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सरकार शेयर बाजार में उड़ा रही कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई, राष्ट्रीय पेंशन स्कीम में लुट रहे कर्मचारी

Shyam Lal Choudhary

Publish: Sep 17, 2019 11:28 AM | Updated: Sep 17, 2019 11:28 AM

Nagaur

Major fraud with employees in National Pension Scheme, Government invest in stock market सेवानिवृत्त होने पर 10 प्रतिशत से भी कम मिलती है पेंशन, पिछले काफी वर्षों से हो रहे विरोध के बावजूद सरकार बनी चिकना घड़ा, कर्मचारियों के साथ चिट फंड कम्पनियों से बड़ी धोखाधड़ी

नागौर. देश एवं प्रदेश में साढ़े 15 वर्ष पहले लागू की गई अंशदान पेंशन प्रणाली (अब राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) कर्मचारियों के लिए गलफांस बनी हुई है। यदि यह कहा जाए कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) कर्मचारियों के लिए चिट फंड कम्पनियों से बड़ी धोखाधड़ी साबित हो रही है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उनके वेतन से हर माह काटी जाने वाली राशि सरकार शेयर बाजार में निवेश कर रही है, ऐसे में कर्मचारी के सेवानिवृत्ति के समय शेयर मार्केट (1997 के पूर्वी एशिया या 2008 के विश्व व्यापी मंदी के दौर की तरह) गिर जाता है तो सारा पैसा डूब जाएगा और सरकार अपने हाथ खड़े कर देगी है, तब उस कर्मचारियों की स्थिति कैसी होगी। इसका अंदाजा लगाना भर कठिन है।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने एक जनवरी 2004 से अंशदान पेंशन प्रणाली (एनपीएस) लागू की। इस योजना में पेंशन के लिए वेतन से 10 प्रतिशत की कटौती होती है, लेकिन सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) की सुविधा नहीं है।
एक प्रकार से एनपीएस पेंशन योजना ना होकर शेयर बाजार आधारित शत-प्रतिशत असुरक्षित म्यूच्यल फंड योजना है, जिसमें सेवानिवृत्ति के समय पेंशन की कोई गारंटी नहीं है, जबकि पुरानी पेंशन योजना में सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन, जो अंतिम मूल वेतन के 50 प्रतिशत की गारंटी है। राजस्थान में करीब 4 लाख कर्मचारी और भारत में करीब 60 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, इनमें ऊंचे से ऊंचा अधिकारी एवं छोटे से छोटा कर्मचारी एवं अर्ध सैनिक बल शामिल हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि यह पेंशन स्कीम उनका बुढ़ापा खराब कर देगी। क्योंकि इस स्कीम से जुड़े जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उन्हें जो पेंशन मिल रही है, उसे पाकर वे अपने आप को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।

शर्तें ऐसी कि हर तरफ से कर्मचारी को ही घाटा
एनपीएस में शेयर बाजार आधारित पेंशन कम्पनियों द्वारा भुगतान किया जाता है। इसमें सेवानिवृत्ति पर शेयर बाजार के आधार पर भुगतान राशि पर 30 प्रतिशत इनकम टेक्स देना होगा। साथ ही सेवानिवृत्ति के समय एनपीएस जमा फंड से 40 प्रतिशत राशि किसी एक पेंशन कम्पनी में निवेश करना पड़ेगा।

देखो और तरसो
कर्मचारियों का कहना है कि एनपीएस की जमा राशि वे खाते में देख तो सकते हैं, लेकिन जरूरत पडऩे पर उसका उपयोग नहीं कर सकते।

4 प्रतिशत भी नहीं पेंशन
केस- 1
अलाय निवासी केसाराम गोदारा ने करीब 42 वर्षों तक डाक विभाग में नौकरी की। वर्ष 2010 में उनका स्थायीकरण हुआ और करीब एक साल पहले सेवानिवृत्त हुए तब 32 हजार से अधिक वेतन था। लेकिन जब पेंशन शुरू हुई तो मात्र 1240 रुपए मिले। पेंशन की राशि देखकर केसाराम को झटका लगा। विभागीय अधिकारियो से सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि इतनी ही पेंशन मिलेगी। वर्तमान में गोदारा लकवा बीमारी से ग्रस्त हैं।

केस- 2
नागौर सैनिक कल्याण बोर्ड में करीब 15 वर्ष नौकरी करने के बाद गत 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हुए शंकरसिंह ने बताया कि एनपीएस में पेंशन नहीं मिली, केवल शोषण होता है। उन्होंने बताया कि वे पहले सैनिक थे और सैनिक कोर्ट से ही वापस सैनिक कल्याण बोर्ड में लगे। हाल ही जब सेवानिवृत्त हुए तब 36 हजार रुपए महीना वेतन उठा रहे थे, लेकिन पेंशन 2 हजार मिल जाए तो बड़ी बात होगी।

एनपीएस किसी एंगल से ठीक नहीं
एनपीएस किसी भी एंगल से कर्मचारियों के लिए ठीक नहीं है। इस योजना में सरकार कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई शेयर मार्केट में लगा रही है, जिसके कारण सेवानिवृत्ति पर कर्मचारी अपने आप को ठगा-सा महसूस करते हैं। हमारा संगठन लगातार इसका विरोध कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।
- जुगल जाखड़, प्रदेश उपाध्यक्ष, न्यू पेंशन स्कीम एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ राजस्थान