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बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में अहम रोल निभा रही ‘अटल टिंकरिंग लैब’

Shyam Lal Choudhary

Publish: Nov 10, 2019 10:28 AM | Updated: Nov 10, 2019 10:28 AM

Nagaur

'Atal Tinkering Lab' playing an important role in developing scientific thinking in children

जिले में हो रहे बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि जगाने के प्रयास, नागौर व मूण्डवा के बाद अब डेह में एटीएल खोलने की कवायद, केन्द्र सरकार दे रही विशेष प्रोत्साहन

नागौर. 21वीं शताब्दी में तकनीक का बड़ा महत्व है। कुछ साल पहले यह सोच थी कि दुनिया को अगर प्रगति के रास्ते पर लाना है तो स्कूल और कॉलेज में विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना होगा। देश में बच्चों में नई सोच पैदा करने की जरूरत है। इसी मकसद से केन्द्र सरकार द्वारा ‘अटल टिंकरिंग लैब’ 'Atal Tinkering Lab' योजना की शुरुआत की गई। यह लैब योजना बच्चों में क्रिएटिविटी पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

नागौर जिले के शारदा बाल निकेतन विद्यालय, नागौर एवं मूण्डवा के श्री वागीश्वरी विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में पिछले एक साल से अटल टिंकरिंग लैब में विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के विभिन्न पहलुओं को समझाने के साथ-साथ उपकरणों और औजारों का इस्तेमाल कर कुछ नया करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। अटल लैब में शुरुआत में 12 लाख रुपए के आइआर सेंसर से लेकर थ्रीडी प्रिंटर्स और अल्ट्रासॉनिक सेंसर जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं, जबकि चार साल तक दो-दो लाख रुपए का वित्तीय सहयोग दिया जाएगा। जिले के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि 10 विद्यालयों को एटीएल की मंजूरी मिल गई है, जो आने वाले दिनों में चालू हो जाएंगी।

नागौर जिले के विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिए सार्थक प्रयास हो रहे हैं। हालांकि सरकारी स्कूलों में आशानुरूप लैब एवं उपकरण नहीं हैं, लेकिन फिर भी यह कहा जा सकता है कि नागौर के विद्यार्थी विज्ञान के क्षेत्र में आने वाले वर्षों में बड़ा कारनाम करेंगे। गत 5 से 8 नवम्बर तक कोलकाता में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साइंस (आईआईएसएफ) फेस्टिवल-2019 में नागौर जिले के 36 विद्यार्थियों एवं 13 शिक्षकों ने भाग लिया है। पिछले पांच वर्ष से आयोजित हो रहे आईआईएसएफ का मुख्य उद्देश्य विज्ञान एवं तकनीकी को प्रमोट करना, कम से कम समय में विज्ञान के क्षेत्र में भारत को अग्रणी बनाना, लोगों को विज्ञान के साथ जोडऩा, हमारे जीवन की समस्याओं के समाधान में विज्ञान तकनीकी इंजीनियरिंग एवं गणित के तरीकों को उपयोग में लाना, वैज्ञानिक ज्ञान, गतिविधि, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान, टीमवर्क, 21 वी शताब्दी की दक्षता के द्वारा युवाओं का सहयोग करना, विज्ञान के क्षेत्र में कार्य एवं अध्ययन के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना, विज्ञान महोत्सव द्वारा भारत को विश्व गुरु की ओर अग्रसर करना है।

प्रदेश में नागौर की स्थिति अच्छी
विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नागौर जिले में गत वर्ष 15 हजार 231 विद्यार्थियों ने विज्ञान विषय से 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी, जिनमें से 11 हजार 892 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। यह संख्या प्रदेश में टॉप 5 जिलों में है। दूसरी सुखद स्थिति यह है कि इस वर्ष जिला मुख्यालय के श्री बीआर मिर्धा राजकीय महाविद्यालय में विज्ञान (गणित) वर्ग की कटऑफ 86.40 प्रतिशत तथा विज्ञान (बॉयो) वर्ग की कटऑफ 81 प्रतिशत रही।

जानिए, क्या है अटल टिंकरिंग लैब
भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से नागौर जिले के दो स्कूलों में ‘अटल टिंकरिंग लैब’ (एटीएल) की शुरू की है। इस लैब के जरिए स्कूली बच्चों को नए जमाने की तकनीक से आधुनिक उपकरण बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। एटीएल के जरिए स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में मदद मिल रही है। सरकार की कोशिश है कि बालमन से ही प्रतिभा को निखार कर बच्चों को आविष्कारक बनाया जाए।

कोलकाला आईआईएसएफ में भाग लेने वाले बच्चों से बातचीत
- मैं पहली बार इस प्रकार के विज्ञान महोत्सव में शामिल हुई। मुझे अंतरराष्ट्रीय मंच के माध्यम से अपनी जिज्ञासा रखने एवं वैज्ञानिकों के विचार सुनने व समझने का अवसर मिला। मेरी रुचि विज्ञान के प्रति पहले से थी, लेकिन इस आयोजन के माध्यम से वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विज्ञान की सार्थकता भी सिद्ध हुई।
- दिशा सोनी, कक्षा 11, नागौर

- विज्ञान महोत्सव-2019 के माध्यम से मैंने देश-विदेश से आए विभिन्न विद्यार्थियों एवं वैज्ञानिकों के साथ संवाद का अवसर प्राप्त किया। इससे मुझमें विज्ञान के प्रति रुचि पैदा हुई। साथ ही भविष्य निर्माण में विज्ञान का योगदान समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
- वत्सला शर्मा, कक्षा 9, नागौर

- बचपन से ही विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का यह अच्छा प्रयास है। आईआईएसएफ 2019 में शामिल होकर अपने आप को आत्मविश्वास से परिपूर्ण मान रही हूं। मुझे लगता है कि वास्तव में इस प्रकार के आयोजनों से भारत में अधिक से अधिक वैज्ञानिकों एवं आविष्कारों का निर्माण संभव हो सकेगा।
- ख्याति चौधरी, कक्षा 11, नागौर

- इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2019 एसएसवी कोलकाता में मैंने विभिन्न विषयों को प्रयोगों द्वारा जाना। विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में हमें विभिन्न वरिष्ठ वैज्ञानिकों के माध्यम से हमारे देश की उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई।
- संगम आचार्य, कक्षा ग्यारहवीं, नागौर


वैज्ञानिकों से संवाद को मौका मिला
इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2019 में नागौर के बच्चों ने भौतिक, रसायन विज्ञान, गणित, भूगर्भ विज्ञान, जीव विज्ञान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ संवाद स्थापित किया तथा विभिन्न प्रकार के ‘करो और सीखो’ आधारित प्रयोग भी किए। नागौर के विद्यार्थियों ने विज्ञान क्विज में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
- श्रवण कुमार सोनी, शिक्षक, नागौर

मिरजास के शिक्षक का विज्ञान के क्षेत्र में कमाल
9 अप्रेल 2017 को डॉक्टर अब्दुल कलाम नेशनल काउंसिल ऑफ यंग साइंटिस्ट इंडिया क्लब का शुभारंभ करने वाले सरकारी शिक्षक गजेन्द्र गेपाला (क्लब डायरेक्टर) ने क्लब को गत वर्ष सिल्वर केटेगरी क्लब में शामिल करवाने में सफलता प्राप्त की। मूण्डवा में शुरू किए गए इस विज्ञान क्लब का उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों में विज्ञान व गणित के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए क्लब की गतिविधियों के तहत बच्चों से प्रयोग करवाए जा रहे हैं। क्लब विपनेट से संबंध भारतवर्ष में स्थित अन्य क्लब्स से संबंध स्थापित कर विज्ञान प्रतियोगिता में भाग लेता है और उनके साथ मिलकर विज्ञान मेलों का आयोजन करता है। खास बात यह है कि क्लब द्वारा अब तक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मिरजास, आदर्श बाल निकेतन लुणसरा, आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय भडाणा, कृष्णा बाल निकेतन उच्च माध्यम विद्यालय डेह, दयानंद शिक्षण संस्थान मेहराणा डेगाना में अपनी शाखा का विस्तार किया है। इसमें मुख्य रूप से मॉडल मेकिंग, मॉडल प्रजेंटेशन व वैज्ञानिकों के साथ वार्ता, पेपर प्रेजेंटेशन के द्वारा शिक्षक अपने शोध पत्रों को प्रस्तुत करते हैं। क्लब द्वारा अब तक नेशनल लेवल, स्टेट लेवल, रीजनल लेवल पर विज्ञान मेलों का आयोजन किया जा चुका है। 9 अप्रेल 2017 को श्री वागीश्वरी विद्या मंदिर मंदिर मूण्डवा में रिजनल लेवल के विज्ञान मेले के साथ ही राजस्थान में पहली बार इसरो द्वारा अपनी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था। राजस्थान में ऐसे 69 क्लब संचालित हो रहे हैं।

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