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सप्ताहभर से वर्षा नहीं होने से क्षेत्र के किसान परेशान, बुआई भी पिछड़ी

Murari Soni

Publish: Jul 17, 2019 11:19 AM | Updated: Jul 17, 2019 11:19 AM

Mungeli

पर्याप्त वर्षा का इंतजार: किसान की चिंताएं बढ़ी, बीज खराब होने की आशंका

मुंगेली. माह जून के 22 तारीख से आए मानसून और उसके बाद क्षेत्र में हुई अच्छी बारिश से किसानों ने खेत तैयार करना शुरू कर दिया था। इसके बाद सप्ताह भर से एक बूंद भी बारिश नहीं होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी है। 
आम तौर पर जुलाई के आखिरी या फिर अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून ब्रेक होता है। लेकिन ऐसा लगता है कि इस बार जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही मानसून पर ब्रेक लग गया है। फिलहाल बंगाल की खाड़ी पर ऐसा कोई सिस्टम नहीं है, जिससे बारिश की संभावना बने। इसके अलावा हिमालय की ओर से पलटकर आने वाली नमीयुक्त हवाएं भी अभी वहीं तक सीमित है। इसकी वजह से एक सप्ताह से बारिश नहीं हुई है। नमी की कमी की वजह से भी तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। मंगलवार दोपहर एक बजे मुंगेली में तापमान 35 सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो सामान्य से 5 सेल्सियस अधिक है। बादलों के छाए रहने लेकिन बारिष न होने के कारण उमस भी बढ़ रही है।
जिले में औसतन वर्षा ८६९.३ मिमी होती है
जिले में सामान्य वर्षा का औसत 869.3 मिमी है। 1 जून से 9 जुलाई 2019 कुल वर्षा 202.6 मिमी रही। इसी अवधि में गत वर्ष 273.7 मि,मि वर्षा रही। जबकि विगत 10 सालों में इसी अवधि में 245.5 मिमी औसत वर्र्ष दर्ज की गयी है। जिले में 10 वर्ष की वर्षा में कमी 33.8 प्रतिशत रही। जिले मेें सबसे अधिक बारिश तहसील पथरिया में 254.2 मिमी तथा तहसील लोरमी में 207.2 मिमी बारिश हुई है। सबसे कम बारिश तहसील मुंगेली में 165.8 मिमी हुई है। यानी विगत वर्ष की अपेक्षा अभी तक काफी कम वर्षा हुई है।
सावन का महीना बुधवार से शुरू हो रहा है पर सावन के लक्षण कहीे भी नहीं दिख रहे हैं। खेत सूखने के कगार पर हैं। मानूसन की बेरूखी से भयभीत किसान अब ग्राम देवता व मंदिरों में गुहार लगाने लगे हंै। दिन में धूप व बीच-बीच में बादल क्षणिक राहत देकर फिर गायब हो जा रहे हैं। हालांकि मौसम विभाग की मानें तो बंगाल की खाड़ी में थोडी हलचल दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में इसके और सक्रिय होने की संभावना है।
बुआई में पिछड़े
वर्ष कम होने सें किसान बुआई में पिछड़ गए हैं। जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश से उत्साहित किसानों ने खेतों का रूख किया था और खेत में बोनी आरंभ हो गई थी। हालांकि मानसून के देरी से आने के कारण धान की बुआई पिछड़ गई है। पिछले दिनों पूरे जिले में 60 हजार 250 हेक्टयर में धान की बुआई हो पाई है। अब इन बीजों को पानी की सख्त आवश्यकता है। बादल आ रहे हैं मगर बिना बरसे लौट जा रहे हैं। अगर यहीं हाल रहा तो बीज झुलस जाएंगे और किसानों की सारी मेहनत व्यर्थ हो जाएगी। जिले में रोपा पद्धति से बुआई के लक्ष्य में इस बार 7800 हेक्टयर की कमी आई है। पिछले वर्षा रोपा का लक्ष्य 37800 हेक्टयर था, जो घट गया है । हालांकि रोपाई अभी 20 से 25 जुलाई तक की जा सकती है। संकट यहां नहीं है वरन संकट बोता किसानों के लिए है। जिले के हजारों हेक्टयर में धान की सीधी बुआई होती है, जो अब तक 60 हजार 250 हेक्टयर तक ही हो पाई है। किसानों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में अगर अच्छी बारिश नही हुई तो पूरी बुआई नष्ट हो जाएगी। धान का थरहा डालकर बैठे किसान उसकी रोपाई के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। हालांकि पथरिया क्षेत्र में पानी की स्थिति कुछ बेहतर होने से वहां के किसान रोपा पद्धति से बुआई करने में जुट गए हैं। इस प्रकार से बुआई का प्रतिशत 87.3 है।

 

आगे यदि बारिष नहीं हुई तो.......
आने वाले सप्ताह में यदि बारिष नहीं हुई तो बोए गये धान के बीज सूख्ी और गर्म जमीन में झुलसकर रह जाएंगे। दूसरी ओर बारिष के दौरान जो बुवाई हुई उसका अंकुरण तो हो गया, लेकिन बारिष नहीं होने पर तेज धूप में वे अंकुरण भीझुलस जायेंगे और किसानों को फिर से बुवाई करनी होगी। फिर से जुताई भी करनी होगी। इससे तात्कालिक तौर पर आर्थिक नुकसान उठाना पडेगा।
किसानों के अनुसार खरीफ फसल खासकर धान की बुवाई जुलाई के पहले सप्ताह में हो जानी चाहिए। और रोपा के लिए बेहतर समय 20 जुलाई तक माना गया है। ऐसे में देरी के कारण फसल को जरूरत के अनुसार बारिष का पानी नहीं मिलने से फसल सूख सकती है। यदि बीज झुलस गये तो स्वाभाविक तौर पर किसानों को दुबारा बीज की खरीदी करनी होगी। इसका असर उत्पादन पर पडेगा। ऐसे में फसल की कुल लागत के मुकाबले किसानों को कम मुनाफा होगा। ऐसे में किसानों को आर्थिक संकट से गुंजरना पड सकता है। और यदि अकाल जैसी स्थिति आई तो इसका सीधा असर बाजार पर पडेगा। क्योंकि उद्योग विहीन मुंगेली जिले का बाजार 100 प्रतिषत कृशि उत्पादन और उससे आये मुनाफे पर ही निर्भर है।