स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भगवान महावीर का जन्मोत्सव

Murari Soni

Publish: Sep 01, 2019 18:16 PM | Updated: Sep 01, 2019 18:16 PM

Mungeli

पर्यूषण महापर्व : 2 सितम्बर तक मनाया जाएगा उत्सव

मुंगेली. आत्मशुद्धि का उत्सव ‘पर्यूषण महापर्व’ नगर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जैन धर्मावलंबियों के लिए यह सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। आठ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में तप-जप-संयम-स्वाध्याय पर विषेश बल दिया जाता है। यह पर्व 26 अगस्त से 2 सितम्बर तक चलेगा।
स्थानीय सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में प्रतिदिन प्रात: 6 बजे से ही लोगों का आगमन प्रारंभ हो जाता है, जहां दर्शन, पूजन, प्रतिक्रमण आदि के पश्चात् प्रवचन का कार्यक्रम होता है। प्रवचन में कल्पसूत्र का वाचन किया जाता है, जो कि जैन परम्परानुसार इन आठ दिनों आवश्यक रुप से वांचन-श्रवण होता है। इस वर्ष मुंगेली में पर्वाराधन हेतु स्वाध्यायी बहनों बसंतीदेवी नाहर धमतरी एवं शारदा देवी छाजेड़ रायपुर के मार्गदर्शन में आराधना उत्साहपूर्वक जारी है। इस दौरान शुक्रवार को कल्पसूत्र वाचन के दौरान भगवान महावीर के जन्म का वृतांत आता है। अत: इस दिन भगवान महावीर का जन्म मनाया जाता है, जिसमें माता त्रिशला देवी द्वारा देखे गए चौदह स्वप्नों के विवरण बताए जाते हैं। तत्पष्चात् उन स्वप्नों को नमन कर भगवान को पालना में विराजमान कर जन्मोत्सव मनाया जाता है। दोपहर में प्रारंभ हुए इस भव्य आयोजन पशचात् पालना को अपने घर ले जाने का सौभाग्य बुधमलजी बीरोबाई लोढ़ा परिवार ने प्राप्त किया। कांतिलाल धीरजकुमार लोढ़ा के निवास स्थान पर रात्रि में शानदार भक्ति का आयोजन हुआ, जिसमें देर रात तक श्रद्धालु भजनों का आनंद लेते रहे। इसी दिवस शाम को मनीष पारख ने कुमारपाल महाराजा बन कर श्रीसंघ के साथ भगवान की 108 दीपों से महाआरती किया। जैन धर्म में तपस्या का अपना विषेश महत्व है। पूरे वर्ष भर तक तपस्या का क्रम किसी न किसी रुप में जारी रहता है, परन्तु पर्यूषण के इन आठ दिनों में लोग तपस्या से विशेष रुप से जुड़ते हैं। बड़ी तपस्याओं के क्रम में भावना सांखला ने 6 उपवास, मौलिक बैद ने 6 उपवास, श्रेयांस गोलछा ने 4 उपवास के प्रत्याख्यान लिए, जिसमें केवल गरम पानी का ही सेवन किया जाता है। इसके अतिरिक्त अनेक लोगों की एकासना, आयंबिल आदि तप चल रहे हैं। इसी क्रम में पर्व के द्वितीय दिवस कल्पसूत्र की भक्ति का लाभ गुलाबचंद कमलचंद राहुल कोठारी परिवार ने प्राप्त किया, जिनके निवास पर प्रभु भक्ति का षानदार आयोजन हुआ जिसमें सभी धर्मावलंबी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। पर्व के आठ दिनों में परमात्मा का विशेष रुप से शृंंगार किया जाता है, जिसे आंगी सजाना कहते हैं। महिलाओं एवं बालिकाओं ने अलग-अलग गु्रप बनाकर मंदिर में स्थापित प्रतिमाओं की भव्य सजावट कर रंगोली बनाई जा रही है, जिसका समाज के लोग शाम को मंदिर पहुंचकर दर्शन लाभ प्राप्त कर रहे हैं। प्रतिदिन उत्साहपूर्वक अलग-अलग ग्रुप द्वारा अपने-अपने स्तर से आकर्षक साज-सज्जा की जा रही है। प्रतिदिन रात्रि में विविध कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इनमें प्रथम दिवस धार्मिक हौजी का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें सभी वर्ग के लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बड़ों के साथ-साथ छोटे-छोटे बच्चों ने विविध प्रकार के कार्यक्रम प्रस्तुत किए। ऑल इन वन प्रतियोगिता में भक्ति गीतों के साथ-साथ हिंदी एवं संस्कृत के श्लोकों एवं धार्मिक क्रियाओं के मिश्रण का लोगों ने भरपूर आनंद उठाया।