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नागौर शहर के जल स्रोतों पर अतिक्रमण, एसडीएम ने किया ऐसा काम, जिससे उड़ी अतिक्रमियों की नींद

Shyam Lal Choudhary

Publish: Jan 22, 2020 17:43 PM | Updated: Jan 22, 2020 17:43 PM

Nagaur

नागौर एसडीएम दीपांशु सांगवान ने नगर परिषद को बताया पूर्णतया विफल इकाई, प्रतिबंधित भूमि को बचाने के लिए उच्च स्तरयी जांच कराने की मांग, कलक्टर सहित हाईकोर्ट व ग्रीन ट्रीब्युनल को लिखे पत्र

Encroachment on water sources of Nagaur city नागौर. पिछले काफी समय से विवादों में चल रही नागौर नगर परिषद की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए नागौर एसडीएम दीपांशु सांगवान ने पूर्णतया विफल इकाई बताया है, साथ ही प्रशासनिक सुधार की दिशा ले जाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी करने के लिए जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव सहित राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, राष्ट्रीय ग्रीन ट्रीब्युनल कोर्ट नइ दिल्ली के रजिस्ट्रार, स्वायत्त शाशन विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है।

नागौर एसडीएम सांगवान ने जिला कलक्टर सहित अन्य विभागों एवं न्यायालयों को लिखे पत्र में बताया कि उन्होंने नागौर शहर के जल स्रोतों/जल स्रोतों की आड की भूमि/जल स्रोतों की अंगोर भूमि एवं गोचर भूमि पर नगर परिषद की मिलीभगत से अतिक्रमण करवाने तथा उनको विधि विरुद्ध नियमन करने सम्बन्धी शिकायतें मिलने पर उन्होंने नागौर तहसीलदार से जांच करवाई, जिस पर तहसीलदार ने विभिन्न मौका रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि नागौर उपखंड क्षेत्र के जल स्रोतों यथा जड़ा तालाब, बख्तासागर तालाब, प्रताप सागर तालाब, दुलाया, लाल सागर तालाब, समस तालाब, गांछोलाई नाडी, तेलीनाडा, मुंदोलाव नाडी, गिनाणी तालाब, कृषि मंडी के पश्चिम दिशा में स्थित नाडी आदि पर पिछले कुछ समय में विधि विरुद्ध अतिक्रमण कर नियमन किए गए हैं, जिनकी उच्च स्तरीय जांच करवाया जाना न्यायोचित लगता है।

न्यायालय के आदेशों की पालना जरूरी
एसडीएम ने अपने पत्र में बताया कि यह प्रकरण जनहित भावना से प्रेरित होकर इस उद्देश्य से संज्ञान में लाया जा रहा है कि उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय राजस्थान के आदेशों की अनुपालना में प्रतिबंधित भूमि के विधि विरुद्ध प्रयोग को रोका जा सके। एसडीएम ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा कि नागौर नगर परिषद एक पूर्णतया विफल इकाई में परिवर्तित होती जा रही है, जिसको प्रशासनिक सुधार की दिशा में ले जाया जा सके तथा प्रतिबंधित भूमि को संरक्षित कर जनोपयोगी दृष्टि से मास्टर प्लान के अनुरूप प्रयोग लेने के लिए नगर परिषद को आदेशित किया जा सके।

पहले भी जारी हो चुके हैं नोटिस
गौरतलब है कि नागौर शहर के तालाबों एवं उनकी अंगोर भूमि पर किए गए अतिक्रमण को लेकर पिछले सात-आठ वर्षों में तहसीलदार द्वारा कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन राजनीतिक रसूखात के चलते अब तक ठोस काईवाई नहीं हो पाई है। इसके चलते अतिक्रमियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और दिनों-दिन नाडी-तालाब सिमटते जा रहे हैं।

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