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अंतराष्ट्रीय एविएशन डे  :  कागजों की उलझन मिटे तो पूरा हो उड़ान का सपना

Dharmendra Gaur

Publish: Dec 07, 2019 12:30 PM | Updated: Dec 07, 2019 12:30 PM

Nagaur

अब नगर परिषद ने नगर नियोजक अजमेर से मांगी राय, हवाई पट्टी के सामने बहुमंजिला इमारत निर्माण का मामला, विस्तार में बाधा बन रहे नियम विरुद्ध बनी बड़ी इमारतें

नागौर. हवाई पट्टी विस्तार में आ रही बाधाएं दूर होने पर नागौर से हवाई उड़ान का सपना पूरा होगा लेकिन विस्तार पर कागजी उलझन भारी पड़ रही है। सरकार द्वारा 3 करोड़ 61 लाख रुपए का बजट स्वीकृत करने के बाद तहसील कार्यालय स्तर पर विभिन्न खसरों में अवाप्ति योग्य भूमि के चयन का कार्य किए जाने पर उम्मीद जगी थी कि जल्द यहां से रात के अंधेरे में भी बड़े विमान उतर सकेंगे लेकिन हवाई पट्टी के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग 89 पर निर्मित बहुमंजिला इमारत बाधा बन रही है। नियमों को ताक पर रखकर नगर पालिका की ओर से भवन निर्माण की अनुमति देने पर यह मामला जोधपुर उच्च न्यायालय में चला गया था।

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पायलट भी जता चुके हैं चिंता

कोर्ट ने गत अक्टूबर में स्वायत्त शासन विभाग को चार माह में तथ्यों की जांच कर निर्णय देने का आदेश दिया था। इसके बाद हवाई पट्टी विस्तार को ग्रहण सा लग गया। काफी समय बाद नगर परिषद ने नगर नियोजक अजमेर से इस मामले में तकनिकी राय मांगी है। वहां से निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि तत्कालीन उपखंड अधिकारी ने बीकानेर रोड पर बहुमंजिला होटल के लिए जमीन की 90 बी की कार्रवाई की थी। हवाई पट्टी के सामने बनी बड़ी-बड़ी इमारतें हवाई पट्टी से उड़ान भरने वाले विमानों के लिए खतरनाक है। यहां आने वाले विमानों के कई पायलट भी कुछ बड़ी इमारतों को 'खतरनाकÓ बता चुके हैंं।

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अधिकारियों ने नहीं दी अनुमति

हाईकोर्ट में विचाराधीन कमल किशोर अग्रवाल एवं अन्य बनाम राज्य सरकार मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने यह प्रकरण स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर के निदेशक को भेजते हुए रिकॉर्ड के अनुसार तथ्यों का परीक्षण कर चार माह में निर्णय देने का आदेश दिया था। व्यवसायी ने होटल निर्माण की अनुमति के बाद होटल को मल्टीप्लेक्स बनाया तथा इसके बाद पीडब्ल्यूडी से सिनेमा हॉल की अनुमति मांगी लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इमारत का निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुसार नहीं होने के चलते सिनेमा घर की अनुमति नहीं दी। तत्कालीन कलक्टर ने 90बी के खिलाफ तहसीलदार के माध्यम से संभागीय आयुक्त अजमेर के समक्ष तथा नगर परिषद आयुक्त से डीएलबी में निगरानी दायर करवाई थी।

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अधिकारियों ने उड़ाई नियमों की धज्जियां

हवाई पट्टी के सामने बनी एक इमारत की निर्माण अनुमति में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने जमकर भ्रष्टाचार किया। नागौर नगर पालिका (अब नगर परिषद) के तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने 16 नवम्बर 2011 को व्यवसायी को 24 मीटर से अधिक ऊंचाई की होटल निर्माण की स्वीकृति दे दी और तत्कालीन एसडीएम ने नियम विरुद्ध 90बी जारी कर दी। नियमानुसार होटल का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग से 100 फीट की दूरी पर होना था, लेकिन एसडीएम ने 50 फीट दूर की 90बी जारी कर दी। नगर परिषद एवं एसडीएम ने भले ही नियम विरुद्ध होटल निर्माण की स्वीकृति जारी कर दी, लेकिन सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने अनुमति देने से मना कर दिया।

हर जगह ताक पर रखे नियम

स्थानीय निकाय विभाग के प्रमुख शासन सचिव के आदेशानुसार हवाई पट्टी के दो किलोमीटर क्षेत्र में यदि कोई बहुमंजिला इमारत का निर्माण किया जाता है तो उसकी नगर पालिका या नगर परिषद 15 मीटर की ऊंचाई तक अनुमति दे सकती है। 15 से 30 मीटर तक की ऊंचाई की इमारत बनाने के लिए वरिष्ठ नगर नियोजक की अनुमति नहीं ली गई। इमारत हवाई पट्टी के सामने होने के चलते नागरिक उड्डयन मंत्रालय की अनुमति जरूरी होने के बावजूद अनदेखी की गई। भवन मालिक ने राष्ट्रीय राजमार्ग व रेलवे से एनओसी नहीं ली। सरकार ने 23 अक्टूबर 2018 को रन वे विस्तार, चौड़ाईकरण, चार दीवार निर्माण, रन वे नवीनीकरण के लिए 1139.51 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की थी

तत्कालीन मुख्यमंत्री ने दिखाई थी रुचि

हवाई पट्टी विस्तार के लिए 90.36 बीघा भूमि मुख्य पायलट अधिकारी, निदेशालय नागरिक विमानन जयपुर एवं जिला कलक्टर नागौर की ओर से भूमि अवाप्ति की कार्यवाही की जा चुकी है। दीगर है कि अक्टूबर 2015 में नागौर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री राजे ने भी नागौर हवाई पट्टी के विस्तार को लेकर रुचि दिखाते हुए आसपास निर्माण कार्य हटाने व विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजने के निर्देश दिए तथा तत्कालीन कलक्टर राजन विशाल ने जयपुर में उच्चाधिकारियों से चर्चा की थी। विस्तार के दौरान हवाई पट्टी की लम्बाई 1500 मीटर से बढ़ाकर 2000 मीटर तथा चौड़ाई 30 से 45 मीटर किया जाना प्रस्तावित है। 90 बीघा भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है तथा भूमि अवाप्ति को लेकर 3 करोड़ 61 लाख रुपए का बजट स्वीकृत हुआ है।

क्यों महत्वपूर्ण है नागौर की हवाई पट्टी

-जोधपुर, बीकानेर व गंगानगर जिले पाकिस्तान की सीमा पर होने के कारण नागौर सामरिक दृष्टि से काफी अहम है।

-युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में नागौर देश के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र साबित हो सकता है। हवाई सेवा शुरू होने से नागौर सीधे बड़े शहरों से जुड़ जाएगा।

-नागौर में उद्योग धंधों को बढ़ावा मिलेगा व विभिन्न खनिज, मसालें, दालें इत्यादि विश्व प्रसिद्ध होने से व्यापारिक दृष्टिकोण से भी हवाई अड्डे की जरुरत है।

-राजकीय हवाई पट्टी विकसित करने के बाद जरूरत पडऩे पर छोटे-बड़े सभी विमान यहां उतर सकेंगे।

राय के लिए भेजी पत्रावली

डीएलबी के आदेश पर हमने भवन मालिक से आवश्यक दस्तावेज प्रस्ततु करने के लिए नोटिस दिया था। हमने यह पत्रावली तकनिकी राय के लिए नगर नियोजक अजमेर को भेजी है। वहां से जवाब मिलने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

जोधाराम विश्नोई, आयुक्त नगर परिषद नागौर