्ढों में भरे कीचड़ से सराबोर होकर गुजरना पड़ रहा है।

कुंड वाली चामुंडा माता मंदिर पर पहुंचा पानी

मंगलवार बुधवार दरमियानी रात से शुरु हुए बारिश से हनुमान पाला डेम पूरी तरह से लबालब हो गया है। डेम के ओवर फ्लो होकर
बहन से कुंड वाली चामुंडा माता मंदिर के ओटले के उपर से पानी होकर गुजर रहा है। उम्मीद लगाई जा रही है कि, गुरुवार पूरी रात बारिश होने के बाद चामुंडा माता मंदिर पूरी तरह से जलमग्न हो जाएगा। मानसून की बारिश में यह पहला मौका है कि डेम का पानी चामुंडा माता मंदिर के ओटले से होकर गुजर रहा है।

इधर दीवार गिरी, नुकसान नहींराहत की बारिश रहवासी
इलाकों में आफत का सबब बनकर बरस रही है। दो दिनों से लगातार जारी बारिश से दयानंद कॉलोनी गली नंबर स्थित संगीता भूरठ बाई के मकान की दीवार धराशाई हो गई। गनीमत रही कि, घटना में किसी प्रकार कोई जनहानी नहीं हुई। भूरठ के अनुसार बारिश के चलते रात को एकाएक दिवार भरभरा कर गिर गई।

इधर बच्चों के लिए मुसीबतबारिश

शहरवासियों के साथ स्कूली बच्चों को भी परेशान करने से बाज नहीं आ रही। शहर के विभिन्न स्कूलों के परिसर में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सबसे अधिक परेशानी सिविल अस्पताल स्थित शासकीय कन्या उमावि में है। स्कूल में पढऩे वाली बालिकाओं को बारिश के पानी से हुए जलभराव में से होकर कक्षाओं तक पहुंचना पड़ रहा है। मामले में जिम्मेदारों का तर्क है कि, लगातार जारी बारिश से
स्थिति उत्पन्न हुई है, यदि बारिश रुक-रुक कर होती तो पानी जमा होने की परेशानी नहीं खड़ी होती।

आजीविका के लिए जान जोखिम में डाल रहे मछुवारे

खैर बारिश केवल जलापूर्ति के लिए ही उपयोगी नहीं है। बारिश शहर के सैकड़ों मछुवारों के लिए आर्थिक रोजी रोटी लेकर भी पहुंचती है।
लेकिन परेशान करने वाली बात यह है कि, आजीविका के लिए मछलियों को पकड़कर उन्हें बेचने का कार्य करने वाले यह मछुवारे चंबल के उफनते पानी में अपनी जान जोखिम में डाल रहे है। रुपए कमाकर पेट की भूख मिटाने के चक्कर यह इस बात को भूल रहे है कि, यदि नदी का जलस्तर एकाएक बढ़ गया तो इनका क्या होगा। बता दें कि, कुछ वर्ष चंबल नदी इसी प्रकार अपने तेज बाहव पर थी, इसी दौरान में नदी में मछलियां पकड़ते हुए कुछ लोग पानी में फंस गए थे। जिन्हें प्रशासन की मदद से नदी से सुरक्षित बाहर निकाला गया था।नगर सरकार की खुली पोल, लाखों की सड़क बनी
नदी शहरवासियों को सुगम व सुविधा युक्त सड़कें देने का दावा करने वाली नगर सरकार का असली चेहरा बारिश ने उजागर किया है। बारिश ने कुछ माह पूर्व ही बनी सड़कों को धो डाला है। बारिश लाखों की सड़कों पर इस कदर हावी हो रही है सड़कों को गड्ढों में तब्दील कर दिया है। विड़बना यह है कि उक्त चित्र नगर सरकार के कार्यालय के प्रमुख द्वार से कुछ दूरी का ही। शहर के जवाहर मार्ग, महिदुपर पहुंच उत्कृष्ट सड़क मार्ग, पुराने बस स्टैंड से पुराने ओवर ब्रिज पहुंच मार्ग, एप्रोच रोड, सुभाष मार्ग थाना चौराहा की सड़कों के हालत बद से बदत्तर हो चुके है। राहगीर गड्ढों भरी सड़कों से गुजरने को मजबूर है।