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लजीज व्यंजनों के लिए मशहूर है लाडनूं

Rudresh Sharma

Publish: Sep 11, 2019 13:29 PM | Updated: Sep 11, 2019 13:29 PM

Nagaur

Nagaur News in Hindi बस नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है, फि‍र सैंकडों मील दूर बैठे प्रवासी भी यहां के व्‍यंजनों को चखने से खुद को नहीं रोक पाते. या तो मंगवा लेते हैं या किसी बहाने खुद चले आते हैं...

दीक्षान्त हिन्दुस्तानी . लाडनूं
नागौर जिले का लाडनूं (Ladnun) कस्बा यूं तो अपनी विभिन्न विशेषताओं से देश प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता ही है। खान पान के मामले में भी यहां के व्यंजनों का स्वाद मुंह में पानी ला देता है। मिठाई की बात करें या फिर नमकीन की, चाहे बात हो सौंफ की। यहां के व्यंजनों की सुगंध दूर बसे प्रवासी भी नहीं भूल पाते। इस विशेषता के पीछे यहां के कुछ प्रसिद्ध हलवाई जुड़े हैं, जिनके नाम से ही नगर की पहचान भी जुड़ी हुई है।


रामेश्वर के रसगुल्ले
स्टेशन रोड़ पर स्थित इस छोटी सी दुकान पर दिनभर रसगुल्ले (Rasgulle) लेने वालों की कतार लगी रहती है। रामेश्वर हलवाई ने इसको पहचान दिलवाई। अब उनके पुत्र जेपी टाक इसे आगे बढ़ा रहे हैं। इनकी दुकान के रसगुल्ले की खासियत यह है कि उसके ऊपर से बाइक भी निकाल दी जाए तो स्पंज नहीं टूटता। यहां से कोलकाता, मुंबई, असम तक लोग रसगुल्ले पैक करवाकर साथ ले जाते हैं। गुणवत्तापूर्ण चबेनी व बर्फी के लिए भी यह दुकान जानी जाती है। कई बार हाई डिमांड के चलते रसगुल्ले के शौकीन लोगों को खाली हाथ भी लौटना पड़ता है।

भाणु की कचौरी
बस स्टैंड पर रोज सुबह लगने वाले इस गाड़े पर विशेष स्वाद लिए लहसुन की चटनी के साथ कचौरी का नाश्ता करते सैंकड़ो की संख्या में काम पर जाने वाले लोगों को देखा जा सकता है। सब्जी मंडी स्थित मोदी की कचौरी व मामाजी के बडे वाले गाड़े ने भी लोगों की जीभ पर अपना अलग स्वाद चढ़ा रखा है।

सांवरिया के समोसे
सदर बाजार में अपने घर पर ही समोसे बनाकर बेचने वाले को नगर में शायद ही कोई होगा, जो नहीं जानता होगा। इसी प्रकार जैविभा (Jain Vishwa Bharti Ladnun) के पास स्थित भिकजी के समोसे भी अपने विशेष मसाले के लिए लाडनूंभर में प्रसिद्ध है।

जंक्शन की जलेबी
केसरदेवी स्कूल के पास स्थित जलेबी जंक्शन के नाम से प्रसिद्ध आशीष की दुकान पर रोज सुबह जलेबी लेने के लिए खड़े लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती है। सर्दियों में तो दोपहर तक गर्मागर्म जलेबी निकलती रहती है।

लाडनूं की चुरी-खाट
खटाई के मामले में भी लाडनूं की सौंफ जो कि चुरी के नाम से जानी जाती है अपना विशेष अंदाज रखती है। खाटा चुरी के साथ यहां घरों में बड़ी, पापड़, अचार आदि के भी लघु उद्योग स्थापित है। चंपालाल मनोज बोथरा, लीला स्टोर, धीरज बेंगाणी, संजय अग्रवाल सहित अन्य जो न केवल नगर में अपना व्यापार करते हैं बल्कि नगर की अलग पहचान बनाने में भी अपना योगदान देते हैं।

लच्छेदार रबड़ी
स्टेशन रोड पर स्थित सुरेंद्र व डालजी की रबड़ी की दुकान पर शाम होते होते लगभग सभी रुकने लग जाते हंै। यहां हर रोज ताजा लच्छेदार रबड़ी बनती है और खत्म हो जाती है। पहले आओ पहले पाओ की स्थिति बनी रहती है। जगदंबा आइसक्रीम वाले की कुल्फी भी इसी प्रकार का अपना स्वाद रखती है।

विजय पान पैलेस
वैसे तो नगर में सैंकड़ों पान की दुकानें है मगर सदर बाजार में स्थित यह छोटा सा पान पैलेस नगर में लंबे समय से अपने स्वाद के चलते विशेष नाम रखता है। देर रात तक यहां लोग खाना खाकर पान खाने आते हैं।

लाडू की चाय
नगर के मुख्य बाजार में स्थित लाडू की दुकान की चाय से लाडनूं के लोग चाय की चुस्कियों के साथ अखबार की खबरों पर चर्चा कर अपने दिन की शुरुआत करते देखे जा सकते हैं। इसके अलावा सब्जी मंडी स्थित रतलामी चाय की दुकान व बस स्टैंड पर लादू बाबा की पूरी रात खुली रहने वाली दुकान पर भी चाय के शौकीन बेठे नजर आते हंै।

अन्य विविध व्यंजन
उपरोक्त के अलावा भी नगर में सर्दी के समय तिलपपड़ी, खुरमानी व फीके फीनी घेवर का भी काफी अच्छा स्वाद है। जो आस पास के क्षेत्र तक में अपना अलग अंदाज रखते हैं। शाम को राहू गेट पर भी चौपाटी के रूप में भी फास्ट फूड के अड्डे पर लोग डोसा, टिक्की, बर्गर, सॉफ्टी खाते देखे जा सकते हैं।