स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

स्कूल समय में मोबाइल बंद रखने के निर्देश, शिक्षकों को हो रही छटपटाहट

Shyam Lal Choudhary

Publish: Jul 20, 2019 11:15 AM | Updated: Jul 20, 2019 11:15 AM

Nagaur

mobile shut-off at school time, शिक्षा विभाग ने जारी किए आदेश - स्कूल समय में खुद के पास नहीं रख सकेंगे मोबाइल, स्कूल पहुंचते ही संस्था प्रधान के पास जमा कराने होंगे मोबाइल, सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में लागू होंगे आदेश

mobile shut-off at school time नागौर. शिक्षा विभाग education Department के उच्चाधिकारियों ने आदेश जारी कर स्कूल समय school time में शिक्षकों व अन्य कार्मिकों को मोबाइल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि विभाग ने यह आदेश सरकारी एवं गैर सरकारी दोनों विद्यालयों के लिए जारी किए हैं। हालांकि ज्यादातर निजी विद्यालयों में इसकी पहले ही पालना हो रही थी, लेकिन सरकारी विद्यालयों Government school के शिक्षकों को मोबाइल बंद रखने में परेशानी महसूस हो रही है। कई स्कूलों में संस्था प्रधानों ने शिक्षकों के मोबाइल अपने पास रखने शुरू किए हैं, जिससे शिक्षकों को छटपटाहट हो रही है।

पढ़ाई पर पड़ रहा था असर
शिक्षा विभाग के आदेश में यह कहा गया है कि स्कूल में कार्यरत सभी कार्मिक अपने साथ मोबाइल लेकर आते हैं और स्कूल समय मे बातें करते रहते हैं, जिससे अध्यापन का माहौल नहीं बन पाता है। उच्चाधिकारियों के निरीक्षण में यह सामने आया कि शिक्षक एवं कार्मिक स्कूल समय में अपने मोबाइल पर वाट्सएप एवं फेसबुक WhatsApp and Facebook on Mobile के साथ बातों में व्यस्त रहते हैं एवं कक्षाओं में अध्यापन नहीं करवाते हैं।

संस्था प्रधान भी आएंगे चपेट में
विभाग ने संस्था प्रधानो को निर्देश जारी किए हैं कि वे विद्यालय समय में शिक्षकों एवं कार्मिकों के मोबाइल बंद रखना सुनिश्चित करें तथा अपने पास जमा रखें। भविष्य में उच्चाधिकारियों के निरीक्षण के दौरान कोई भी कार्मिक मोबाइल का प्रयोग करते पाया गया तो सम्बन्धित कार्मिक के साथ संस्था प्रधान के खिलाफ भी नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी हो चुके हैं आदेश
गौरतलब है कि स्कूल समय में मोबाइल उपयोग होने की शिकायतें मिलने पर राज्य सरकार के निर्देश पर पूर्व में भी शिक्षकों के स्कूल समय में मोबाइल उपयोग पर पाबंदी लगाई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही व उदासीनता के चलते आदेशों की पालना नहीं हो पाई। अब देखना यह है कि इस बार आदेश की पालना कहां तक सुनिश्चित होती है।