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रेतीली भूमि में आसानी से उगाई जा सकती है मोठ की फसल

Pratap Singh Soni

Publish: Sep 19, 2019 18:56 PM | Updated: Sep 19, 2019 18:56 PM

Nagaur

मोठ की खेती, किस्में व पैदावार के बारे में दी जानकारी, गांव चक खारडिय़ा में मोठ फसल पर आयोजित हुआ कार्यक्रम

मौलासर. कृषि विज्ञान केन्द्र मौलासर के तत्वावधान में गुरुवार को गांव चक-खारडिय़ा में मोठ की फसल पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें आसपास के गांवों के किसानों ने भाग लिया। केवीके द्वारा इस गांव के 25 किसानों को भारत सरकार की एनएफएसएम योजना अन्तर्गत क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के लिए मोठ की विशेष प्रजाति आरएमओ- 257 के साथ अन्य जैविक आदान जैसे नीम खली, नीम तेल, जैव उर्वरक आदि भी प्रदर्शित किए गए। इस अवसर पर शस्य वैज्ञानिक सुमित्रा बम्बोरिया जानकारी देते हुए बताया कि दलहनी फसलों में मोठ फसल सबसे अधिक सुखा सहन कर सकती है। इसलिए यह सुखाग्रस्त रेगिस्थान क्षेत्रों की महत्वपूर्ण फसल हैं। मोठ ेकी फसल का उपयोग दाने, हरी खाद, पशुओं के लिए चारे के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। मोठ की फसल कम वर्षा व रेतीली भूमि में आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी जड़ें भूमि में गहराई तक जाकर भूमि से नमी प्राप्त कर लेती है। इसकी जड़ों में पाया जाने वाला राईजोबियम जीवाणु वातावरण की नाइट्रोजन को भूमि में इक_ा करता है। इसकी फसल फैलावदार होने के कारण मिट्टी के कटाव को भी रोकती है। उन्नत तकनिकों द्वारा खेती करने पर 25 से 50 प्रतिशत अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर बागवानी वैज्ञानिक डॉ. अनोप कुमारी ने भी सम्बोंधित किया। उन्होंने किसानों को बेलदार सब्जियों में फूल गिरने की समस्या का समाधान बताया। वहीं पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. ममता चौधरी ने मोठ की फसल में लगने वाले कीटों के नियंत्रण के बारे में जानकारी दी।