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फिर उठी राजस्थानी को भाषा का दर्जा देने की मांग

Dharmendra Gaur

Publish: Sep 11, 2019 21:11 PM | Updated: Sep 11, 2019 21:11 PM

Nagaur

Mahakavi Kanhaiya lal Sethiya Birth day : राजस्थान के नागौर के निकट डेह में महाकवि सेठिया की जयंती पर आयोजित कार्यकम में वक्ताओं ने कहा, सेठिया की रचनाओं को भुलाया नहीं जा सकता। सरकार राजस्थानी को द्वितीय भाषा का दर्जा दे।

महाकवि सेठिया की जयंती मनाई
नागौर. राजस्थानी भाषा प्रसार संस्थान एवं नेम प्रकासण डेह के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थानी के महाकवि कन्हैयालाल सेठिया की 100वीं जयंती पर समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पवन पहाडिय़ा ने सेठिया को कालजयी महाकवि बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में पाथल व पीथल तथा धरती धोरां री को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सुजानगढ़ कस्बे में जन्मे सेठिया ने 12 साल की उम्र से ही कविता पाठ शुरू कर दिया। उनकी अग्निवीणा जैसी क्रांतिकारी रचना ने अंग्रेजी हुकूमत में खलबली मचा दी। महात्मा गांधी के सम्पर्क में आने के बाद सेठिया ने युवा वर्ग में आजादी की अलख जगाई। Nagaur latest hindi news


राजस्थानी को मिले मान्यता
पहाडिय़ा ने कहा कि सेठिया जागीरदारी व जमींदारी प्रथा के विरोधी थे इसलिए उन्होंने कुण जमीन रो धणी लिखकर राजस्थान के किसानों में नई चेतना का संचार किया। संयोजक लक्ष्मण दान कविया ने कहा कि मातृभाषा राजस्थानी के प्रति जो समर्पित भाव सेठिया में थे वैसा भाव अन्यत्र कम ही मिलता है। सेठिया ने राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के लिए भारत व राजस्थान सरकार से मांग करते हुए युवा पीढी को भी इसके लिए प्रेरित किया। कविया ने कहा कि राजस्थान सरकार की सेठिया को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि वह राजस्थानी भाषा को प्रदेश में द्वितीय भाषा का दर्जा देकर युवा पीढी के भविष्य को उज्जवल बनाएं। इसके लिए जन मानस को भी माहौल बनाना होगा। hindi news nagaur


ये भी रहे उपस्थित
डॉ. दिनेश फुलवारिया ने कहा कि अध्ययनकाल में सेठिया की अनेक रचनाएं पढने को मिली। इस अवसर पर गोपाल सिंह उदावत, राजवीर सिंह जाट, दौलतसिंह भाटी, फतुराम छाबा, सत्यनारायण नेरिया, जालाराम मौर्य, गोपाल चंद तंवर, भंवरसिंह उदावत, नवीन पहाडिय़ा, छोटूराम जाखड़ समेत अन्य उपस्थित थे।