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ग्राम भांठा में उधार के शिक्षक के सहारे ११४ बच्चों का भविष्य

Murari Soni

Publish: Aug 30, 2019 11:08 AM | Updated: Aug 30, 2019 11:08 AM

Mungeli

अफसर उदासीन: स्कूलों में नहीं है शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था

लोरमी. जहां एक ओर केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए लाखों करोड़ो खर्च किया जा रहा है। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं, लेकिन जिस स्कूल में कोई शिक्षक न हो, उस स्कूल में विद्यार्थी क्या शिक्षा प्राप्त करेंगे। यह सीधी व सरल सी बात विभागीय अधिकारियों के समझ में नहीं आ रही है।
गौरतलब है कि लोरमी विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम भांठा में कुछ वर्षों से शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हुई है। वैकल्पिक के तौर पर एक शिक्षक की नियुक्ति किया गया है। स्कूल के 114 बच्चे अध्ययनरत हैं। ऐसे में जहां एक ओर शिक्षा के स्तर को सुधारने सरकार लाख दावे कर ले, लेकिन ये दावे जमीन में ही खोखले साबित हो रहे हैं। शिक्षकों की कमी से जूझते स्कूल के छात्र तो पढऩा चाहते हैं और स्कूल भी जाते हैं, लेकिन शिक्षकों की गैरमौजूदगी के चलते ये छात्र अपनी पढ़ाई नहीं कर पाते। ऐसे में कैसे ये अपना भविष्य संवारेगे, यह सवाल बनकर रह गया है। मामला लोरमी विकास खण्ड के शासकीय पूर्व माध्य. शाला भांठा लोरमी एवं मुंगेली विकास खण्ड के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है। यहां कक्षा छठवीं से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई करायी जाती है। इस स्कूल में वर्तमान समय में 114 छात्र एवं छात्रायें अध्ययनरत हैं, जो कि अपना भविष्य संवारने की जद्दोजहद कर रहे हैं। बताते चलें कि भांठा के इस स्कुल में पिछले कई वर्षों से स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गयी है, जिसके कारण यहां के बच्चे अपना भविष्य बनाने की जद्दोजहद कर रहे है। छात्रों ने बताया कि हमारे इस स्कूल में वर्तमान में एक ही शिक्षक है, जिन्हे प्राथमिक शाला साल्हेघोरी से लाकर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में रखा गया है। इसके बाद भी हमारी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। वहीं बताना लाजिमी होगा कि एक शिक्षक के भरोसे पूरे विद्यालय की पढ़ाई कराया जा रहा है। स्कूल में तीन कक्षायें होने से उक्त शिक्षक के द्वारा कैसे तीनों कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता होगा, यह सोचनीय है। इसके अलावा उक्त शिक्षक कार्यालयीन कार्य से मुख्यालय आना जाना करते रहते हैं।
समवन्यवक नहीं आ रहे अपने मूल शाला में
इस विद्यालय में दिनेश चंद्राकर की पदस्थापना हुयी थी। उन्हें समन्वयक बना दिया गया, जिससे वे अध्यापन कार्य से दूर हो गए, लेकिन अभी जारी सूची में 16 समन्वयकों को हटा दिया गया, जिनमें इनका नाम भी था। इसके बाद भी दिनेश चंद्राकर अपने मूल विद्यालय में नहीं जा रहे है।
इनका कहना है
कक्षा सातवीं के बच्चों ने बताया कि जब से हम इस विद्यालय में भर्ती हुए हैं, तब से शिक्षक नहीं हैं। मात्र एक षिक्षक है, जो एक दो क्लास पढ़ाते है। उसके बाद वो भी कार्यालयीन कार्य से मुख्यालय चले जाते हैं। वहीं कक्षा ८वीं के छात्र ने बताया कि तीन वर्षों से यहां से पढ़ाई कर रहे है। पहले एक भी शिक्षक नहीं आते थे पढ़ाने। अभी कुछ दिनों पहले एक दूसरे स्कूल के शिक्षक को आए हंै। वे भी कुछ देर पढ़ाने के बाद स्कूल के काम से चले जाते हंै। हम सभी लोग गाइड के माध्यम से अपनी पढाई करते हैं।

&लोरमी के के खण्ड शिक्षा अधिकारी को कहा गया है कि एक प्रस्ताव बनाकर भेजें। उक्त विद्यालय में जल्द ही शिक्षक की नियुक्ति कर दिया जायेगा।
जीपी भारद्वाज, डीईओ, मुंगेली